मेरा नाम अमित मरावी है और वर्तमान में राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा मंडला जिला सह-सदस्यता प्रभारी पद पर नियुक्त हूं आज मैं जो घटना के बारे में बताने जा रहा हं यह एक भले इंसान की है जो कि नैनपुर में रहते हैं इनका नाम दिलीप सराठे जी हैं, इनका नैनपुर में सिवनी रेले फाटक ‘के पास जेंटस पार्लर की छोटी सी दुकान है मैं पिछले 3 दिनों से बालाघाट टूर में था और वहां से अपना काम पूरा करके अपने निज निवास ग्राम कामता आ रहा था जो कि मंडला डिस्टिक में है मैं आते-आते नैनपुर में दिलीप भाई की दुकान में रुक कर अपनी सेविंग कराई और उसका जो भी चार्ज होता है वह देकर में वहां से निकल गया और में अपने पर्स की और ध्यान नहीं दै पाया पर्स उनकी दुकान में ही छूट गया था और वहां से निकले मुझे लगभग 1 घंटे हो चुके थे फिर भी में अपने पर्स की और थ्यान नहीं दे पाया जब रास्ते में मेंने कुछ सामान कलेक्ट किया जब मुझे पैसे देने की बारी आई तब मैने देखा कि मेरे जेब में पर्स ही नहीं हे मेरे पर्स में लगभग 20000 रुपए कैस थे , और जरूरी डॉक्यूमेंट थे और पर्स घूमने की जानकारी मैने अपने सारे दोस्तों को दी तो सभी दोस्त मिलकर ढूंढने लगे पर कहीं से कुछ पता ही नहीं चल पा रहा था और मेरे पास लास्ट उम्मीद केवल दिलीप भाई की दुकान की थी क्योंकि मैंने वहां पर सेविंग कराया था अब मैं दिलीप भाई के दुकान पहुंचा तो दिलीप भाई ने मुझसे कहा कि भाई मैं आपका बहुत देर से वेट कर रहा हुं कि आप आएंगे और अपनी पर्स लेकर जाएंगे करके और उन्होंने मुझसे यह भी कहा यदि आप शाम तक नहीं आते तो आपके पर्स में रखें आधार कार्ड के माध्यम से आपके गांव तक आपका पर्स और डॉंव्युमेंट दोनों सेव पहंचाता दिलीप भाई की यह बात मुझे बहुत अच्छी लगी और बदले में मेंने उन्हें कुछ गिप्ट दिया वो ले नहीं रहे थे पर मैंने जबरदस्ती करके उन्हे दिया ऐसे इंसान को देख कर और उनसे मिलकर हमें बहुत खुशी होती है कि आज भी ऐसे इंसान हैं और ऐसे इुंसानों को मैं और मेरी राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा की सारी टीम मिलकर तहे दिल से सैल्गुट करती हैं
