सिकलसेल एनीमिया की जिले में होगी शतप्रतिशत स्क्रीनिंग
मण्डला 23 जुलाई 2023
जिले को सिकलसेल एनीमिया से मुक्त करने के लिए योजनाबद्ध कार्य प्रारंभ किया गया है जिसके तहत जिले के 0 से 40 वर्ष के 9 लाख 42 हजार 404 लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। चरणबद्ध रूप से शतप्रतिशत लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस संबंध में कलेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया मुक्ति मिशन के तहत वर्ष 2047 तक लाल रुधिर कोशिका रक्तहीनता रोग के आनुवंशिक प्रसार को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के तहत वृहद स्तर पर स्क्रीनिंग करते हुए सिकलसेल एनीमिया रोगियों की पहचान, उनकी काउंसलिंग, बेहतर उपचार तथा सशक्त फॉलोअप के माध्यम से रक्तहीनता को खत्म किया जाएगा। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया मुक्ति मिशन का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 1 जुलाई 2023 को शहडोल से किया था।

अगली पीढ़ी तक फैलने से रोकने का लक्ष्य
कलेक्टर ने बताया कि सिकलसेल एक अनुवांशिक रोग है, जिसे अगली पीढ़ी तक फैलने से रोकना मिशन का अंतिम लक्ष्य है। लाल रक्त कोशिका रोग एक ऐसी बीमारी है, जो समाज के जनजातीय समुदायों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। इस दृष्टि से जिले में 0 से 40 वर्ष के 9 लाख 42 हजार 404 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। स्क्रीनिंग में गर्भवती महिलाओं, 0 से 5 वर्ष तक के बच्चे, नवजात एवं एनीमिक व्यक्तियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्हांेने बताया कि स्क्रीनिंग के लिए सोलूबिलिटी टेस्ट एवं पुष्टि के लिए एचपीएलसी टेस्ट होता है।

स्क्रीनिंग उपरांत दिए जाएंगे जेनेटिक स्टेटस कार्ड
इस महत्वाकांक्षी मिशन में स्वास्थ्य विभाग की एएनएम, सीएचओ, मेडीकल ऑफीसर, बीएमओ, आशा कार्यकर्ता एवं लेब टेक्निशियन सहित अन्य अमले को भी शामिल किया गया है जो टेस्टिंग, काउंसलिंग, उपचार एवं फॉलोअप के लिए जिम्मेदार रहेंगे। स्क्रीनिंग उपरांत चिन्हित व्यक्तियों को सिकल सेल जेनेटिक स्टेटस कार्ड प्रदान किया जाएगा तथा काउंसलिंग के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इस कार्ड से व्यक्ति अपना सिकलसेल स्टेटस भी जान सकेगा।

क्रियान्वयन के लिए प्रभावी रणनीति
कलेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर प्रभावी रणनीति तैयार की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों को जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्क्रीनिंग, काउंसलिंग, उपचार, फॉलोअप, मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग के संबंध में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

कक्षा 3 पढ़ाने वाले शिक्षकों का प्रशिक्षण संपन्न
मंडला 23 जुलाई 2023
निपुण भारत, मिशन अंकुर एफएलएन के अंतर्गत कक्षा 3 पढ़ाने वाले शिक्षकों का विकासखंड स्तरीय 5 दिवसीय प्रशिक्षण का दूसरा चरण 19 जुलाई 2023 से 23 जुलाई 2023 तक आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता के लक्ष्य प्राप्ति के लिए है। कक्षा 3 के शिक्षकों को एफएलएन पर कार्य करने का तरीका सिखाया गया। श्याम बैरागी एवं संजीव पटेल ने हिन्दी, सारिका पटेल एवं महेश नामदेव ने गणित, नरेन्द्र दुबे एवं आराधना कुशवाहा ने अंग्रेजी तथा जतिन पटेल एवं ज्योति हरदहा पर्यावरण विषय पर मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रथम दिवस एफएलएन एवं निपुण भारत एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा की गई। इसके पश्चात प्रतिदिन क्रमश हिंदी, गणित, अंग्रेजी एवं पर्यावरण विषय की अवधारणा, लर्निंग आउटकम, आंकलन, ट्रैकर, दैनिक साप्ताहिक पाठ्योजना को बेहतर तरीके से समझाया गया। प्रशिक्षण के दौरान एपीसी हीरेन्द्र वर्मा, मनीष दुबे, केके उपाध्याय, प्राचार्य डाईट राजेश उपाध्याय, बीआरसी अनादि वर्मा, बीएसी सागर पटेल, प्रेमचंद हरदहा, उदयकांत अवस्थी एवं संतोष झरिया शिक्षकों से चर्चा करते हुए उन्हें समुचित मार्गदर्शन प्रदान किया।

