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प्रसिद्ध नृत्य नाटिका “राम की शक्ति पूजा” का मंचन आज रज़ा स्मृति – 2025 में कला, काव्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हो रहा आयोजन

मंडला – मशहूर चित्रकार सैयद हैदर रज़ा की स्मृति में रज़ा फाउण्डेशन नई दिल्ली द्वारा पांच दिवसीय रज़ा स्मृति – 2025 का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत कला, काव्य और सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे है। स्थानीय रज़ा कला वीथिका में मंडला व पाटनगढ़ के कलाकार गोंड चित्रकारी कर रहे है। नागपुर कॉलेज ऑफ आर्ट के छात्र अपनी कल्पना को कैनवास पर उकेर रहे है। इसके साथ ही स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में चित्रकारी करने पहुंच रहे है। सोमवार को झंकार भवन में काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इसमें देश के नामचीन कवियों द्वारा काव्य पाठ किया गया।

रज़ा स्मृति 2025 की सांस्कृतिक संध्या के तहत रानी दुर्गावती महाविद्यालय के सभागार में 22 जुलाई, मंगलवार की शाम 7:15 पर राम की शक्ति पूजा नृत्य नाटिका का मंचन किया जायेगा। राम की शक्ति पूजा महाकवि निराला की कविता है जिसमें राम रावण युद्ध का वर्णन है। इस लम्बी और संश्लिष्ट कविता पर प्रख्यात कवि व्योमेश शुक्ल ने नृत्य नाटिका तैयार की है। इस लम्बी कविता की प्रमुख पंक्तियाँ नाट्य नाटिका के लिए चुनने का काम व्योमेश की माँ श्रीमती शकुन्तला शुक्ल ने किया। यह बेहद प्रभावशाली नाटिका है जो दर्शकों को अचम्भे से भर देता है। इसमें राम  को जब अहसास होता है कि युद्ध में शक्ति रावण के साथ है तो उन्हें निश्चित हो जाता है कि उनकी हार ही होगी। वे शक्ति की आराधना कर उसे अपनी तरफ़ ले आते हैं।

रविवार की शाम रज़ा कला वीथिका में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नृत्य और संगीत के छात्र – छात्राओं द्वारा अपनी प्रस्तुति दी गई। इसमें जिले के वरिष्ठ संगीत शिक्षक जगदीश कछवाहा व कथक नृत्यांगना रानू चंद्रौल के शिष्यों द्वारा आकर्षक प्रस्तुति दी गई। बता दे कि ये वही छात्र थे जिन्होंने रज़ा फॉउण्डेशन द्वारा ग्रीष्मकालीन शिविर के दौरान नृत्य व संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी। इन बच्चों द्वारा की गई प्रतुतियों को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया। जगदीश कछवाहा के शिष्यों प्रथम प्रस्तुति सरस्वती वंदना की की गई। इसमें है शारदे मां हे शारदे मां की प्रस्तुति दी गई।

दूसरी प्रस्तुति राग यमन में आरोह अवरोह पकड़ के साथ सरगम गीत, तृतीय प्रस्तुति राग यमन में बन्दिश सदा शिव भजन निस दिन तान आलाप के साथ अंतिम प्रस्तुति राग भैरवी, किसी ये लड़ाई रे कन्हाई। इसके साथ ही तान आलाप के साथ प्रस्तुति, श्रवण अग्रवाल, नित्या सोनी, कृष्णा मरावी, अन्वी मूलचंदानी पंकज मरकाम द्वारा दी गई। हारमोनियम में श्रावण अग्रवाल और तबला में अंकित नामदेव ने सांगत किया। रानू चंद्रौल और आयुषी के शिष्यों द्वारा कथक तीन ताल में बेसिक व बच्चों द्वारा गुरु वंदना, पंडित बिरजू महाराज का तराना प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति देने वाले बच्चों में प्रियम हरदा, इशा बडोनिया, सौम्या खरे, आध्या बिलैया, अन्वेष शुक्ला शामिल थे। इस दौरान उन सभी प्रतिभागियों को मंच से सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया जिन्होंने रज़ा फॉउण्डेशन द्वारा ग्रीष्मकालीन शिविर में अपनी सेहबाहगीता दर्ज कराइ थी। इसके साथ ही छातों में आकर्षक चित्रकारी करने वाले स्थानीय कला प्रेमियों को छाते वितरित किये गए। रज़ा स्मृति 2025 के आयोजन में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद्, मण्डला, इनर वोइस सोसाइटी, नागपुर कॉलेज ऑफ आर्ट बतौर सहयोगी शामिल है।

 

रज़ा फाउंडेशन के सदस्य सचिव संजीव चौबे ने सभी कला प्रेमियों से रज़ा स्मृति के विभिन्न आयोजनों में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य व संगीत के शौकीनों से आर. डी. कॉलेज पहुंचकर भरतनाट्यम व ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति देखने की खास अपील की है।

 

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