मंडला 15 सितंबर 2025
जिले में सोयाबीन फसल का रकबा वर्तमान में 20 हेक्टेयर है। जिला स्तरीय निरीक्षण दल में कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामेश्वर अहिरवार, मधु अली, अनुविभागीय कृषि अधिकारी मंडला द्वारा जिले के विकासखंडों में सोयाबीन फसल का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। वर्तमान में सोयाबीन फसल पर कीट व्याधि एवं बीमारियों का प्रकोप होने की संभावना रहती है। सोयाबीन का मुख्य रोग येलोमोजेक के लिए सम-सामायिक सलाह जारी की जा रही है। येलो मोजेक अर्थात सोयाबीन का पीला मोजेक रोग एक गंभीर वायरस जनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से सफेद मक्खी द्वारा फैलती है। इस रोग से पत्तियाँ पीली पड़कर रुक और मुड़ जाती हैं जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है। इस कारण फसल की उपज में भारी कमी आती है। इसके नियंत्रण के लिए संक्रमित पौधों को हटाना, खरपतवारों को नष्ट करना, पीले चिपचिपे जाल (येलो स्टिक ट्रैप) लगाना और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर उपयुक्त कीटनाशकों का छिड़काव करना महत्वपूर्ण है। कृषि वैज्ञानिक या कृषि अधिकारी की सलाह पर उपयुक्त कीटनाशकों जैसे बुप्रोफेजिन, थियोमेथोजाम या डायफेंटरोन का छिड़काव करें।
