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बाल देखरेख संस्था के बालक ने जीजिविषा से बदली किस्मत, शिक्षा बनी नई राह

मंडला, 18 अप्रैल 2026

शासन की योजनाएं कई बार ऐसे बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाती हैं, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में पल-बढ़ रहे होते हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बाल गृह योजना इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।

जिले के सुदूर वनांचल और शहरी स्लम क्षेत्रों से आने वाले देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को मंडला के 50 सीटर बाल गृह में न केवल आश्रय, बल्कि शिक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा दी जा रही है।

हाल ही में ’’मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल’’ द्वारा 15 अप्रैल को घोषित हाई स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा परिणाम में जहां टॉपर छात्रों की चर्चा रही, वहीं बाल गृह मंडला में रहने वाले एक बालक ने भी अपनी मेहनत और संघर्ष से अलग पहचान बनाई। इस बालक ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए हाई स्कूल परीक्षा में तीन विषयों में डिस्टिंक्शन के साथ ’’77.4 प्रतिशत अंक’’ प्राप्त किए।

बालक का जीवन संघर्षों से भरा रहा। पिता के नशे की लत और माता के पुनर्विवाह के कारण उसे मार्च 2017 में बाल गृह में लाया गया। बाल कल्याण समिति द्वारा परिजनों की काउंसलिंग कर मार्च 2025 में उसे बुआ के परिवार में पुनर्वासित किया गया, लेकिन सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के चलते दिसंबर 2025 में उसे पुनः बाल गृह लौटना पड़ा। इसके बावजूद बालक ने हार नहीं मानी और बाल गृह में रहकर नियमित पढ़ाई जारी रखी। इसी का परिणाम है कि उसने 2026 की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी जीजिविषा का परिचय दिया।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र गुप्ता सहित समिति के सदस्य, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी एवं बाल गृह के कर्मचारी बच्चों के सर्वोत्तम हित में निरंतर कार्य कर रहे हैं, जिससे ऐसे बच्चों को घर जैसा वातावरण और बेहतर भविष्य मिल सके।

 

18 वर्ष के बाद आफ्टर केयर योजना से जुड़ेगा बालक

 

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र गुप्ता के अनुसार, जनवरी 2027 में 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद बालक को नियमानुसार बाल गृह में नहीं रखा जा सकेगा। ऐसे में उसे शासन की ’’आफ्टर केयर योजना’’ से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि उसकी आगे की पढ़ाई, आवास और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। यह कहानी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, शिक्षा और अवसर मिलने पर कोई भी बच्चा अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है।

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