मंडला, 3 जनवरी 2026
मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली माँ नर्मदा की कृपा से सिंचित मंडला जिला केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केन्द्र है। नर्मदा नदी द्वारा नगर को तीन ओर से मण्डल के रूप में घेरने के कारण ही इस पावन धरा का नाम मंडला पड़ा है। विदित है कि मध्यप्रदेश सरकार ने मंडला को पवित्र नगरी भी घोषित किया है। मंडला नगर की ख्याति माँ नर्मदा के नाम से ही पूरे देश में फैली हुई है। आध्यात्म एवं धार्मिक दृष्टि से माँ नर्मदा को जीवित इकाई के रूप में दर्जा मिला है।

परंपरा रही है कि जो भी अधिकारी इस भूमि पर दायित्व ग्रहण करता है वह सर्वप्रथम माँ नर्मदा का आशीर्वाद लेकर ही अपने कार्यों का शुभारंभ करता है। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने मण्डला कलेक्टर का पदभार ग्रहण करने के साथ ही मां नर्मदा के रपटा घाट पहुँचकर माँ नर्मदा का आशीर्वाद लिया। यहीं से उन्होंने हरिद्वार तथा वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर मां नर्मदा की महाआरती का संकल्प लिया। समाजसेवियों, नर्मदा भक्तों तथा जिला स्तरीय अधिकारियों से अपने इस विचार को उन्होंने साझा किया।

सामान्य से विशेष हुई महा आरती, श्रद्धालुओं का हुआ जुड़ाव
नमामि नर्मदे महाआरती ट्रस्ट का प्रादुर्भाव, रपटा घाट हुआ माहिष्मती घाट
कलेक्टर श्री मिश्रा के जिले के प्रतिष्ठित नागरिकों से विचार-विमर्श के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तात्कालिक रपटाघाट में सामान्य रूप से ही संध्या आरती रोजाना की भांति हुआ करती थी। श्रद्धालु भी अपेक्षा अनुरूप संख्या में मौजूद नहीं होते थे जिसका मुख्य कारण घाट पर समुचित व्यवस्थाओं का अभाव होना था। इन सभी विषयों पर लोगों से विचार-विमर्श कर कलेक्टर श्री मिश्रा अपनी परिकल्पना को साकार करने के लिए आगे बढ़े। माँ नर्मदा की संध्या आरती पहले से होती आई है, परंतु उसमें कोई नियमितता नहीं थी, न ही समय निश्चित था। आगे महाआरती किस तरह लम्बे समय तक निरंतर चलती रहे ? यह एक बड़ा प्रश्न था। इसका उत्तर भी माँ नर्मदा की महाआरती का निर्णय ले चुके कलेक्टर श्री मिश्रा ने नमामि नर्मदे महाआरती ट्रस्ट की स्थापना के रूप में ढूंढा। इस ट्रस्ट में विभिन्न समाजसेवी और नर्मदा भक्तों ने निर्धारित शुल्क जमा कर इसकी सदस्यता ली। कलेक्टर श्री मिश्रा के इस प्रेरक कार्य से प्रभावित होकर अन्य श्रद्धालुओं ने आजीवन सदस्य के रूप में ट्रस्ट से जुड़कर इस पुनीत कार्य में सहभागिता सुनिश्चित कर रहे हैं। अब रपटा घाट का नाम माहिष्मती घाट के रूप में जाना जाने लगा।

सामाजिक समावेशन से परिकल्पना को मिला संबल
कलेक्टर श्री मिश्रा ने इस बड़े सामाजिक संकल्प की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए एक और कदम उठाया। उन्होंने विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय करते हुए यह तय कराया कि तिथि के अनुसार एक-एक समाज अपनी ओर से महाआरती का दायित्व उठाए। समाज के लोगों ने भी इस भाव को आत्मसात किया और बढ़-चढ़ कर इसमें अपना योगदान देने और उपस्थिति के लिए सहमति दी। नमामि नर्मदे महाआरती ट्रस्ट की ओर से इसके लिए माह की तिथियों के अनुसार समाजिक संगठनों की जिम्मेदारी तय की। सामाजिक समावेशन की इस पहल से महा आरती की निरंतरता को सुनिश्चित करने का संबल मिला ।

