मंडला, 28 नवंबर 2025
जनपद पंचायत घुघरी के ग्राम पंचायत छतरपुर की निवासी श्रीमती दसौंदीबाई के जीवन में खुशी और समृद्धि के नए अध्याय की शुरुआत तब हुई, जब महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के तहत शुरू जल गंगा संवर्धन अभियान ने उनकी सूखी, कमजोर और अनुपजाऊ जमीन को एक उपजाऊ और जीवनदायी खेत में बदल दिया। सालों से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर उनका परिवार आर्थिक तंगी, अनिश्चित भविष्य और कमजोर उत्पादन से जूझ रहा था। लेकिन जल संरक्षण की इस पहल ने न केवल मिट्टी की किस्मत बदली, बल्कि परिवार की खुशियों को भी नई राह दी।

सूखी धरती, टूटती उम्मीदें और फिर एक नई शुरुआत
दसौंदीबाई बताती हैं कि उनकी 1.35 हेक्टेयर भूमि की ऊपरी सतह मुरम और नीचे रेतीली थी। पानी टिकता ही नहीं था। सिंचाई साधन तो दूर, एक फसल भी मुश्किल से हो पाती थी। परिवार के भरण-पोषण में भारी कठिनाई आ रही थी। ”इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने खेत-तालाब निर्माण का प्रस्ताव ग्राम सभा में रखा। उपयंत्री द्वारा स्थल निरीक्षण, हाइड्रोलिक रिपोर्ट, भूमि चयन और ले-आउट तैयार किया गया। इसके बाद ग्राम रोजगार सहायक ने कार्य को मनरेगा पोर्टल पर पंजीकृत किया और तकनीकी प्राक्कलन स्वीकृत हुआ। सरपंच द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हुआ।

कठिन जमीन, मुश्किल निर्माण-लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति
कार्यस्थल पथरीला था, जिससे तालाब निर्माण में भारी कठिनाई आई। मजदूरों को कई दिनों तक कठोर चट्टानों को तोड़ने और मिट्टी हटाने में संघर्ष करना पड़ा। इसके बावजूद निर्माण कार्य समय-सीमा में पूरा किया गया और मई 2025 तक तालाब का आकार साकार हो चुका था।

तालाब में भरा पानी…..
निर्माण पूरा होते ही तालाब में उत्कृष्ट जलभराव हुआ। जैसे ही पानी भरना शुरू हुआ, दसौंदीबाई की आंखों में उम्मीद की चमक लौट आई। वे बताती हैं अब हमारी जमीन एक फसली नहीं रही…… तालाब के पानी से रबी की सिंचाई आसानी से होगी।” आज उसी जमीन पर दो फसलों का उत्पादन संभव हो गया है। तालाब की मेढों पर अरहर की बुआई भी की गई है, जो अतिरिक्त लाभ प्रदान करेगी।

जल-भराव की बेहतर स्थिति को देखते हुए, हितग्राही दसौंदीबाई ने इसी वर्ष 7 किलोग्राम मछली बीज (रोहू, नरेन, बी-ग्रेड, सिल्वर काठ प्रजाति) डाला है। इस मछली पालन से 6-7 क्विंटल मछली उत्पादन होने की संभावना है, जिससे परिवार को मात्र 6 माह में लगभग 1 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

दसौंदीबाई ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब परिवार अपनी ही जमीन से दो फसलें और मछली उत्पादन का दोहरा लाभ ले रहा है। मनरेगा योजनांतर्गत जल गंगा संवर्धन अभियान ने उनकी कमजोर जमीन को न केवल उपजाऊ बनाया है, बल्कि उनके परिवार को आत्मनिर्भरता और सामाजिक-आर्थिक मजबूती प्रदान की है। यह खेत तालाब केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि खुशहाली और बेहतर भविष्य की नींव साबित हुआ है।

