Reva India News
ब्रेकिंग न्यूज़मंडला हमारा जिला

श्रीअन्न ने बदली किसान रामनाथ उइके की तकदीर संघर्ष से सफलता तक मिलेट्स ने बनाया रामनाथ को ‘मास्टर ट्रेनर’

मंडला, 7 अप्रैल 2026

मध्यप्रदेश का मंडला जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और कृषि विविधता के लिए जाना जाता है। इसी जिले के विकासखंड मोहगांव के ग्राम बम्होरी के लघु कृषक श्री रामनाथ उइके आज ‘मिलेट उत्पादक’ के रूप में एक नई पहचान बना चुके हैं। कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी से जूझने वाले रामनाथ आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी इस सफलता के पीछे म.प्र. शासन की रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना और कृषि विभाग का सतत तकनीकी मार्गदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कुछ वर्ष पहले तक रामनाथ उइके अपने 4 एकड़ खेत में पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की खेती करते थे। सिंचाई की कमी, रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत और अनिश्चित मानसून के कारण उनकी आय प्रति सीजन मात्र 25 से 30 हजार रुपये तक ही सीमित रह जाती थी। खेती से लागत निकालना भी मुश्किल होता था, जिससे परिवार के भरण-पोषण में कठिनाइयाँ आती थीं और वे लगातार मानसिक तनाव का सामना कर रहे थे।

उनके जीवन में बदलाव तब आया जब कृषि विभाग द्वारा आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यशाला में उन्होंने भाग लिया। यहाँ उन्हें ‘श्रीअन्न’ यानी मिलेट्स के पोषण, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्होंने उन्नत बीजों का चयन, बीज उपचार, मृदा परीक्षण और एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया। साथ ही जैविक खाद के उपयोग से उन्होंने खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई।

नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कृषक श्री रामनाथ ने अपने खेत के 2.5 एकड़ क्षेत्र में कोदो और कुटकी की खेती शुरू की। उनकी मेहनत और वैज्ञानिक पद्धति का परिणाम यह रहा कि उन्हें कुटकी से 9 क्विंटल और कोदो से 8 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। पहली ही फसल में उन्हें लगभग 65,000 रुपये की शुद्ध आय हुई, जो उनकी पारंपरिक खेती से होने वाली आय से दोगुना से भी अधिक थी। इस खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन मिला, जिससे कुल खर्च में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई।

आज रामनाथ उइके अपने पूरे 4 एकड़ खेत में मिलेट की खेती कर रहे हैं। वे न केवल सफल किसान बने हैं, बल्कि ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने क्षेत्र के 15 से अधिक किसानों को मिलेट उत्पादन की तकनीक सिखाई है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी अब ‘श्रीअन्न’ की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उनके 5 सदस्यीय परिवार का लालन-पालन अब बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं और बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा भी दिला रहे हैं।

रामनाथ उइके की यह प्रेरक कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि किसान सही मार्गदर्शन, नवीन तकनीकों और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़े, तो वे अपनी आय में वृद्धि कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और बेहतर जीवन स्तर हासिल कर सकते हैं। वास्तव में, ‘ रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना’ केवल एक फसल नहीं, बल्कि किसानों के उज्जवल भविष्य की दिशा है।

Related posts

कॉलेज चलो अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने समझी प्रवेश की प्रक्रिया

Reva India News

नवीन बैगा बालक आश्रम गदिया का निरीक्षण किया गया

Reva India News

नर्मदा जंयती’ के उपलक्ष्य में जिला स्तर पर शासकीय योजनाओं के विशेष क्रियान्वन के संबंध में निर्देश

Reva India News

Leave a Comment