जिले के ग्राम देवदरा निवासी श्री अर्पित पांजरे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का लाभ लेकर अपने छोटे डेयरी व्यवसाय को आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण इकाई में बदल दिया है। योजना के सहयोग से आज वे पांजरे फार्म्स मिल्क एंड मोर नाम से मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट का सफल संचालन कर रहे हैं। योजना से जुड़ने से पहले अर्पित केवल एक छोटी डेयरी दुकान संचालित करते थे। लगभग 50 हजार रुपये की लागत वाले इस व्यवसाय से उन्हें करीब 30 हजार रुपये मासिक आय होती थी, जिसमें खर्च के बाद लगभग 20 हजार रुपये शुद्ध आय बचती थी।
व्यवसाय को विस्तार देने के उद्देश्य से अर्पित ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत आवेदन किया। उनकी परियोजना की कुल लागत 9 लाख 92 हजार 300 रुपये रही, जिसमें योजना के तहत उन्हें 3 लाख 47 हजार 305 रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। आर्थिक सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से उन्होंने दुग्ध प्रसंस्करण की आधुनिक इकाइयां स्थापित कीं।

आज श्री अर्पित की मासिक आय बढ़कर करीब 90 हजार रुपये हो गई है। खर्चों के बाद उन्हें लगभग 60 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। इस तरह उनकी शुद्ध मासिक आय 20 हजार रुपये से बढ़कर 60 हजार रुपये हो गई है। श्री अर्पित बताते हैं कि सरकारी योजना, वित्तीय सहायता और सही मार्गदर्शन ने उनके व्यवसाय को नई दिशा दी। वे प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण युवा स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। श्री अर्पित पांजरे की कहानी यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और उद्यमशीलता ग्रामीण युवाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकती है।