विकास पर्व: आज पौंड़ी महाराजपुर, मोहगांव रैयत एवं मवई में होंगे कार्यक्रम
मंडला 23 जुलाई 2023
16 जुलाई से 14 अगस्त 2023 तक आयोजित होने वाले विकास पर्व के तहत् आज मंडला विधानसभा के पौंड़ीमहाराजपुर, बिछिया विधानसभा के मवई एवं निवास विधानसभा के मोहगांव रैयत में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों द्वारा विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया जाएगा।
मंडला विधानसभा के पौंड़ीमहाराजपुर, बढ़ार, बेहगा, जारगी, केहरपुर, खुर्सीपार, मलारा, मलारीचक, मालीमोहगांव, पेटेगांव एवं सुभरिया पंचायतें सम्मिलित होंगी। इस कार्यक्रम के लिए राजकुमार उरमलिया को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। बिछिया विधानसभा के मवई में आयोजित कार्यक्रम मवई, सरसडोली, अमवार, मडफा, अतरिया, सोडा, धनगांव, पखवार एवं बसनी पंचायतें सम्मिलित होंगी। इस कार्यक्रम के लिए तरण नंदनवार खंड पंचायत अधिकारी एवं संदीप खंडपुरे उपयंत्री को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसी प्रकार निवास विधानसभा के मोहगांव रैयत में आयोजित कार्यक्रम में मोहगांव रैयत, उमरडीह, मोहगांव माल एवं रयगांव पंचायतें सम्मिलित होंगी। इस कार्यक्रम के लिए महेंद्र उईके पंचायत समन्वयक जनपद पंचायत मोहगांव को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।

औसत वर्षा की जानकारी
मण्डला 23 जुलाई 2023
जिले में इस वर्ष 1 जून से 23 जुलाई 2023 के दौरान 561.5 मिमी. औसत वर्षा दर्ज की गई है जबकि इसी अवधि तक गत वर्ष 432.2 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई थी। इस प्रकार गत् वर्ष की तुलना में इस वर्ष 129.3 मिलीमीटर अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 जुलाई को मंडला में 4.6 मि.मी., नैनपुर में 11.6 मि.मी., बिछिया में 1.6 मि.मी., निवास में 23.2 मि.मी. तथा नारायणगंज में 1.5 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई। इस प्रकार जिले में 23 जुलाई 2023 को 7 मिमी. औसत वर्षा दर्ज की गई है।

ई-कोर्ट एप्लीकेशन एवं पोर्टल का प्रशिक्षण प्रत्येक सोमवार को
मंडला 23 जुलाई 2023
जिले के विभागीय अधिकारियों को ई-कोर्ट एप्लीकेशन एवं पोर्टल पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए ई-दक्ष केन्द्र के वरिष्ठ प्रशिक्षण को ई-कोर्ट एप्लीकेशन एवं पोर्टल का प्रशिक्षण प्रदाय कर मास्टर ट्रेनर बनाया गया है।
अर्ध दिवसीय प्रशिक्षण सप्ताह के प्रत्येक सोमवार को ई-दक्ष केन्द्र, बीआरसी भवन में प्रदाय किया जाएगा। कलेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कम्प्यूटर ऑपरेटर के साथ निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम अनुसार ई-दक्ष केन्द्र में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

महान चित्रकार पद्मविभूषण सैयद हैदर रज़ा की 7वीं पुण्यतिथि पर दी गई पुष्पांजलि
रज़ा स्मृति की सांस्कृतिक संध्या पर अन्वेषा महंता के सतरिया नृत्य ने बांधा समां
मंडला – रविवार को विश्वविख्यात चित्रकार मरहूम सैयद हैदर रज़ा की 7वीं पुण्यतिथि पर उनके चाहने वालों ने पुष्पांजलि अर्पित की। रज़ा समृति में आयोजित चित्रकला कार्यशाला के कलाकार व समवाय में शामिल होने आए देश के विभिन्न कोनों से आए साहित्यकारों ने स्थानीय कब्रिस्तान में सैयद हैदर रज़ा और उनके पिता सैयद मोहम्मद रजी की कब्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उल्लेखनीय है कि सैयद हैदर रज़ा का लगभग 95 वर्ष की आयु में 23 जुलाई 2016 को दिल्ली में निधन हुआ था। उनकी इच्छा के मुताबिक उनके पार्थिव शरीर को मंडला लाकर उनके वालिद की कब्र के बगल में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द ए खाक किया गया था। तब से ही रज़ा फाउंडेशन द्वारा उनके जन्म दिवस पर रज़ा उत्सव और पुण्यतिथि पर रजा स्मृति का आयोजन करती है। इसमें स्थानीय कलकारों के अलावा देश के अलग – अलग क्षेत्रों से आए कलाकार अपनी कला के माध्यम से इस महान चित्रकार को याद करते है। रज़ा साहब की 7वीं पुण्यतिथि पर निवास विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले भी कब्रिस्तान पहुंचे और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

