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पॉलीथिन विक्रेता उच्चतम न्यायालय के आदेशों को दिखा रहें हैं ठेंगा

शिव दोहरे,मंडला

मंडला। पॉलिथीन की समस्या इतनी गम्भीर होती जा रही हैं कि इस पर रोक लगाने के लिए आदेशों से काम नहीं चल रहा है, बल्कि जरूरत हैं कड़ी कार्यवाही की, और यह कभी नहीं होती। पॉलिथीन पर रोक लगाने की कार्यवाही केवल आदेशों तक ही सिमटकर रह जाती हैं। जिससे बार-बार जारी किए जा रहे आदेशों पर ही सवाल उठने लगे हैं कि आखिर पॉलिथीन के उपयोग पर कैसे रोक लगाई जा सकेगी। जब भी पॉलिथीन की समस्या अखबारों की सुर्खियां बनती हैं तो नगर पालिका व नगर पंचायतों द्वारा आनन-फानन में आदेश जारी कर दिए जाते हैं। लेकिन आदेशों में कहीं भी की गई कार्यवाही की बात कभी नही होती जिससे नतिजे सिफर ही रह जाते हैं। बता दें कि जिले भर में रंग बिरंगी पॉलिथीन का व्यापक पैमाने पर हर सामग्री रखने के लिए उपयोग किया जा रहा हैं जिसका खामियाजा पशुओं को अपनी जान देकर और लोगों को बुरे के रूप में चुकानी पड़ रही हैं। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन भी जिले भर में कहीं दिखाई नहीं दे रहा हैं।

 

पॉलिथीन विक्रेताओं के हौंसले बुलंद

 

उल्लेखनीय हैं कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद भी किसी भी तरह की कार्यवाही न होने से पॉलिथीन का विक्रय थॉक के रूप में बेथड़क खुलेआम किया जा रहा हैं। जिससे पॉलिथीन बाजार से निकलकर घरों तक पहुँच रहीं हैं। और इसके बाद कचरे के रूप में शहर के नालियों और सार्वजनिक स्थल पर फैल रहीं हैं।

 

पैकजिंग सामग्रियों ने बढ़ाया उपयोग

 

बाजार या कहीं भी पॉलिथीन एक रूपये से लेकर अधिक से अधिक तक की सामग्री पॉलिथीन में पैक कर विक्रय की जा रही हैं। लोग सामग्री लेकर घर जाकर सामग्री का उपयोग तो कर लेते हैं, लेकिन खाली की हुई पॉलिथीन में कुछ सामग्री रह जाने से उसे पशु पॉलिथीन को ही चट कर जाते हैं। जिससे उनकी मौत का कारण बन जाती हैं।

 

नागरिक भी जिम्मेदार

 

पॉलिथीन के दिन व दिन बढ़ते उपयोग के लिए जितना प्रशासनिक अमला कार्यवाही न करने के लिए जिम्मेदार हैं, उतना ही नागरिक पॉलिथीन का उपयोग अधिक करने के चलते जिम्मेदार हैं। आज लोगों ने दूध से लेकर हर सामग्री को पॉलिथीन में लाने को एक फैसन सा बनाकर आदत सी डाल रहें हैं। इसके पीछे एक ही कारण हैं कि थैला ले जाने में शर्म आना लेकिन एक छोटा सा थैला न ले जाने के चलते नागरिक ही पर्यावरण को प्रदूषित करने में सहभागी बन रहा हैं।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में भी गम्भीर स्थिति

 

पॉलिथीन के उपयोग को रोकने के लिए नगरीय क्षेत्रों में तो कभी-कभी औपचारिकता पूरी करने के लिए कार्यवाही या आदेश जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण अंचलों की स्थिति शहरी, क्षेत्रों की अपेक्षा कहीं अधिक हैं। जहाँ न रोकने के लिए कोई अभियान हैं न जागरूकता हैं। जिससे वे रोक-टोक पॉलिथीन का उपयोग धड़ल्ले से कर रहें हैं।

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