मंडला, 21 अक्टूबर 2026
जिले में पारम्परिक माटीशिल्प को प्रोत्साहित करने तथा माटीशिल्पियों एवं कारीगरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों एवं स्थानीय निकायों के हाट-बाजारों में उनके उत्पादों के विक्रय हेतु उचित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इन शिल्पियों एवं कारीगरों से किसी भी प्रकार का शुल्क अथवा कर वसूल नहीं किया जाएगा।
जिला पंचायत मण्डला के ग्रामोद्योग एवं माटीकला शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश माटीकला बोर्ड, भोपाल द्वारा जारी निर्देशों के पालन में पारंपरिक माटीशिल्पियों एवं कारीगरों द्वारा निर्मित मिट्टी की मूर्तियों, दीयों तथा सजावटी उत्पादों के विक्रय को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय निकायों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले हाट-बाजारों में उचित स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सजावटी एवं उपयोगी वस्तुओं के विक्रय को प्रोत्साहन मिल सके।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य जिले की पारम्परिक माटीशिल्प कला का संरक्षण एवं संवर्धन करना, स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पादों के विक्रय के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना तथा उनकी आजीविका को सुदृढ़ करना है। इससे माटीशिल्पियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही पारंपरिक कला एवं स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
