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रामनगर की मिट्टी में इतिहास की महक है – राज्यपाल श्री रमेन डेका मोतीमहल का एक-एक पत्थर हमारे गौरवशाली इतिहास और पराक्रम की कहानी कहता है – सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते आदि उत्सव के दूसरे दिन भी गूंजी जनजातीय गौरव और विरासत की गाथा

मंडला, 16 मई 2026

जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित भव्य आदि उत्सव में जनजातीय संस्कृति, इतिहास, परंपरा और गौरवशाली विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरा आयोजन गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित रहा। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि रामनगर की मिट्टी में इतिहास की महक है। यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय अस्मिता का प्रतीक है। आज मुझे इस पावन धरा में शामिल होने का अवसर मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

उन्होंने कहा कि मंडला एवं आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में जनजातीय भाई-बहन इस वृहद आयोजन में सम्मिलित होते हैं, जो इस उत्सव की लोकप्रियता और सामाजिक महत्व को दर्शाता है। आदि उत्सव ने अपनी विशिष्ट पहचान और ख्याति स्थापित की है तथा यह आयोजन जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि गोंडवाना साम्राज्य का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण आज भी पूरे देश को प्रेरणा देता है। उन्होंने गोंडवाना नरेश दलपत शाह, अमर शहीद शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह के बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया।

राज्यपाल श्री डेका ने अपने संबोधन में मिलेट्स फेस्टिवल की भी सराहना करते हुए कहा कि मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में यह आयोजन नई पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से अपने जीवन में मोटे अनाज का उपयोग करता आया है। यह उनकी पारंपरिक जीवन शैली और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक रहा है। आज पूरा विश्व मिलेट्स के महत्व को समझ रहा है और इसे स्वास्थ्यवर्धक आहार के रूप में अपना रहा है।

 

इस अवसर पर केबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, गुजरात के मंत्री श्री नरेश भाई पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय कुशराम, लखनादौन पूर्व विधायक श्रीमती शशि ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष श्री विनोद कछवाहा, वरिष्ठ समाजसेवी श्री प्रफुल्ल मिश्रा, जिला पंचायत सदस्य श्री शैलेष मिश्रा, श्री रुद्रेश परस्ते, कलेक्टर श्री राहुल नामदेव धोटे, पुलिस अधीक्षक श्री राजेश रघुवंशी, जिला पंचायत सीईओ श्री शाश्वत सिंह मीना, एसडीएम श्रीमती सोनाली देव, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती वंदना गुप्ता सहित अन्य अधिकारीगण, श्री वेदप्रकाश कुलस्ते, चौगान सरपंच श्रीमती विमला उइके, श्री श्रवन परते सहित अन्य विशिष्ट जनप्रतिनिधि, प्रदेश सहित विभिन्न जिलों से आए जनजातीय समाज के लोगों, पत्रकारगण, कलाकारों, इतिहासकारों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने आदि उत्सव की शुरुआत की पृष्ठभूमि से लेकर अब तक की उसकी ऐतिहासिक यात्रा का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के गौरव, इतिहास और पहचान को संरक्षित करने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि वर्षों पूर्व जिस उद्देश्य के साथ आदि उत्सव की शुरुआत हुई थी, आज वह एक विराट स्वरूप ले चुका है। देश और प्रदेश के विभिन्न राज परिवारों के सदस्य भी इस आयोजन में शामिल होते हैं, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि आदि उत्सव में शामिल होने वाली जनजातीय प्रतिभाओं और कलाकारों का सम्मान किया जाता है। पूर्व में अनेक प्रतिभाओं को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री स्तर पर भी सम्मान प्राप्त हो चुका है। सांसद श्री कुलस्ते ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी इस आयोजन में शामिल होकर जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं को सम्मान दे चुके हैं।

सांसद श्री कुलस्ते ने कहा कि इस उत्सव का प्रमुख उद्देश्य गोंड वंश की प्राचीन परंपरा, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ भावी पीढ़ी तक पहुँचाना है। वीरांगना रानी दुर्गावती, गोंडवाना नरेश दलपत शाह तथा अमर शहीद शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह के जीवन, संघर्ष और इतिहास को जीवंत करने का यह सतत प्रयास है। उन्होंने कहा कि रामनगर स्थित मोतीमहल का एक-एक पत्थर गोंडवाना साम्राज्य के पराक्रम, शौर्य और वैभव की कहानी कहता है। यह ऐतिहासिक धरोहर केवल भवन नहीं, बल्कि जनजातीय गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

कार्यक्रम के शुरूआत में अतिथियों द्वारा मोतीमहल परिसर में स्थित शिलालेख पर जनजातीय संस्कृति की परंपरा अनुसार पूजन किया गया। इसके पश्चात मुख्य कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान का सामूहिक गायन भी किया गया। सांसद श्री कुलस्ते द्वारा राज्यपाल श्री डेका एवं अन्य अतिथियों को पगड़ी एवं बीरन माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान जनजातीय लोकनृत्य, पारंपरिक संगीत, लोकगाथाओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाओं, जनजातीय वेशभूषा, चित्रकला और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में जनजातीय समाज की जीवन शैली, संस्कृति और प्राचीन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। अतिथियों द्वारा कक्षा बारहवी में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा मीना तिलगाम को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में आयोजित संगोष्ठी में शिक्षाविदों, इतिहासकारों ने कहा कि जनजातीय संस्कृति केवल लोकजीवन का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों की जीवंत धरोहर है। इसे संरक्षित और संवर्धित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और पूर्वजों के गौरवशाली संघर्ष से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया। पूरे आयोजन में गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक विरासत और जनजातीय अस्मिता की विशेष झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का संचालन श्री अखिलेश उपाध्याय और श्री दिलीप मरावी ने किया।

 

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