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नर्मदा के रपटा पुल पर ‘नमो भारत’ पैरों तले मंडला।

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर जिला मंडला में चल रहे कार्यक्रमों के बीच नर्मदा नदी पर बने छोटे रपटा पुल पर ‘नमो भारत विकसित भारत जिला मंडला’ लिखकर प्रचार किया गया। रोजाना पैदल घूमने वाले नागरिक इस लेखन के ऊपर से पैर रखकर गुजर रहे हैं। आमजन में भारी आक्रोश है। लोग इसे राष्ट्रभक्ति नहीं, बल्कि अंधभक्ति का नतीजा बता रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि भारत महान है, प्राणों से भी बहुत ऊपर। भक्ति इतनी प्रबल नहीं होनी चाहिए कि देश का नाम पैरों तले पहुंचा दिया जाए। जोश में होश मत गंवाइए कि देश पावों तले कुचला जाए। भारत हिमालय से भी ऊंचा है, उसे रास्ते पर नहीं बल्कि माथे पर लिखा जाना चाहिए। शायर राहत इंदौरी की ये पंक्तियां लोगों की जुबान पर हैं— मेरे मरने के बाद एक एहसान कर देना, जहां मुझे दफन किया जाए उसके पहले मेरे माथे पर भारत लिख देना। लोग पूछ रहे हैं कि जब भारत को माथे पर लिखने की बात कही गई तो उसे पैदल पथ पर क्यों अंकित किया गया? पुल पर लिखा नारा दो दिन पहले ही अंकित किया गया था। सुबह भ्रमण करने वाले नर्मदा भक्त, महिलाएं और आम नागरिक जब इसे देखकर हैरान रह गए तो आक्रोश फूट पड़ा। कई लोगों ने कहा कि प्रचार के लिए बैनर, पोस्टर या दीवारें उपलब्ध थीं।
                                                                सड़क या पुल पर लिखकर राष्ट्र के नाम और ‘नमो’ शब्द को पैरों तले रौंदवाना संवेदनहीनता है। ‘नमो’ शब्द भारतीय दर्शन और धार्मिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। भारत शब्द देश और उसके अमर शहीदों का प्रतीक है। जिला प्रशासन और नगरपालिका की अनदेखी पर भी सवाल उठ रहे हैं। नगरपालिका अधिकारी ने दावा किया कि रास्ता बंद कर दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि अगर रास्ता बंद था तो वहां लेखन कैसे हुआ? और लोग पैदल कैसे चल रहे थे? जब स्वदेश की टीम मौके पर पहुंची तो संयुक्त कलेक्टर सोनल सिडाम वहां मौजूद थीं। उनसे जब इस अव्यवस्था के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पैदल चलने वालों को सोचना चाहिए था। आम जनता पर जिम्मेदारी डालकर प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया। दोपहर बाद कुछ अंकुश लगाया गया, लेकिन नुकसान हो चुका था। 25 हजार तेल के दीयों से नर्मदा किनारे भव्य आयोजन की तैयारी चल रही है, लेकिन छोटी-सी लापरवाही पूरे कार्यक्रम पर ग्रहण लगा सकती है। लोग मांग कर रहे हैं कि इस मामले की तत्काल जांच हो, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और लेखन तुरंत मिटाया जाए। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर सम्मान का यह तरीका कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या प्रशासनिक लापरवाही मंडला के लिए काला टीका बन जाएगी? आमजन यही पूछ रहे हैं।

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