ब्लॉक मैनेजर ने महिला समूह से मांगे 50 हजार रूपये
लोकोश एन्ट्री के लिये लगातार किया जा रहा परेशान
देश की महिलायें सशक्त हों वे आर्थिक रूप से न केवल आत्मनिर्भर बनें बल्िक एक सशक्त परिवार एवं समृद्ध समाज का निर्माण कर सकें इसके लिये स्वसहायता समूह की अवधारणा पर काम किया गया और महिलाओं को स्वसहायता समूह के माध्यम से जोड़ा गया एवं विभिन्न रोजगार मूलक कार्यो का न केवल प्रशिक्षण दिया गया बल्िक उसके लिये भारी भरकम राशि भी आवंटित की गई इन समूहों के सहयोग के लिये आजीविका मिशन की स्थापना की गई ताकि इन महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके उसकी जानकारी हो सके और वित्तीय लेन-देन की गतिविधियों में दिक्कत न हो।
लेकिन जिले का दुर्भाग्य कि जिन अिधकारी-कर्मचारियों को इसकी जबावदारी शासन द्वारा दी गई वे इन समूहों की सहायता करने के स्थान पर उन्हें मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
स्वरोजगार के नाम पर ये समूह को तो आगे करते हैं लेकिन पूरा व्यापार स्वयं कर रहे हैं पिछले दिनों गणवेश निर्माण एवं उसके वितरण का मामला काफी सुर्खियों में रहा है जिसमें समूह से गणवेश न बनवाकर बाजार से घटिया गणवेश खरीदी गई और उन्हें स्कूलों में सप्लाई किया गया समूह के अध्यक्ष, सचिव से सिर्फ बिल बाऊचर लिये गये और उन्हें चैक दिया गया घटिया गणवेश को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों द्वारा श्िाकायतें भी हुई और इसकी जांच भी कराई गई लेकिन दुर्भाग्य कि अभी तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
गणवेश्ा घाेटाले में एक नाम बहुत चर्चित हुआ वह तात्कालीन नोडल अधिकारी योगेन्द्र तिवारी जो वर्तमान में ब्लॉक मैनेजर के रूप में कार्य कर रहे हैं इनके कारनामें अभी भी जारी है स्वसहायता समूहों की महिलाओं को प्रताड़ित करना उन्हें परेशान करना इनकी फितरत में शामिल है हाल ही में स्नेहा समूह की महिलाओं से इन्होंने 50 हजार रूपये मांगे कारण था कि इस समूह के द्वारा 2023-24 में धान खरीदी की गई थी और इस कार्य के लिये जिला पंचायत एवं जिला प्रशासन द्वारा समूह की प्रशंसा भी की गई थी यह नोडल अिंधकारी को रास नहीं आया उन्होंने समूह की महिलाओं से कहा कि उन्होंने धान खरीदी में काफी कमाई की है लिहाजा मुझे रूपये चाहिये और उन्होंने 50 हजार रूपये की मांग की समूह द्वारा जब उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो उन्होंने समूह को धमकी दी कि वे आगे काम नहीं कर पायेंेगे और यही हुआ गेहूं खरीदी कार्य में भी श्री तिवारी द्वारा अड़ंगा लगाया गया और समूह गेहूं खरीदी नहीं कर सका। इस वर्ष जैसे ही धान खरीदी के लिये समूह की फाईल योगेन्द्र तिवारी के पास पहुंची उन्होंने फिर से अपनी मांग दोहराई और जब पैसे नहीं मिले तो समूह की लोकोश एन्ट्री नहीं होने दी एवं रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र को फर्जी बताकर इस समूह के आस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया तथा समूह को पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी और उन्हें धान खरीदी योग्य नहीं साबित किया।
समूह की महिलाओं द्वारा इस बात की शिकायत लिखित रूप से जिला परियोजना अिधकारी को की गई और पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की गई है।
