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महुआ के फूल और गुली से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर ’कलेक्टर की पहल से महुआ को मिलेगा बाजार, वन समितियों और स्व-सहायता समूहों के जरिए बढ़ेगी आदिवासी परिवारों की आय’

मंडला, 9 अक्टूबर 2026

मंडला के जंगलों में बिखरा महुआ अब ग्रामीण समृद्धि का नया आधार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन महुआ फूलों और बीजों का संग्रहण ग्रामीण परिवार वर्षों से परंपरागत तरीके से करते आए हैं, उन्हें अब बेहतर मूल्य दिलाने और उनकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने नई पहल की है। कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे की पहल का उद्देश्य महुआ के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे जिले के आदिवासी परिवारों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सके।

’10 हजार से अधिक परिवारों की आय से जुड़ा है महुआ’

 

मंडला जिले में महुआ के 55 हजार से अधिक पेड़ हैं। यह 10 हजार से अधिक परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। महुआ फूल और महुआ बीज की सही तरीके से पहचान, संग्रहण, गुणवत्ता संरक्षण और व्यवस्थित बिक्री के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक संभावनाएं हैं। इसी संभावना को साकार करने के लिए प्रशासन महुआ को केवल वन उपज तक सीमित न रखते हुए इसे आजीविका और स्थानीय आर्थिक विकास से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।

’परंपरागत संग्रहण से गुणवत्ता प्रभावित, अब अपनाएंगे नया तरीका’

 

वर्तमान में ग्रामीण परिवार जमीन पर गिरे महुआ फूलों को एकत्रित करते हैं। इस प्रक्रिया में फूलों के साथ मिट्टी और सिलिका के कण मिल जाने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा खाद्य उपयोग के लिए उनकी उपयुक्तता कम हो सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए महुआ के पेड़ों के नीचे उनके कैनोपी क्षेत्र में नेट लगाने का सुझाव सामने आया है। इससे पेड़ से गिरने वाले फूलों को जमीन के सीधे संपर्क से बचाकर अपेक्षाकृत स्वच्छ स्थिति में एकत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए एक सीजन तक उपयोग की जा सकने वाली कम लागत की नेट उपलब्ध कराने की संभावना पर भी चर्चा की गई है।

’वन समितियों और स्व-सहायता समूहों को मिलेगी महत्वपूर्ण भूमिका’

 

इस पहल में महुआ फूल और महुआ बीज के संग्रहण एवं विपणन की अलग-अलग व्यवस्थाएं प्रस्तावित की गई हैं। महुआ फूलों का संग्रहण वन समितियों के माध्यम से किया जाएगा तथा उद्योगपति समितियों से इनका क्रय करेंगे। वहीं, महुआ की गुली यानी बीजों के संग्रहण की जिम्मेदारी स्व-सहायता समूहों के फेडरेशन को दी जाएगी और कम्पनियाँ उनसे सीधे खरीद करेंगी।

इस व्यवस्था से ग्रामीण उत्पादकों और उद्योगों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने, संग्रहण को व्यवस्थित बनाने और महुआ के व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका मजबूत होगी और ग्रामीणों को बाजार से जोड़ने का रास्ता तैयार होगा।

’प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन से बढ़ेगा महुआ का महत्व’

 

महुआ की संभावनाओं को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन पर भी जोर दिया जा रहा है। मनेरी स्थित अद्वैत साल्वेन्ट प्रा. लि. और ओरिएण्ट एथेनॉल प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने महुआ प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन से जुड़ी संभावनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया। उद्योगों की सहभागिता से महुआ के संग्रहण, गुणवत्ता और उपयोग को बेहतर बनाने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने की पहल की गई है।

कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे की इस पहल का मूल उद्देश्य जिले की पारंपरिक वन संपदा को ग्रामीणों की आर्थिक उन्नति से जोड़ना है। यदि महुआ का संग्रहण गुणवत्तापूर्ण हो, उपार्जन की व्यवस्था सुदृढ़ बने और प्रसंस्करण के माध्यम से बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार हों, तो यह पहल हजारों परिवारों के लिए आय के बेहतर अवसर सृजित कर सकती है।

मंडला के जंगलों में उपलब्ध महुआ की यह प्राकृतिक संपदा अब ग्रामीणों की मेहनत, सामुदायिक सहभागिता और उद्योगों के सहयोग से समृद्धि की नई कहानी लिखने की क्षमता रखती है।

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