तुलसी पूजन के शुभ अवसर पर हुई शुरुआत
माँ नर्मदा के प्रति आस्था के असीम भाव के साथ वर्ष 2024 की दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की पवित्र एकादशी अर्थात तुलसी पूजन के शुभ अवसर पर मां नर्मदा की पंच चौकी महाआरती की भव्य शुरुआत हुई। जिससे हरिद्वार और वाराणसी की गंगा आरती का दृश्य यहाँ मण्डला के माहिष्मती घाट पर सर्व सुलभ हो गया। देवउठनी एकादशी के दिन स्थानीय शीतला मंदिर से बड़ी संख्या में महिलाओं ने कलश यात्रा एवं चुनरी यात्रा लेकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए माहिष्मती घाट पहुँची। माँ नर्मदा को चुनरी अर्पित करने के साथ पूजन घाट पर ही तुलसी पूजा के साथ महा आरती की शुरूआत की गई। इस अवसर पर विशेष लेजर-शो भी आयोजित किया गया था। शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, सांसद श्री फग्गन सिंह सहित बड़ी संख्या में नर्मदा भक्त एकत्र हुए थे।

जनप्रतिनिधियों के सहयोग से पूजन घाट का हुआ कायाकल्प
कलेक्टर श्री मिश्रा के माँ नर्मदा के प्रति असीम आस्था भाव से जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भी प्रभावित हुए। कलेक्टर के अनुरोध पर मध्यप्रदेश शासन की केबिनेट मंत्री एवं मंडला विधायक श्रीमती संपतिया उइके तथा मंडला सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते सहित अन्य प्रतिनिधियों एवं नर्मदा भक्तों के सहयोग से पूजन घाट का कायाकल्प कराया गया। पूरे घाट पर लाल पत्थर से श्रद्धालुओं के लिए भव्य पूजनघाट तैयार किया गया। घाट पर ही नियत दूरी पर 5 विशेष चौंकियाँ तैयार की गई, जिससे हर संध्याकाल को पंचचौकी महाआरती माँ नर्मदा को समर्पित किए जाने का क्रम चल पड़ा।

तीन राज्यों के महामहिम हो चुके हैं शामिल
माहिष्मती घाट की महाआरती की ख्याति दूर तक पहुँच रही है। मण्डला से निकलकर इसकी चर्चा न सिर्फ मध्यप्रदेश में वरन अन्य प्रदेशों में भी फैल चुकी है। इसका प्रमाण है कि विभिन्न राज्यों के मंत्री, सांसद और विधायकगण महाआरती में शामिल होकर धर्म लाभ उठा चुके हैं। यही नहीं मध्यप्रदेश सहित तीन राज्यों के महामहिम राज्यपाल भी संध्या कालीन महाआरती में शामिल हुए हैं। जिनमें कर्नाटक तथा छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल शामिल हैं।

विशेष अवसरों पर समर्पित की गई भव्य आतिशबाजी के साथ महाआरती
पिछले वर्ष भर में अनेक मौकों पर विशेष पंचचौकी आरती माँ नर्मदा के चरणों में समर्पित की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन, प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जन्मदिन, चैम्पियन्स ट्रॉफी प्रतियोगिता में भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत का अवसर, पंचचौकी महाआरती की वर्षगांठ, मंडला गौरव दिवस, मध्यप्रदेश स्थापना दिवस अथवा विशेष दीपोत्सव हो। इन सभी में भव्य आतिशबाजी की मनमोहक छटा ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष भर के विशेष पर्वों और त्यौहारों पर संस्कृति विभाग द्वारा माहिष्मती घाट के शेड पर ही विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

