मण्डला। विजयदशमी के पावन पर्व पर विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के संयुक्त तत्वावधान में ज्ञानदीप स्कूल परिसर में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के रूप में धर्म प्रसार क्षेत्रीय प्रमुख मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ ललित परिधि उपस्थित रहे। वहीं स्वामी शारदात्मक जी महाराज, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रफुल्ल मिश्रा, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, सह समरसता प्रमुख महाकौशल प्रांत श्रीमति वंदना अवस्थी, विभाग संयोजिका श्रीमति पूनम सोनी, समाजसेवी सरपंच श्रृद्धा उइके, वरिष्ठ समाजसेवी गणेश जसवानी, श्री चद्रवंशी, विश्व हिन्दू परिषद जिला अध्यक्ष एड. मनोज फागवानी सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं भगवान श्रीराम के तैल्यचित्र पर माल्यार्पण और पूजन-अर्चन के साथ किया गया यहां पर उपस्थित अतिथियों ने शस्त्र पूजन किया। श्रृद्धाभाव के साथ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए उपस्थित अतिथियों का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया गया। मुख्यवक्ता ललित परिधि ने अपने संबोधन में सनातन धर्म भारतीय सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक मान्यताओं के संरक्षण पर विचार व्यक्त कि उन्होंने धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों को लेकर भी तीखे अंदाज में अपनी बात रखी उन्होंने समाज को इन विषयों के प्रति जागरूक रहने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक व्यापक पद्धति है जिसमें परिवार संस्कार नैतिकता कर्तव्य और सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण स्थान है।

वहीं सह समरसता प्रमुख महाकौशल प्रांत श्रीमति वंदना अवस्थी ने कहा कि समाज के बीच जाकर भारतीय संस्कृति धार्मिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए युवाओं की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास की जानकारी देना आवश्यक है परिवार और समाज के स्तर पर संस्कारों को मजबूत करने से ही सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है भारतीय परंपराओं में शस्त्रों का पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक भी है। कार्यक्रम के दौरान विभाग संयोजिका श्रीमति पूनम सोनी ने आदिशक्ति, नारी शक्ति और महिलाओं की एकजुटता के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, साहस और सृजन का प्रतीक माना गया है।

समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन्हें आत्मविश्वास के साथ प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढऩा चाहिए। समाजसेवी सरपंच श्रृद्धा उइके ने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अत्याचारों और अन्याय से बचाव के संदर्भ में आत्मरक्षा के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम बनने तथा आवश्यकता पडऩे पर आत्मरक्षा के लिए शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण लेने की सलाह दी। उनके संदेश का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं में साहस आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति सजगता बढ़ाना रहा उन्होंने आदिशक्ति की आराधना और शस्त्र पूजन की परंपरा का उल्लेख करते हुए नारी शक्ति की एकता को समाज की मजबूती का आधार बताया कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने भी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष मनोज फागवानी ने अपने संबोधन में शस्त्र पूजन के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित किया उन्होंने कहा कि शस्त्र हमारी आस्था और संस्कृति का आधार हैं।

भारतीय परंपरा में शक्ति की आराधना के साथ धर्म, न्याय और कर्तव्य के पालन का संदेश निहित है उन्होंने कहा कि बच्चों को सनातन संस्कृति भारतीय सभ्यता और पारंपरिक मूल्यों की शिक्षा देना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने सभी उपस्थित अतिथि एवं कार्यकर्ताओ का आभार व्यक्त किया। इस दौरान पूर्व विश्व हिन्दू परिषद अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अलोक खरया, नगर अध्यक्ष शंशाक चौरसिया, जिला मंत्री ललित हिडाऊ, जिला मंत्री अमित बैरागी सहित खंड प्रमुख मुख्य रूप से उपस्थित रहे। संगठन के अनेक कार्यकर्ता दूर दराज से शस्त्र लेकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे जहां पर भव्य शस्त्र पूजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मंच का संचालन अमित बैरागी द्वारा किया गया।