इनका कहना है कि:-
इस तरह की शिकायत हमें प्राप्त हुई है इसकी जांच कराई जायेगी और जो भी दोषी होगा उस पर कार्यवाही होगी।
-जिला परियोजना प्रबंधक, मण्डला
समूह द्वारा मेरे विरूद्ध की गई शिकायत की मुझे कोई जानकारी नहीं है इस पर मैं कुछ भी नहीं बता सकता।
-योगेन्द्र तिवारी-
ब्लॉक मैनेजर मण्डला
लेकिन जिले का दुर्भाग्य कि जिन अिधकारी-कर्मचारियों को इसकी जबावदारी शासन द्वारा दी गई वे इन समूहों की सहायता करने के स्थान पर उन्हें मानसिक एवं आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
स्वरोजगार के नाम पर ये समूह को तो आगे करते हैं लेकिन पूरा व्यापार स्वयं कर रहे हैं पिछले दिनों गणवेश निर्माण एवं उसके वितरण का मामला काफी सुर्खियों में रहा है जिसमें समूह से गणवेश न बनवाकर बाजार से घटिया गणवेश खरीदी गई और उन्हें स्कूलों में सप्लाई किया गया समूह के अध्यक्ष, सचिव से सिर्फ बिल बाऊचर लिये गये और उन्हें चैक दिया गया घटिया गणवेश को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों द्वारा श्िाकायतें भी हुई और इसकी जांच भी कराई गई लेकिन दुर्भाग्य कि अभी तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
गणवेश्ा घाेटाले में एक नाम बहुत चर्चित हुआ वह तात्कालीन नोडल अधिकारी योगेन्द्र तिवारी जो वर्तमान में ब्लॉक मैनेजर के रूप में कार्य कर रहे हैं इनके कारनामें अभी भी जारी है स्वसहायता समूहों की महिलाओं को प्रताड़ित करना उन्हें परेशान करना इनकी फितरत में शामिल है हाल ही में स्नेहा समूह की महिलाओं से इन्होंने 50 हजार रूपये मांगे कारण था कि इस समूह के द्वारा 2023-24 में धान खरीदी की गई थी और इस कार्य के लिये जिला पंचायत एवं जिला प्रशासन द्वारा समूह की प्रशंसा भी की गई थी यह नोडल अिंधकारी को रास नहीं आया उन्होंने समूह की महिलाओं से कहा कि उन्होंने धान खरीदी में काफी कमाई की है लिहाजा मुझे रूपये चाहिये और उन्होंने 50 हजार रूपये की मांग की समूह द्वारा जब उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो उन्होंने समूह को धमकी दी कि वे आगे काम नहीं कर पायेंेगे और यही हुआ गेहूं खरीदी कार्य में भी श्री तिवारी द्वारा अड़ंगा लगाया गया और समूह गेहूं खरीदी नहीं कर सका। इस वर्ष जैसे ही धान खरीदी के लिये समूह की फाईल योगेन्द्र तिवारी के पास पहुंची उन्होंने फिर से अपनी मांग दोहराई और जब पैसे नहीं मिले तो समूह की लोकोश एन्ट्री नहीं होने दी एवं रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र को फर्जी बताकर इस समूह के आस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया तथा समूह को पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी और उन्हें धान खरीदी योग्य नहीं साबित किया।
समूह की महिलाओं द्वारा इस बात की शिकायत लिखित रूप से जिला परियोजना अिधकारी को की गई और पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की गई है।
इनका कहना है कि:-
इस तरह की शिकायत हमें प्राप्त हुई है इसकी जांच कराई जायेगी और जो भी दोषी होगा उस पर कार्यवाही होगी।
-जिला परियोजना प्रबंधक, मण्डला
समूह द्वारा मेरे विरूद्ध की गई शिकायत की मुझे कोई जानकारी नहीं है इस पर मैं कुछ भी नहीं बता सकता।
-योगेन्द्र तिवारी-
ब्लॉक मैनेजर मण्डला
