मंडला, 13 जून 2026
मेहनत, नवाचार और परम्परागत कृषि ज्ञान के बल पर मंडला जिले की प्रगतिशील कृषक श्रीमती लहरी बाई आज देश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुकी हैं। मिलेट क्वीन के नाम से प्रसिद्ध श्रीमती लहरी बाई ने श्री अन्न (मिलेट) के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देकर जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गई हैं।
श्रीमती लहरी बाई ने वर्षों पहले कोदो, कुटकी, रागी और अन्य मोटे अनाजों की पारंपरिक किस्मों को संरक्षित करने का संकल्प लिया। उन्होंने अपने खेतों में विभिन्न देशी बीजों का संग्रह एवं संरक्षण कर न केवल जैव विविधता को बचाया, बल्कि किसानों को भी श्री अन्न की खेती के प्रति जागरूक किया। उनके प्रयासों से अनेक किसान कम लागत और बेहतर पोषण वाले मिलेट उत्पादन की ओर आकर्षित हुए।

हाल ही में इंदौर में आयोजित ’’ब्रिक्स एग्रीकल्चर समिट 2026’’ में लहरी बाई द्वारा लगाए गए मंडला मिलेट स्टॉल ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने विभिन्न मिलेट उत्पादों का प्रदर्शन करते हुए उनके पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक महत्व की जानकारी साझा की। लगभग 21 देशों के प्रतिनिधियों ने उनके कार्यों की सराहना की और मंडला में मिलेट संवर्धन के प्रयासों को अनुकरणीय बताया।
श्रीमती लहरी बाई का मानना है कि श्री अन्न केवल एक फसल नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि और लोगों के बेहतर स्वास्थ्य का आधार है। उनके मार्गदर्शन में कई महिला स्व-सहायता समूह और किसान मिलेट आधारित उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं।
आज लहरी बाई की सफलता यह साबित करती है कि यदि परंपरागत ज्ञान को आधुनिक सोच और दृढ़ संकल्प के साथ जोड़ा जाए तो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। उनकी उपलब्धियाँ मंडला जिले के किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं तथा श्री अन्न को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
