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बदलते मौसम से फसलों पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर

मण्डला 7 फरवरी 2021

पिछले कुछ दिनों से मौसम में हो रहे बदलाव से चना, मसूर और गेंहूं फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। कभी गर्मी और कभी ठंड से फसलों में कीट व्याधी का प्रकोप लागने का खतरा मंडराने लगता है। कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि चने में इल्ली या जड़ माहू का प्रकोप लग सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को इन प्रकोपों से बचने की सलाह दी है। इस परिस्थिति से बचने के लिये किसानों को सलाह दी जाती है कि यदि चने में कटुआ इल्ली का प्रकोप लग रहा है। यह इल्ली हरे अथवा भूरे रंग की होती है और रात में निकलकर पौधे की शाखाओं को काटकर गिरा देती है। इसके नियंत्रण के लिये 01 लीटर क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. दवा 01 हेक्टेयर में छिड़काव करें एवं नाईट्रोजन युक्त उर्वरकों का अधिक मात्रा में उपयोग नहीं करने की सलाह दी है।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि गेंहूं में आर्मी वर्म, इसे फौजी कीट कहते है। यह नवजात इल्लियां छोटे पौधों की जड़ के पास से एवं बाली की अवस्था पर बालियों को काटकर गिरा देती है। हवा के झोंकों के साथ यह फैलती है और रात में अधिक नुकसान पंहुचाती है। इसके नियंत्रण के लिये इमामेक्टीन वेन्जोएट 250 ग्राम को 500 ली पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। गेंहूं में जड माडू गेंहूं की जड़ों का रस चूसकर 40 से 50 प्रतिशत तक पैदावार में गिरावट करे देती है। इसके नियंत्रण के लिये क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. कीटनाशक मात्रा सवा से डेढ़ लीटर प्रति हेक्टेयर अथवा थायोमेथाक्जाम 25 डब्ल्यू.जी. की 125 ग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। मौसम में हुआ यह बदलाव सब्जियों को भी प्रभावित कर सकता है। सर्दी के बाद अचानक गर्मी से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

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