मंडला, 25 अगस्त 2026
वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला मलेरिया अधिकारी राम शंकर साहू ने जिलेवासियों के लिए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। विभाग द्वारा जन-जागरूकता फैलाने के साथ-साथ मलेरिया प्रभावित हाईरिस्क ग्रामों में कीटनाशक छिड़काव का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
मलेरिया एक परजीवी के कारण होता है। भारत में मुख्य रूप से प्लाज्मोडियम वाइवेक्स और प्लाज्मोडियम फ़ैल्सीपेरम पाए जाते हैं। इनमें से प्लाज्मोडियम फ़ैल्सीपेरम को मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है, जो सर्वाधिक खतरनाक होता है। मलेरिया गंदे पानी, हवा या किसी भी अन्य मच्छर के काटने से नहीं, बल्कि केवल संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है जो साफ पानी में पनपता है।
कपकपी के साथ तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी होना, बेचैनी, कमजोरी, सुस्ती, रुक-रुक कर बुखार आना, पसीना आकर बुखार उतरना तथा ठंड या गर्मी का अहसास होना शामिल हैं।
मलेरिया फैलाने वाले मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। छत पर खुली टंकियों, खाली बर्तन, मटके, गमले, टायर, कूलर, फ्रिज की ट्रे और गार्डन में रखे बर्तनों में एक सप्ताह से अधिक समय तक साफ पानी भरा रहने पर मच्छर अंडे देते हैं, जिनसे 7 से 10 दिन में वयस्क मच्छर बनते हैं।
भरे हुए पानी को हर 3-4 दिन में अवश्य बदलें। पानी संग्रह करने वाली टंकी, बाल्टी और बर्तनों को ढंक्कर रखें। वॉशबेसिन तथा बाथरूम में पानी निकासी के स्थान पर मच्छररोधी जाली लगवाएं।
कीटनाशक छिड़काव अभियान और निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं
जिले में मलेरिया नियंत्रण हेतु प्रभावित हाईरिस्क क्षेत्रों में प्रथम चक्र का कीटनाशक छिड़काव किया जा रहा है। विकासखंड नैनपुर के ग्राम तूमेगाँव व डुँगरिया में 24 व 25 अगस्त को छिड़काव किया गया, वहीं 27 अगस्त 2026 को विकासखंड मवई/मोहगांव के ग्राम मलपहरी में कीटनाशक छिड़काव किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनवरी 2026 से अब तक जिले में कुल 69,237 मरीजों की जांच की गई, जिनमें 03 माइग्रेटरी रोगियों सहित कुल 29 मलेरिया पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी ने अपील की है कि कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचकर खून की जांच कराएं। मलेरिया की जांच और उपचार सभी शासकीय अस्पतालों, एएनएम, एमपीडब्ल्यू, सीएचओ और आशा कार्यकर्ताओं के पास पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है। मलेरिया पॉजिटिव पाए जाने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या चिकित्सक की सलाह अनुसार पूर्ण उपचार लें और खाली पेट दवा का सेवन कदापि न करें।
