**फर्जी पत्रकारों की पहचान, पत्रकार संगठनों के नाम के दुरुपयोग और सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरों के प्रसारण पर रोक लगाने की उठाई मांग**
**मंडला।** जिले में फर्जी पत्रकारिता और पत्रकार संगठनों के नाम एवं पहचान के कथित दुरुपयोग का मामला अब गंभीर होता नजर आ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर 1 नवंबर 2026 को मंडला के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में जिले के प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों की सामूहिक बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद जिला जनसंपर्क अधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।
बैठक में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पत्रकारिता को लेकर की गई टिप्पणी तथा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के वक्तव्य पर भी चर्चा हुई। पत्रकारों ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन पेशेवर पत्रकारिता की अपनी जिम्मेदारियां, मर्यादाएं और विश्वसनीयता के मानक हैं।
ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें फर्जी पत्रकारों की पहचान एवं जांच, पत्रकार संगठनों के नाम और पहचान के दुरुपयोग पर रोक, मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठनों के नाम पर संचालित वाहनों की जांच, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर की भूमिका एवं जवाबदेही स्पष्ट करना, एकपक्षीय एवं अपुष्ट खबरों पर रोक तथा वास्तविक पत्रकारों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा शामिल है।
पत्रकारों ने मांग की कि जनसंपर्क विभाग में पंजीकृत पत्रकारों की सूची जिले के सभी विभाग प्रमुखों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वास्तविक पत्रकारों को अनावश्यक परेशानियों और संदेह का सामना न करना पड़े।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि उद्देश्य किसी व्यक्ति या मीडिया संस्थान को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना है।
प्रकाशन संबंधी सुझाव: ज्ञापन में बैठक में उपस्थित पत्रकारों की हस्ताक्षरयुक्त सूची संलग्न होने का उल्लेख है। समाचार प्रकाशित करते समय बैठक में शामिल पत्रकारों के नाम भी जोड़े जा सकते हैं।
