मंडला, 6 नवम्बर 2026
जिले में संचालित बाल देखरेख संस्थाओं की व्यवस्थाओं के पर्यवेक्षण एवं मूल्यांकन के लिए जिला स्तरीय निरीक्षण समिति का पुनर्गठन किया गया है। पुनर्गठित समिति द्वारा आदर्श बाल गृह का निरीक्षण कर बच्चों के संरक्षण, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा एवं कौशल विकास से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 54 एवं किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 के नियम 41 के प्रावधानों के अंतर्गत गठित समिति में नागरिक समाज की प्रतिनिधि के रूप में श्रीमती तनु चौरसिया, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के रूप में श्रीमती भारती दीक्षित तथा जिला दंडाधिकारी द्वारा नामित प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में श्रीमती कंचना कसार को शामिल किया गया है।
समिति द्वारा प्रत्येक तीन माह में जिले की पंजीकृत बाल देखरेख संस्थाओं का निरीक्षण कर निर्धारित मापदंडों के अनुसार संस्थागत व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया जाता है। साथ ही बच्चों से संवाद कर उनके संरक्षण, कल्याण, पुनर्वास एवं सर्वांगीण विकास की स्थिति का आकलन करते हुए आवश्यक अनुशंसाएं की जाती हैं।

पुनर्गठित समिति ने आदर्श बाल गृह का निर्धारित प्रारूप में निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आवासीय व्यवस्था, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया गया। बच्चों से संवाद कर उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, रुचियों एवं कौशल विकास से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की गई।
निरीक्षण दल में महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक संचालक श्री रोहित बड़कुल, संरक्षण अधिकारी श्री रितेश बघेल, सामाजिक कार्यकर्ता श्री सौरभ पटवा, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र गुप्ता, सदस्य श्री रंजीत कछवाहा, सुश्री शशि पटेल एवं श्री संतोष कुमार यादव तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रतिनिधि चिकित्साधिकारी डॉ. पी.एल. कोरी उपस्थित रहे। निरीक्षण के अवसर पर बाल गृह में निवासरत बच्चों द्वारा दीपोत्सव के लिए तैयार किए गए हस्तनिर्मित दीपक, हस्तशिल्प एवं सजावटी सामग्री का स्टॉल लगाया गया।

