मंडला 23 अक्टूबर 2024
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. केसी सरोते ने जानकारी दी कि हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क ईसीएचओ जाँच परीक्षण शिविर 24 अक्टूबर को जिला चिकित्सालय मण्डला में लगेगा। जन्मजात बीमारी से बच्चों को मिलेगा नया जीवन पीड़ित बच्चे निरोगी हो सके, इस उद्देश्य से आरबीएसके अंतर्गत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में दी जा रही है। बच्चे स्वस्थ होकर एक स्वस्थ्य समाज एवं उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सके। हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की होगी ईको जांच बताया गया कि 24 अक्टूबर को जिला चिकित्सालय स्थित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र मंडला में सुबह 10ः30 बजे से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क जांच परीक्षण मैट्रो होस्पिटल जबलपुर द्वारा किया जायेगा।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष के हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को आरबीएसके एवं आयुष्मान के तहत जांच परीक्षण कर सर्जरी कराई जाएगी। शिविर में हर वर्ग के पीड़ित बच्चों की जांच परीक्षण कर निःशुल्क शल्य चिकित्सा के लिए चयनित किया जाएगा। जिनका निःशुल्क उपचार चिन्हित चिकित्सालय में किया जाएगा। आरबीएसके प्रबंधक अर्जुन सिंह ने बताया कि अब बच्चे भी हृदय रोग से अछूते नहीं रहे। आम तौर पर बच्चों में होने वाले हृदय रोगों को पहचानना कठिन होता है क्योंकि इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। माता-पिता भी बच्चों में हृदय रोगों के लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते और समय पर इसकी पहचान नहीं होने के कारण ये रोग गंभीर हो जाते हैं। अनदेखी के कारण ही ये बीमारियां जीवन के लिए भी खतरा बन जाती है। हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान बच्चों में बार बार बुखार आना, सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी या थकान, होंठ नीले पड़ जाना एक पैर में सूजन, दिल की धड़कन की ताल में परिवर्तन, लगातार या सूखी खांसी, त्वचा पर चकत्ते, अंगुलियां के सिरे मोटे हो जाना हृदय रोग से पीड़ित की पहचान की जा सकती है। डॉ. विजय धुर्वे, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक जिला चिकित्सालय ने बताया गया कि जीवन के सुचारू रूप से संचालन हेतु हृदय के प्रमुख कार्य है- ऑक्सीजन व पोषण सामग्री युक्त रक्त को शरीर के प्रत्येक अंगों तक पहुंचाना, शरीर के विभिन्न अंगों से दूषित रक्त (कार्बन डाइऑक्साइड युक्त) प्राप्त करना, रक्तचाप का संतुलन फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त प्राप्त करना व संतुलित हृदय की गति द्वारा रक्त प्रवाह का नियंत्रण। हृदय रोग के प्रमुख लक्षण है सीने में दर्द या भारीपन, थकावट, चक्कर आना, धड़कन, सांस लेने में कठिनाई, धड़कन में अनियमितता, पैरों में सूजन, बच्चों में स्तनपान के दौरान सांस लेने में कठिनाई, चमड़ी का नीला पड़ना वजन न बढ़ना, बार-बार बुखार आना जैसी तकलीफें हो सकती हैं। किसी भी प्रकार का लक्षण पाए जाने पर आमजन समुदाय से अपील की जाती है कि अपने बच्चों के हृदय की जांच जरूर कराएं।