मंडला जिले के पूर्व कलेक्टर डॉ. जगदीश जटिया ने कहा कि रज़ा साहब मंडला के लिए गर्व का विषय है, यही उनका बाल काल गुजरा है। गर्व की बात है कि देश के तीन प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार है, तीनों उनके पास है। ऐसा आदमी जिसने यह तय किया कि यदि मेरी मृत्यु हिंदुस्तान में होती है तो मंडला में दफनाया जाए। वो इसकी माटी से प्रेम करते थे। इतना प्रेम था कि जब वो मंडला पहुंचते थे तो गाड़ी से उतरकर सबसे पहले मंडला जिले की मिट्टी को माथे से लगाते थे। इतना उनका प्यार मोहब्बत थी मंडला के लिए। लोगों ने लोगों ने भी उन्हें सहेंजा है। मेरी रज़ा साहब को श्रद्धांजलि है। रजा फाउंडेशन के कार्यों के जरिए यहां के लोगों प्लेटफार्म मिलेगा, अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिलेगा। यहाँ आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं से स्थानीय कलाकारों को काफी कुछ सीखने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

देश के जाने माने पत्रकार ओम थानवी ने कहा कि रज़ा साहब को देश के ही नहीं बल्कि दुनिया के महान कलाकारों में एक थे। इस तरह के कलाकार थे जिन्होंने केवल चित्र ही नहीं बनाए बल्कि साहित्य और दूसरी कला में भी उनकी बहुत गहरी रुचि थी। जब उनके 100 पूरे हुए तो हम कोरोना से जूझ रहे थे। फिर उसके बाद रज़ा फाउंडेशन ने 100 साल का सिलसिला शुरू किया देश में भी और विदेश में भी। पेरिस में भी जो कार्यक्रम हुआ उसमें भी मैं गया था और मंडला में यह रज़ा स्मृति का जो कार्यक्रम हुआ इसमें इतने कलाकार, साहित्यकार, नृत्यकार, विभिन्न कलाओं में जो रज़ा साहब दिलचस्पी थी उसको पूरा का पूरा रुपाइत करते हुए जो पूरा समूह जमा हुआ है यह मेरे ख्याल में सही किस्म की अकीदत और सही किस्म का सम्मान उनकी समृति में प्रकट करने के लिए आए है। हम लोग जो यहां शरीक हुए उनके लिए बड़ा दिन है। हम सब मिलकर रज़ा साहब को याद करने के लिए एकत्र हुए है।

रज़ा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी अशोक वाजपेयी ने बताया कि आज ही के दिन रज़ा साहब का निधन हुआ था। आज उनकी सातवीं बरसी है। यहां बड़े आयोजन समवाय में 50 से अधिक हिंदी कवि और आलोचक एकत्र हुए, कविता पाठ्य हुआ, कविता पर चर्चा हुई। रज़ा साहब की हिंदी कविता में गहरी रुचि थी, उसके चलते हमने यह आयोजन किया। अगर वह जीवित होते हैं तो उन्हें बहुत प्रसन्नता होती। रज़ा साहब उन बिरले कलाकारों में थे जिनको अपनी कला के अलावा दूसरी कला में भी गहरी दिलचस्पी थी। वो उन लोगों में से थे जिनको इसमें बहुत रुचि थी कि युवा लोग क्या कर रहे हैं और कैसे कुछ ऐसा किया जाए कि युवा लोग रचनात्मक कार्य में लगन के साथ थोड़े बहुत साधनों के साथ काम कर सकें। रज़ा फाउंडेशन उनके इसी मंतव्य को यथाशक्ति, यथासंभव आगे बढ़ाता रहा है। यहां मंडला में भी जहां उनका बचपन बीता और जहां अंतिम भूमि है, पिछले 7 वर्षों में हमने नागरिकों के बीच रजा की उपस्थिति को सिद्ध करने की कोशिश की हैं।

