*26 मई (बुधवार) बुध्द्पूर्णिमॉ (बैशाखी पूर्णिमा) के अवसर पर गायत्री तीर्थ शॉतिकुंज हरिद्वार के तत्ववाधान मे वैश्विक संकट, कोरोना से मुक्ति, वातावरण परिशोधन एवं सभी के स्वस्थ जीवन की मंगलमयी कामना हेतू विश्वस्तरीय घर घर गायत्री यज्ञ मे रिटायर्ड शिक्षक 84 वर्षीय वृद्ध झनक लाल हरदहा अपने बेटे कृष्ण कुमार हरदहा, बहू अर्चना हरदहा,पोती इतिशा एवं तनिशा हरदहा के साथ वर्तमान वैश्विक महामारी के निवाणर्थ वातावरण परिशोधन हेतु,,महामारी के दौरान असमय गये मृत आत्माओ की शान्ति हेतु,घर परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामनाएँ हेतु शंख बजाकर घर में उपलब्ध हवन वेदी में आम की लकड़ी गोबर कंडे से अग्नि प्रज्ज्वलित कर घी, गुड़,गिलोय(गुरबेल),नीम की पत्ती,हवन सामग्री , कपूर के माध्यम से परिवार सहित 24 बार गायत्री महामंत्र , 5 बार महामृत्युंजय मंत्र से,3 बार मां नर्मदा जी,3 बार मां गंगा जी एवं कुलदेवता, कुलदेवी के नाम से यज्ञ भगवान को आहूतियॉ समर्पित की गई।* *_युग रिषि श्री राम शर्मा आचार्य के अनुसार दवाओं में सीमित स्थान एवं सीमित व्यक्तियों को ही बीमारियों से बचाने की शक्ति है, पर यज्ञ की वायु तो सर्वत्र पहुँचती है और प्रयत्न न करने वाले प्राणियों को भी सुरक्षा करती है। मनुष्यों को ही नहीं, पशु पक्षियों एवं वृक्ष वनस्पतियों के आरोग्य की भी यज्ञ से रक्षा होती है।_*
