मंडला, 15 सितम्बर 2026
वर्तमान खरीफ मौसम में धान की फसल में भूरा माहू एवं बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट रोग का प्रकोप देखा जा रहा है। किसान फसल की नियमित निगरानी कर रोग के लक्षण दिखाई देने पर समय पर नियंत्रण उपाय अपनाएं। भूरा माहू पौधे के तने के निचले भाग में समूह बनाकर रस चूसता है। इसके प्रकोप से पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और अधिक प्रकोप की स्थिति में पौधे सूखकर भूरे रंग के हो जाते हैं, जिसे हॉपर बर्न कहा जाता है। वहीं बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट में पत्तियों के किनारों या सिरों से पानी जैसे धब्बे दिखाई देते हैं, जो बाद में पीले, भूरे या पुआल रंग के होकर पूरी पत्ती को सुखा सकते हैं।
कृषि विभाग के अनुसार भूरा माहू के नियंत्रण के लिए डिनोटेफ्यूरान 20 प्रतिशत एसजी 150-200 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा पाईमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी 120 ग्राम प्रति एकड़ की दर से लेबल निर्देशानुसार छिड़काव किया जा सकता है। बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 3 ग्राम प्रति लीटर पानी तथा स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 0.15 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से मिश्रण बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। 15 लीटर के पंप में 4.5 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड एवं 2.25 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का मिश्रण उपयोग किया जा सकता है।
किसानों की सहायता के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष गठित किया गया है। समस्या होने पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर.पी. अहिरवार (मोबाइल 9131728448) एवं प्रोग्राम असिस्टेंट डॉ. के.के. राणा (मोबाइल 9300383906) से संपर्क किया जा सकता है। किसान अपने विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से भी संपर्क कर समस्या का निराकरण करा सकते हैं।
