मण्डला। एकल अभियान संभाग महाकौशल भाग रेवांचल अंचल मण्डला में श्री हरि राम कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है श्रीराम जी की कथा झारखण्ड निवासी सुश्री गीता कुमारी पानजी के द्वारा श्रवण कराई जा रही है कल कथा के दूसरे दिवस कथा में बताया गया कि भगवान शिव श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और जहां भी श्रीराम जी की कथा का वाचन या श्रवण होता है वहां भगवान शिव अवश्य उपस्थित होते हैं भगवान राम के स्मरण मात्र से ही भगवान शिव की प्रसन्नता बढ़ जाती है जब त्रेता युग अयाेध्या नगरी में नवमी तिथि पर भगवान राम प्रकट हुये तो भगवान शिव उस समय नारी का रूप धरकर अयोध्या में मौजूद रहे और भगवान राम के जन्मोत्सव का आनंद उठाया। इस अवसर पर तो सभी देवी-देवता अयोध्या में उत्सव का आनंद उठा रहे थे उन्हें किसी को देखने समझने की फुर्सत नहीं रही लेकिन भगवान राम ने भगवान शिव को पहचान लिया और उन्हें मन ही मन नमन किया। भगवान राम जब लंका विजय के लिये जाते हैं तो रामेश्वरम में भगवान शिव की स्थापना करते हैं यह उनकी भगवान शिव के प्रति अनन्य भक्ति का परिचायक है। भगवान राम के प्रति भगवान शिव के इस प्रगाढ़ प्रेम को देखकर माता सती के मन में संशय हो जाता है कि जिस तरह भगवान राम सीता माता के विरह में मानव रूप में पीड़ित होकर पृथ्वी लोक में विचर रहे थे उसी दौरान भगवान शिव एवं माता सती का वहां से जाना हुआ भगवान शिव ने श्रीराम को सच्चितानंद भगवान की जय हो कहकर प्रणाम किया तो माता सती अचंभित होकर रह गई कि जो देव के देव महादेव हैं वे एक मानव को सच्चितानंद कहकर प्रणाम कर रहे हैं और बस उन्होंने भगवान शिव से इसी संशय को लेकर प्रश्न कर डाला भगवान शिव जान गये कि सती भगवान राम की माया के वशीभूत हो चुकी हैं और शायद श्रीराम की यही इच्छा है बस उन्होंने उनकी इस इच्छा को प्रणाम करते माता सती को कह दिया कि यदि आपको कोई संशय है तो आप स्वयं जाकर इस बात की परीक्षा क्यों नहीं कर लेती और फिर जिस तरह से माता सती ने परीक्षा ली और यह परीक्षा उनके सती रूप में भस्म हो जाने का जो कारण बनी यह कथा में आगे श्रवण कराया जायेगा। कल की कथा यही पूर्ण हुई कथा के दौरान कथा मंच में भगवान शिव एवं माता सती की सजीव झांकी का चित्रण किया गया इसके साथ ही एकल अभियान के छोटू महाराज द्वारा श्री हनुमान जी के रूप में उपस्थिति सभी श्रोताओं के लिये आकर्षण का केन्द्र रही।

