मंडला, 21 सितम्बर 2026
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों को चिया फसल की खेती के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई है। चिया एक वर्षीय तिलहनी फसल है, जिसकी खेती मध्यप्रदेश के मंदसौर एवं नीमच सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रारंभ हो चुकी है। चिया का पौधा लगभग 70 से 100 सेंटीमीटर तक ऊँचा होता है तथा इसके बीज काले एवं सफेद रंग के होते हैं। चिया बीज में 30 से 35 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है तथा यह ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का अच्छा स्त्रोत माना जाता है।
बुआई का उपयुक्त समय और तरीका
चिया प्रकाश संवेदनशील फसल है। इसकी बेहतर वृद्धि एवं उत्पादन के लिए खरीफ में जून-जुलाई के पश्चात तथा रबी में अक्टूबर-नवंबर में बुआई करना उपयुक्त बताया गया है। खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा एवं समतल करने के बाद बुआई करनी चाहिए। लाइन से बुआई करना अधिक उपयुक्त रहता है। एक एकड़ के लिए लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। बुआई की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर तथा बीज की गहराई 1.5 सेंटीमीटर से अधिक नहीं रखनी चाहिए।

हल्की एवं जल निकास वाली भूमि उपयुक्त
चिया की खेती विभिन्न प्रकार की उपजाऊ एवं कम उर्वर भूमि में की जा सकती है, लेकिन जल निकास वाली हल्की, भुरभुरी एवं रेतीली मिट्टी इसके लिए अधिक उपयुक्त मानी गई है। खेत की तैयारी के लिए जुताई के बाद पाटा लगाकर भूमि को समतल एवं बारीक करना चाहिए। मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद एवं उर्वरक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
90 से 120 दिन में तैयार होती है फसल
चिया फसल को तैयार होने में लगभग 90 से 120 दिन लगते हैं। पौधों में लगभग 40 से 50 दिन के भीतर फूल आना प्रारंभ हो जाता है और पुष्पन के 25 से 30 दिन बाद बीज पककर तैयार हो जाते हैं। फसल पकने पर पौधे एवं बालियां पीली पड़ने लगती हैं। इसके बाद कटाई कर थ्रेसर मशीन से बीज निकाले जा सकते हैं।
प्रति एकड़ 4 से 6 क्विंटल तक उत्पादन
मौसम एवं फसल प्रबंधन के आधार पर चिया से प्रति एकड़ लगभग 4 से 6 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो सकती है। गुणवत्ता के आधार पर चिया का विक्रय मूल्य सामान्यतः 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है, जबकि नीमच जैसी प्रमुख मंडियों में गुणवत्ता के अनुसार 15,000 से 19,000 रुपये प्रति क्विंटल तक के थोक भाव दर्ज किए जाते हैं।
किसानों से वैज्ञानिक तरीके से खेती अपनाने की अपील
कृषि विभाग द्वारा किसानों को चिया की खेती में उचित बीज दर, समय पर बुआई, खरपतवार नियंत्रण, आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं फसल सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। चिया फसल में सामान्यतः दो से तीन सिंचाई की आवश्यकता होती है तथा लगभग 30 दिन के अंतराल पर दो से तीन बार निदाई-गुड़ाई करने की जानकारी दी गई है।
