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मण्डला में साहूकारों पर नकेल: जिला प्रशासन ने जारी किया आदेश

मंडला, 19 जून 2025

मण्डला जिले में आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) बहुल क्षेत्रों में साहूकारों द्वारा मनमानी ब्याज दरों पर ऋण देकर ग्रामीणों के शोषण के बढ़ते मामलों के बाद, जिला प्रशासन ने जनसुनवाई और जनशिकायत के माध्यम से सामने आ रही इन समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखाते हुए मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति क्षेत्र साहूकारी (विनियमन) विनियम, 1972 (संशोधित 2021) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

अनियमित साहूकारी पर लगेगी रोक

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री सोमेश मिश्रा द्वारा जारी आदेश के अनुसार मण्डला जिले में मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति क्षेत्र साहूकारी (विनियमन) विनियम, 1972 लागू है। इस विनियम की धारा 03 में साहूकारों के पंजीकरण और पंजीकरण प्रमाण-पत्र से संबंधित स्पष्ट प्रावधान हैं। इसके तहत साहूकारी का व्यवसाय करने वाले या करने का इरादा रखने वाले किसी भी व्यक्ति को संबंधित क्षेत्र के पंजीकरण प्राधिकारी के पास अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद प्राधिकारी द्वारा निर्धारित प्रारूप में प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।

उच्च ब्याज दरों पर शोषण की शिकायतें और पुलिस की कार्रवाई

जिले के विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर आदिवासी बहुल और विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) बहुल गांवों में, साहूकारों द्वारा अत्यधिक ब्याज दरों पर साहूकारी का व्यवसाय करने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। पुलिस विभाग भी ऐसे साहूकारों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। इन गतिविधियों से यह स्पष्ट होता है कि साहूकार अनियमित और अनधिकृत रूप से ग्रामीण आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजातियों को ऊँची ब्याज दरों पर ऋण प्रदान कर रहे हैं, जिसके बदले में उनकी बहुमूल्य वस्तुएं या भूमि गिरवी रखी जा रही है। इसका परिणाम यह है कि ग्रामीण परिवार लंबे समय से ऋण के बोझ से पीड़ित हैं, जिससे न केवल उनकी आर्थिक क्षति हो रही है, बल्कि उनका समग्र विकास भी बाधित हो रहा है।

नियमों का उल्लंघन दंडनीय अपराध

जिला प्रशासन ने विनियम के प्रावधानों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विनियम की धारा 07 के अनुसार जहां ऋण प्रतिभूत (सुरक्षित) हो वहाँ अधिकतम 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज और जहाँ ऋण प्रतिभूत न हो वहाँ अधिकतम 12 प्रतिशत साधारण ब्याज की दर निर्धारित की गई है।

 

धारा 19 के अनुसार निरीक्षक के लिखित प्रतिवेदन के आधार पर इन विनियमों/नियमों के उल्लंघन पर न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जाएगा। मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकारी नियम 1980 के नियम 16 के अनुसार विकासखण्ड सहायक, क्षेत्र संगठक, वृत्त संगठक, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, उपखण्डीय अधिकारी आदि को निरीक्षक के रूप में नामित किया गया है।

उल्लंघन पर दंड का प्रावधान

विनियम की उल्लिखित धाराओं के उल्लंघन की स्थिति में यह एक दंडनीय अपराध होगा, जिसके लिए नियमों के अधीन दंड का प्रावधान है। धारा 21 के अनुसार, प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पंजीकरण निलंबित अथवा निरस्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त बिना पंजीकरण साहूकारी व्यवसाय करने पर अधिकतम 2 वर्ष की कारावास अथवा एक लाख रूपए के जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है (संशोधन, 2021)।

जनहित में कड़ाई से लागू होगा आदेश

मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति क्षेत्र साहूकारी (विनियमन) विनियम, 1972 (संशोधित 2021) के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी क्षेत्र में साहूकारी व्यवसाय तभी कर सकता है, जब उसके पास संबंधित क्षेत्र के लिए वैध पंजीकरण प्रमाण-पत्र हो। उल्लंघन की स्थिति में विनियम की कंडिका 24 के अनुसार 2 वर्ष की सजा अथवा एक लाख रूपए जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। यह आदेश मण्डला जिले के संपूर्ण क्षेत्र में लागू होगा और इसे मध्यप्रदेश जनजाति क्षेत्र साहूकारी विनियम, 1972 (संशोधित 2021) के प्रावधानों के अनुपालन तथा जनसामान्य के हित में सख्ती से लागू किए जाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

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