केवलारी ,किसान ने कर दी जंगल की सफाई
केवलारी तहसील मुख्यालय से लगे ग्राम चारगांव में एक अलग ही मामला प्रकाश में आया हैं जहाँ जंगल के किनारे खेती करने वाले किसान के द्वारा अपनी जमीन विस्तार करने की नीयत से न केवल राजस्व भूमि में लगे महुए और दूसरे पेड़ काट डाले वहीं वन क्षेत्र में भी अतिक्रमण करते हुए वन विभाग के सागौन जैसे कीमती पेड़ों का कत्लेआम कर डाला जिसकी खबर लगभग 15 दिनों तक चली इस साफसफाई के बाद भी न वन विभाग को लगी न ही राजस्व को वहीं अब जब किसान के द्वारा पूरा कार्य कर लिया गया इसके बाद जाँच की बात फारेस्ट के द्वारा कही जा रही है।
आरक्षित वन क्षेत्र 522 का है मामला–
केवलारी मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर वन क्षेत्र के करीबी ग्राम,चारगांव में रहने वाले चमरू पिता आनंद मसराम
की खेती जंगल के करीब ही है,जानकारी के अनुसार जिसके बाद राजस्व की जमीन और वन विभाग आरक्षित वन कंपार्टमेंट 522 का क्षेत्र इसकी जमीन के करीब ही है दूसरी तरफ वन विभाग के द्वारा बनाए गए मुनारे भी यहाँ साफ देखे जा सकते हैं लेकिन आश्चर्य की बात यह कि इस राजस्व और वन क्षेत्र में किसी भी सरकारी नुमाइंदे की कोई दिलचस्पी नहीं इसका ही नतीजा है कि इस क्षेत्र के करीब आधा सैकड़ा सतकठा और सागौन के पेड़ की कटाई पहले इन पेड़ों के तनों की चाल हटा कर सुखाने के बाद कुल्हाड़ी से की गई वहीं चमरू मसराम के द्वारा आरी से सागौन के लठ्टे भी तैयार कर घर ले जाए गए इसके साथ ही जेसीबी मशीन लगा कर बचे हुए ठूँठ को निकला गया और जमीन समतल कर ली गयी।
मुनारे भी कर लिए भीतर—
वन क्षेत्र के करीब लगे मुनारे अब चमरू मसराम के द्वारा साफ कराई गई जमीन के हद में तकरीबन 10 फ़ीट भीतर दिखाई दे रहे साथ ही जंगल के किनारे इस किसान ने बची हुई लकड़ियों से बाउंड्री के जैसी बाढ़ भी बनवा ली गयी है।लेकिन इस सब की जानकारी न तो वन विभाग को लग सकी न ही राजस्व के द्वारा इस कटाई को रुकवाया गया।
जीसीबी की भी हो जप्ती–
जानकारी के अनुसार चमरू मसराम ने इन पेड़ों की कटाई हेतु कहीं से विधिवत अनुमति भी नहीं ली है और बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई करवा कर यहाँ से परिवहन भी करवा लिया गया है। वहीं लगातार यह कार्य जेसीबी की मदद से किया गया और प्रशासन के साथ ही वन विभाग को भी खबार नहीं लगी ऐसे में जिस जेसीबी से यह कटाई और भूमि अधिग्रहण का कार्य किया गया उसकी भी जप्ती की जानी आवश्यक है।
वन विभाग का हिलाहवाला–
इस मामले में जब वन विभाग के जिम्मदारों से और एसडीओ पीके श्रीवास्तव से बात की गई तो उनका कहना है कि हमने जाँच करवाने के बाद कुछ लकडियों की जप्ती बनाई है लेकिन यह अभी जाँच में है कि उसने कितने पेड़ काटे,वहीं परिवहन की बात को वन विभाग के अधिकारी नहीं स्वीकार रहे जबकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसान चमरू मसराम के द्वारा सागौन की बड़ी मात्रा में लकड़ियों का परिवहन भी कराया गया है।
