मण्डला 19 फरवरी 2021
उपसंचालक कृषि ने बताया कि देर से बवाई वाली किस्मों में अवस्था अनुसार अंतिम सिंचाई करें। बालियां निकलते समय फुआरा विधि से सिंचाई न करें अन्यथा फूल गिर जाते हैं, दानों का मुहें काला पड़ जाता है। करनाल बंट तथा कंडुवा व्याधि के प्रकोप का डर रहता है। यदि फसल में सुनहरापन आ रहा हो तो सिंचाई बंद कर दें। इससे दाने की चमक कम हो सकती है या दाने पोटिया या धब्बे वाले हो सकते है। गेहूँ फसल के उपरी भाग (तना व पत्तों) पर गेहूँ की इल्ली तथा माह का प्रकोप होने इमिडाक्लोप्रिड 250 मिली ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। गेहूँ में हेडलाइट रोग आने पर प्रोपिकनाजोल एक मिली लीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। एक हेक्टेयर हेतु 250 मिली लीटर दवा तथा 240 लीटर पानी का उपयोग करें। गेहूँ में आरमी वर्म के नियंत्रण हेतु ट्राईक्लोरोफॉन 55 प्रतिशत का 300 मिली लीटर या डाईक्लोरोवॉस 76 प्रतिशत ई.सी. की 150 मिली लीटर दवा का 300 लीटर पानी में घोल बनाकर एकड़ की दर से छिड़काव करें। उच्च गुणवत्ता हेतु बीज की फसल में अंतिम बार रोगिंग करें। अपने खेतों पर लगे ट्रांसफार्मर के आसपास 10 गुणा 10 फिट तक सफाई व्यवस्था कर दें ताकि किसी भी प्रकार से बिजली का फाल्ट होने पर आपकी पकी हुई फसल को नुकसान नहीं हो।
