मण्डला। दशहरे के पावन अवसर पर जहां शहर में जगह-जगह धार्मिक आयोजन और भंडारे हुए वहीं रजक परिवार के साईं दरबार में आयोजित भिक्षा भंडारा अपनी अनोखी परंपरा और श्रद्धा के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। साईंनाथ महाराज की भक्ति में रमे भक्त किशोर रजक पिछले 26 वर्षों से दशहरे के अवसर पर भिक्षा से प्राप्त सामग्री से भंडारा आयोजित करते आ रहे हैं। इस वर्ष भी उन्होंने परंपरा को जारी रखते हुए अपने घर में स्थापित साईं दरबार में 26वें भिक्षा भंडारे का आयोजन किया। भंडारे में शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रृद्धालु पहुंचे और साईंनाथ महाराज का प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि भंडारे में बनने वाले व्यंजनों के लिए सामग्री बाजार से खरीदकर नहीं, बल्कि भिक्षा के माध्यम से एकत्रित की गई सामग्री से तैयार की गई। साईभक्त किशोर रजक की मान्यता है कि साईंनाथ महाराज की कृपा से भिक्षा में जो सामग्री प्राप्त होती है उसी से भंडारे की पूरी व्यवस्था हो जाती है और कभी किसी चीज की कमी नहीं पड़ती।

भक्त किशोर रजक की साईंनाथ महाराज के प्रति भक्ति का तरीका भी अपने आप में अलग है। दशहरे के आयोजन से पहले वे लगातार नौ दिनों तक मौन व्रत रखते हैं और इसी दौरान घर घर जाकर भिक्षा मांगते हैं। भिक्षा में श्रृद्धालुओं द्वारा जो भी अनाज सब्जियां खाद्य सामग्री या अन्य सामग्री दी जाती है उसे सहेजकर दशहरे के दिन भंडारे में उपयोग किया जाता है। किशोर रजक के लिए यह केवल भंडारा नहीं बल्कि साईंनाथ महाराज के प्रति उनकी आस्था सेवा और समर्पण का माध्यम है। उनका कहना है कि भिक्षा मांगने का उद्देश्य किसी से कुछ लेना नहीं बल्कि लोगों को सेवा और साईं भक्ति से जोडऩा है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में शहर के अनेक लोग भी अपनी श्रृद्धानुसार सहयोग करते हैं। सुबह से ही साईं दरबार परिसर में चहल-पहल शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा श्रृद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। भंडारे की तैयारियों में परिवार के सदस्यों के साथ साईं भक्तों ने भी सेवा की। भक्त किशोर रजक ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी उन्हें विश्वास था कि साईंनाथ महाराज की कृपा से भंडारे में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आएगी। भिक्षा से जितनी सामग्री प्राप्त हुई उसी से भोजन तैयार किया गया और हजारों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन के दौरान साईं बाबा की पालकी साईं दरबार से नर्मदा नदी के तट तक निकाली गई। श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ पालकी यात्रा में शामिल हुए। नर्मदा तट पर पहुंचकर साईंनाथ महाराज की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद नर्मदा नदी की आरती की गई। पालकी यात्रा के दौरान साईं भक्ति के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने साईंनाथ महाराज के दर्शन किए और नर्मदा तट पर पूजा-अर्चना में सहभागिता की। शाम करीब 5 बजे भक्त किशोर रजक ने ढोल-धमाकों के साथ साईं बाबा की मूर्ति का विसर्जन किया।

विसर्जन से पहले विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही किशोर रजक ने अपना नौ दिवसीय मौन व्रत भी समाप्त किया। नौ दिन तक मौन रहकर भिक्षा मांगने के बाद दशहरे के दिन भंडारा कराना और फिर साईं बाबा की प्रतिमा का विसर्जन करना इस आयोजन की वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में साईं भक्त मौजूद रहे। साईं दरबार में पहुंचे हजारों धर्मप्रेमियों ने प्रसादी ग्रहण की। रजक परिवार की ओर से सभी साईं भक्तों से सपरिवार भंडारे में शामिल होने का आग्रह किया गया था। बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित आयोजन में पहुंचे। किसी ने प्रसादी ग्रहण की तो किसी ने भोजन व्यवस्था में सेवा कर अपनी भागीदारी निभाई। रजक परिवार द्वारा आयोजित यह भिक्षा भंडारा अब क्षेत्र में एक अलग पहचान बना चुका है। यहां आने वाले लोगों के लिए यह प्रसादी साईंनाथ महाराज के आशीर्वाद के रूप में ग्रहण की जाती है। रजक परिवार का यह आयोजन दशहरे के पर्व को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता से भी जोड़ता है। भिक्षा में मिली सामग्री से तैयार भोजन जब हजारों लोगों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित होता है तो उसमें दान देने वाले और प्रसाद ग्रहण करने वाले सभी लोग एक ही भाव से शामिल होते हैं। साईंनाथ महाराज की भक्ति में किशोर रजक की यह अनोखी साधना और 26 वर्षों से चली आ रही भिक्षा भंडारे की परंपरा दशहरे के पर्व पर सेवा, श्रद्धा और समर्पण की मिसाल बन गई है। नौ दिनों के मौन व्रत से शुरू होने वाली यह यात्रा दशहरे के दिन भंडारे, पालकी, नर्मदा पूजन और विसर्जन के साथ पूरी होती है। रजक परिवार का कहना है कि यह परंपरा आगे भी इसी श्रद्धा और विश्वास के साथ जारी रहेगी।

