मंडला, 18 सितम्बर 2026
छह वर्षीय शिवांश चौधरी अपने परिवार के लिए बिल्कुल सामान्य और स्वस्थ बच्चा था। परिवार को कभी यह अहसास नहीं हुआ कि उसके हृदय में जन्मजात बीमारी है। जुलाई 2026 में मेहरा सिवनी ग्राम के स्कूल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान आरबीएसके टीम निवास ने शिवांश की जांच की। जांच के दौरान चिकित्सक डॉ. अजय कुमार खंडेल ने उसके हृदय में जन्मजात बीमारी की आशंका जताई और आगे की जांच की सलाह दी।
परिजनों को शुरुआत में विश्वास नहीं हुआ कि शिवांश को हृदय संबंधी कोई बीमारी हो सकती है। लेकिन आरबीएसके टीम की सजगता और समझाइश के बाद जबलपुर में बच्चे की इकोकार्डियोग्राफी कराई गई। जांच में Atrial Septal Defect की पुष्टि हुई और चिकित्सकों ने हृदय की सर्जरी की आवश्यकता बताई।
आरबीएसके टीम निवास के आवश्यक समन्वय एवं मार्गदर्शन से शिवांश का उपचार नारायण हेल्थ, मुंबई में कराया गया। 8 अगस्त 2026 को उसकी सफल हृदय सर्जरी हुई। उपचार के बाद अब शिवांश स्वस्थ है और उसकी स्थिति संतोषजनक है।

शिवांश के परिवार के लिए यह अनुभव किसी नई जिंदगी मिलने से कम नहीं है। परिवार ने बताया कि यदि स्कूल में समय पर स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हुआ होता, तो उन्हें बच्चे की बीमारी के बारे में पता नहीं चल पाता। आरबीएसके टीम की सजगता से बीमारी की समय पर पहचान हुई और उचित उपचार संभव हो सका।
इस सेवा कार्य में बीएमओ डॉ. विजय पैगवार के मार्गदर्शन, आरबीएसके चिकित्सक डॉ. अजय कुमार खंडेल तथा डीईआईसी मैनेजर श्री अर्जुन सिंह के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शिवांश के परिवार ने आरबीएसके टीम एवं शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “समय पर बीमारी की पहचान और उपचार के कारण आज हमारा बच्चा स्वस्थ है। हम आरबीएसके निवास की पूरी टीम, शासन और उपचार से जुड़े सभी लोगों के हृदय से आभारी हैं।”
बच्चों का स्कूल एवं आंगनवाड़ी स्तर पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण केवल सामान्य स्वास्थ्य जांच नहीं है, बल्कि कई बार ऐसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान का माध्यम बनता है, जिनके लक्षण शुरुआत में स्पष्ट दिखाई नहीं देते। शिवांश की कहानी इस बात की मिसाल है कि समय पर जांच, सजगता और उचित उपचार किसी बच्चे के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
