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गांव का देशी जीवन भी अब शहर की भौतिक सुख सुविधाओं में बदलने लगा है

गांव का देशी जीवन भी अब शहर की भौतिक सुख सुविधाओं में बदलने लगा है। जब हम बच्चे थे लगभग 25 वर्ष पूर्व तब दादी माँ, माता जी और काकी जी सुबह 4 बजे उठकर घर के काम मे लग जाती थी। ❤️
सभी घरों में मधुर सुरीली आवाज में संगीत सुनाई देता था ये गीत भगवान को समर्पित होते थे। जिन्हें Local Language में हम रामजी के गीत के नाम से ही जानते थे। जो आजकल लगभग विलुप्त प्रायः हो चले है। 🙏
सुबह 4 बजे से दिनभर के लिए आटा पिसाई हाथ की चक्की से करती थी उस प्रभात बेला को गांव की भाषा मे चाकी निराओ बोलते थे। उस कर्णप्रिय मधुर संगीत की ध्वनि मानशिक सन्तुष्टि देती थी और चाकी से आटा पीसने से पूरी बॉडी मूव होती थी आजकल की जिम से ज्यादा पसीना चाखी पर ही बह जाता था शायद ये ही वजह थी कि गांव में 15-20 वर्ष पूर्व कोई सिजेरियन Delivery के बारे में नही जानता था। यदि हमारे गांव का कोई व्यक्ति Delhi में भर्ती हो गया तो सोचते थे शायद अब वो नहीं बचेगा और पूरे गांव के लोग जब तक वो Admit रहता था। उससे मिलने बारी-बारी से जाया करते थे। 10-5 लोग तो हमेशा अस्पताल के बाहर ही खड़े रहते थे अब वो आत्मीयता खत्म हो चुकी है। 🥺
सुबह की छाछ (लस्सी) ने भी अब प्रथा बदल ली है। बिलोने से होने वाली छाछ अब मशीन से होने लगी है प्रत्येक घर की दीवार में रई को बैलेंस करने के लिए सैकड़ा लगाने हेतु छेद हुआ करते थे जब छाछ करते थे। तो इसमे लेफ्ट, राइट मूवमेंट होते थे जो ना केवल कमर के लिए बल्कि पूरी बॉडी के लिए बहुत लाभकारी हुआ करते थे। आज ये मूवमेंट करने के लिए हम Gym Trainer पर आश्रित हैं। 🤷‍♂️
सुबह जब छाछ करते थे तो इसके कई स्टेप होते थे जैसे दही जिसे खाना होता तो शुरुआति अवस्था में ही अलग कर लेते थे। वसा का मुख्य स्रोत है, उसके बाद हल्का मथने के बाद अगली स्टेज घोल्या आता तहस जिसमे थोड़ी कम वसा होती थी नेक्स्ट स्टेज छाछ की आती थी जिसमे सबसे कम वसा होती थी। 🤗
सुबह-सुबह कई लोग लूणी घी वैसे ही खा जाते थे। लेकिन इसका असली स्वाद गर्म गर्म चूल्हे पर बनी बाजरे की रोटी मिर्चि दही और गुड़ के साथ आता है जो हर किसी के दिल को भाता है।
हमारी ग्रामीण कल्चर, कला, संस्कृति, वेषभूषा ना केवल हमें स्वस्थ रखती थी बल्कि आकर्षक भी बनाती थी। जैसे-जैसे भौतिकता ने हमारे जीवन मे प्रवेश किया है हमें बीमारू बना दिया है। उम्मीद है आपकी पुरानी यादें ताजा हुई होंगी और आप भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। 😊

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