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20 वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक माननीय विधायक की उपस्थिति में सम्पन्न

कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला में आॅनलाईन प्लेटफार्म गुगलमीट के माध्यम से 20वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति (खरीफ) की बैठक आयोजित की गई। उक्त बैठक की अध्यक्ष्ता माननीय निवास विधायक डाॅ. अषोक मर्सकोले एवं श्री ओम ठाकुर सदस्य प्रमण्डल ज.ने.कृ.वि.वि. जबलपुर के विषिष्ठ अतिथ्य से सम्पन्न हुआ। उक्त बैठक में आॅनलाईन प्लेट फार्म के माध्यम से डाॅ. डी.पी. शर्मा संचालक विस्तार सेवाएं, डाॅ. श्रीमति ओम गुप्ता पूर्व संचालक विस्तार सेवाएं, डाॅ. टी.आर. शर्मा प्राध्यापक, डाॅ, अर्चना पाण्डे वरिष्ठ वैज्ञानिक, डाॅ दिपाली बाजपेयी वैज्ञानिक, डाॅ प्रमोद गुप्ता, तकनीकी अधिकारी ज.कृ.वि.वि. जबलपुर, कृषि विभाग से श्री अमित पाण्डे सहायक संचालक, आत्मा परियोजना से डाॅ. रविकांत, श्री मोहित गोल्हानी, उद्यानिकी विभाग से श्री आर.के. मिश्रा, कान्हा प्रोड्यूसर कम्पनी से श्री रंजीत कछवाहा, एक गांव टेक्नोलाॅजी से श्री गुप्ता, आदि शामिल रहे। इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ विषाल मेश्राम कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला ने आॅनलाईन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय विधायक डाॅ अषोक मर्सकोले एवं वरिष्ठ अतिथि श्री ओम ठाकुर मण्डल अध्यक्ष एवं विष्व विद्यालय से जुडे डाॅ. डी.पी. शर्मा, डाॅ. श्रीमति ओम गुप्ता एवं विष्व विद्यालय से जुडे अन्य वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम से जुडे अन्य सदस्यो से परिचय करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र मण्डला के खरीफ 2020-21 का प्रगति प्रतिवेदन तथा खरीफ 2021 में केन्द्र द्वारा संचालित होने वाले विभिन्न प्रदर्षनों का संक्षिप्त में प्रस्तुतिकरण किया गया। प्रस्तुतिकरण के उपरांत कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय विधायक श्री मर्सकोले ने कहा कि जिले में पानी की कमी नही है जरूरत है सही प्लानिंग की। अतः कृषि विज्ञान केन्द्र को ऐसा कार्य योजना बनाने की जरूरत है जिससे कम पानी में फसल उत्पादन संभव हो पाये साथ ही कृषि षिक्षा पद्धति पर ज्यादा फोकस करने की आवष्यकता है। विषिष्ठ अतिथि श्री ओम ठाकुर ने अपना सुझाव दिया कि कृषि विज्ञान केन्द्र हर दृष्टि से अपना कार्य कर रहा है। लेकिन अब अवष्यकता है जैविक खेती एवं जैविक खेती के द्वारा सुपोषण भूमि अभियान को सफल बनाने की आवष्यकता है। संचालक विस्तार सेवाएं डाॅ. डी.पी. शर्मा द्वारा सलाह दिया कि कार्यक्रम प्रस्तुतीकरण को और आर्कषक बनाने की आवष्यकता है जिससे एक ही नजर से चीजो को समझा जा सकें। डाॅ श्रीमति ओम गुप्ता पूर्व संचालक विस्तार सेवाएं द्वारा सलाह दिया गया कि सीड बाॅल में बडे बीज वाले स्थानीय फल वृक्षो सीड बाॅल तैयार करने की कोषिष करे, जिससे स्थानीय पर्यावरण के अनुरूप आसानी से हरियाली लाया जा सके। कान्हा प्रोड्यूसर कम्पनी मण्डला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रंजीत कछवाहा द्वारा सुझाव दिया गया कि मण्डला जिले में देषी बीजो का काफी मात्रा में जननद्रव्य मौंजूद है जिन्हें सहेजने की आवष्यकता है जिससे राष्ट्रीय एवं अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर जिले को एक अलग पहचान मिल सके। संचालक विस्तार सेवाएं ज.ने.वि.वि, जबलपुर से डाॅ अर्चना पाण्डेय ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री जैसे गुड, लघु, धान फसलों की अच्छे से प्रंस्सकरण करके स्व. सहायता समूह के माध्यम से व्यापार को बढावा देते की जरूरत है। डाॅ. टी.आर. शर्मा ने कहा कि लौकी फसल में उत्पादन बढोतरी हेतु पादप वृद्धि निमायक फंफूदीनाषक एवं कटिंग तकनीक का समन्यवित प्रयोग करें जिससे उत्पादक का सही आंकलन हो पाये। सहायक संचालक कृषि श्री अमित पाण्डे द्वारा सलाह दिया गया कि जिले के 2-3 ब्लाॅक में ग्रामों का चयन करते हुये धान फसल के लिए रासायनिक, जैविक तथा दोनो के सम्मिलित पोषक तत्व से आंकलन की आवष्यकता है, जिससे जिले हेतु सही अनुपात में पोषक तत्व प्रबंधन हो सकंे और साथ ही जिंक सल्फर के विभिन्न अनुपात का आंकलन करने की आवष्यकता है। उद्यानिकी विभाग से श्री आर.के. मिश्रा द्वारा कहा गया कि उद्यानिकी फसलों में उत्पादक में वृद्धि हेतु अधिक से अधिक टपक सिंचाई एवं पलवार के उपयोग करने की आवष्यकता है। उक्त कार्यक्रम में उद्यानिकी विभाग से अभिनव बर्मन, आषा फाउण्डेष से शरद मिश्रा, श्री योगेष लिायंष, रिलायंस फाउण्डेषन से श्री सुरेन्द्र यादव तथा प्रगतिषील कृषक श्री सतेन्द्र बंदेवार आॅनलाईन माध्यम से शामिल रहे। श्री नीलकमल पन्द्रे द्वारा आभार प्रदर्षन किया गया तथा इस आॅनलाईन बैठक में शामिल होने वाले अध्यक्ष, विषिष्ट अतिथि, संचालक विस्तार सेवाएं एवं विष्व विद्यालय से जुडे सभी वैज्ञानिकों एवं जिले के अन्य विभागीय अधिकारी, कृषको को इस बैठक में अपना बहुमूल्य समय एवं मार्गदर्षन प्रदान करने हेतु धन्यवाद दिया। डाॅ. विषाल मेश्राम के कुषल मार्गदर्षन में कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्था के वैज्ञानिक डाॅ. आर.पी. अहिरवार. डाॅ. प्रणय भारती, कु. केतकी धूमकेती, श्री रज्जू सिंह राजपूत आदि का सहयोग रहा।

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