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मलेरिया, डेंगू एवं चिकुनगुनिया से बचाव हेतु एडवाईजरी   मण्डला 25 सितम्बर 2021

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि वर्षाकाल में मच्छरों की उत्पत्ति बढ़ जाती है एवं मच्छरजन्य परिस्थितियाँ निर्मित होती हैं। मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया के प्रसार की भी संभावना होती है। इसलिए मलेरिया, डेंगू एवं चिकुनगुनिया से बचाव हेतु आवष्यक सावधानियाँ बरतना अत्यंत आवष्यक है। मलेरिया के लक्षण में कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। कपकपी के साथ तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी होना, बेचैनी, कमजोरी, सुस्ती, रुक-रुक्कर बुखार आना, पसीना आकर बुखार उतरना, ठंड गर्मी या तपन का महसूस होना आदि मलेरिया के लक्षण हैं। बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में खून की जांच कराऐं एवं मलेरिया की पुष्टि होने पर पूर्ण उपचार लें। खाली पेट दवा का सेवन कदापि नहीं करना चाहिये। मलेरिया की जांच व उपचार सभी शासकीय अस्पतालों पर निःशुल्क उपलब्ध है।

डेंगू मलेरिया फैलाने वाले मच्छर जहां पैदा होते हैं जैसे- छत पर खुली टंकियां, खाली बर्तन, मटके, गमले, टायर, कूलर, फ्रिज के पीछे भरा पानी, गार्डन, फूलदान, पात्रों में एक सप्ताह से अधिक भरे साफ पानी में मच्छर अंडे देते हैं जिससे लार्वा एवं पूर्ण वयस्क मच्छर बनता है। डेंगू के लक्षण 2-7 दिन तक बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द जोड़ों में दर्द, आंख के पीछे दर्द, खसरा जैसे लाल चकत्ते छाती एवं हाथों पर डेंगू के लक्षण हैं। डेंगू के उपचार के लिए डेंगू की पुष्टि होने पर चिकित्सक के परामर्श अनुसार पूर्ण उपचार लेना चाहिए। रोगी को पर्याप्त मात्रा में पेय पदार्थ जैसे- फलों का रस, पानी, ओ.आर.एस लेना चाहिए एवं आराम करना चाहिए। किसी भी दर्द निवारक गोली का सेवन नहीं करना चाहिए। मच्छरों की उत्पत्ति को रोकने हेतु भरे हुए पानी को हर 3-4 दिन में बदलना चाहिए।

पानी संग्रहण करने वाली टंकी, बाल्टी एवं अन्य, पानी से भरे हुए बर्तन को ढक्कर रखना चाहिए। वॉशबेसिन, बाथरुम में पानी निकासी के स्थान में मच्छररोधी जाली लगवाना चाहिए एवं मच्छर की उत्पत्ति स्थल पर मिट्टी का तेल या जला हुआ ऑइल डालना चाहिए। यह आवश्यक है कि घरों के आस-पास सफाई रखें, अनावश्यक पानी जमा न होने दें। सोने के लिए हम मच्छरदानी का उपयोग करें, घरों में मच्छर निरोधक जालियों, मच्छर निरोधी क्रीम, कॉइल का उपयोग करें। अपने घरों में मच्छर निरोधक पौधे जैसे- लेमनग्रास, लहसुन, लेवेंडर, गेंदा, तुलसी, सिट्रोनेला इत्यादि लगायें।

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