अन्वेषा महंता के सतरिया नृत्य ने बांधा समां
रज़ा स्मृति की सांस्कृतिक संध्या पर मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
मंडला – शनिवार की शाम रज़ा स्मृति की सांस्कृतिक संध्या में असम की नृत्यांगना अन्वेषा महंता द्वारा प्रस्तुत किया गया सतरिया नृत्य खूब पसंद किया गया। अन्वेषा महंत ने रज़ा साहब की पेंटिंग्स पर अपनी प्रस्तुति केंद्रित रखी। शून्य को प्रदर्शित करता उनका नृत्य ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अन्वेषा महंत की प्रस्तुति को कितना पसंद किया गया इसका अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनकी प्रस्तुति ख़त्म होने पर झंकार भवन में मौजूद कला प्रेमियों ने करीब एक मिनिट से अधिक समय तक अपने स्थान पर खड़े होकर तालियों से उनकी कला का सम्मान किया। दर्शकों के इस रिस्पांस से अन्वेषा भी अभिभूत नज़र आई।

अन्वेषा महंता ने सतरिया नृत्य की अपनी प्रस्तुति के बारे में बताया कि नृत्य कथा बिंदु को केन्द्रित करने वाले एस एच रज़ा के चित्रों में निहित कलात्मक दृष्टि और विचारों के दार्शनिक तनाव से प्रेरित था। विभिन्न क्षेत्रीय सन्दर्भों और भारतीय ग्रंथों से प्रवाहित दार्शनिक धाराओं का संगम, रज़ा की पेंटिंग्स मेरे लिए जीवन का गहरा आंतरिक अहसास थीं। बिंदू के विचार से गहराई से प्रेरित होकर, जो ‘जीवन के वृक्ष’ की बड़ी ब्रह्मांडीय ऊर्जा में बीज (बीज) के बहुध्रुवीय आयामों को समाहित करता है, उनके दर्शन की समझ मुझे ब्रह्मांड के सूक्ष्म जगत और स्थूल जगत के संतुलन के दायरे में ले गई जहां बीज के रूप में शरीर-शरीर अंकुरित होता है और अनंत की ओर पहुंचता है। एक ओर, यह शून्य से शुरू होता है और फिर निराकार की ब्रह्मांडीय ऊर्जा में विलीन हो जाता है। सतरिया नृत्य परंपरा के एक शिष्य के रूप में, जिसे असम, सत्तरा के वैष्णव संस्थानों में एक जीवित परंपरा के रूप में मनाया जाता है, इस रूप के बारे में मेरी अंतर्निहित समझ निराकार के विचार को अपनाती है जो सत्त्रिया दर्शन के वैचारिक ढांचे में से एक है। इसलिए शून्य को ‘निराकार’ और ‘आकार’ के सत्त्रिया दर्शन के सन्निहित संज्ञान के इस संगम के साथ देखा गया, जैसा कि इसके संस्थापक श्रीमंत शंकरदेव और उनके प्रमुख प्रेरित श्री श्री माधवदेव के ग्रंथों के साथ-साथ एस.एच. रज़ा के कला दर्शन में पाया जाता है।

शून्य आदिम उत्पत्ति की एक अवस्था है जहाँ से जीवन शुरू होता है। शून्य अपने सीमित और अनंत रूप में अपना महत्व रखता है, इसका एक आकार है और फिर भी इसमें शून्यता है। शून्य की इस अवधारणा पर केंद्रित कोरियोग्राफी निराकार और आकार तथा आकार और निराकार के मिश्रण को दर्शाती है – इस प्रकार जीवन के अस्तित्वगत सत्य का जश्न मनाती है। यह टुकड़ा श्रीमंत शंकरदेव द्वारा शून्य में पृथ्वी के राज्य से शुरू होने वाली अनादि पतन की दार्शनिक रचनाओं से प्रेरित है। शून्यता की स्थिति से, सृष्टि शुरू होती है जो प्रकृति के हर रूप में शरीर का जश्न मनाती है। ये शरीर पुरुष का हिस्सा हैं और इसलिए ब्रह्म प्रकृति के हर रूप में अपना अस्तित्व पाता है। यहां बिंदु तंत्रिका केंद्र है – जीवन की ब्रह्मांडीय शक्ति जो निराकार ब्रह्म को अस्तित्व में लाती है। और इस प्रकार, प्रकृति की स्थिति देह (शरीर), एक अकार के विचार को सामने लाती है और प्रत्येक अकार में निराकार – ब्रह्म है, जैसा कि संत कवि कहते हैं कि शून्य और अनंत के विचार को विकसित करते हुए कथा मंगलाचरण, संहार, सृष्टि और देहा विचारों को रूप में लाएगी।

