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गोंड जनजाति की सांस्कृतिक, शौर्य परक, आध्यात्मिक निरंतर को दिखाती प्रस्तुतियां गोंड साम्राज्य के 52 में से 30 गढ़ों में आख्यान परक एवं ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित प्रस्तुतियों का जननायक समारोह विभाग द्वारा परिकल्पित नृत्य नाट्य की प्रस्तुतियों का मंचन प्रदेश के विभिन्न जिलों में

मंडला, 12 नवंबर 2025

भारत की संस्कृति को समझने और उसकी जड़ों की अनुभूति के लिए जनजातीय आख्यान एक प्रेरक माध्यम की तरह है, जो गोंड जनजातीय आख्यानों जिनसे गोंड समुदाय की जीवन परंपरा का सत्य देखा और समझा जा सकता है। उनकी प्रस्तुतियां हम उनके चरित्र नायकों राजा पेमल शाह, हीराखान सिंह में देख सकेंगे। इन आख्यानों की यह खूबसूरती है कि इनमें जहां जातीय शौर्य के उदाहरण हैं वही तंत्र-मंत्र और संबंधों की रक्षा के लिए अपने जीवन का उत्सर्ग भी है। यह सिर्फ कहानियां भर नहीं है। ऐसे सभी जातीय आख्यान गोंड समुदाय की सांस्कृतिक समझ और उसके पौराणिक चरित्र से हमें परिचित कराते हैं। जननायक समारोह का यह स्वरूप तीन नृत्य-नाटक प्रस्तुतियों से बुना गया है, जिनमें दो प्रस्तुतियां आख्यान परक है एवं एक प्रस्तुति ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। इन प्रस्तुतियों को इस तरह से परिकल्पित करने के पीछे गोंड जनजातीय की सांस्कृतिक, शौर्य परक, आध्यात्मिक निरंतर को भी इन प्रस्तुतियों में बताना लक्षित किया गया है। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के सहयोग से गोंड साम्राज्य के 52 गढ़ों में से पहले चरण में 30 गढ़ों में प्रस्तुतियों का तीन दिवसीय समारोह जननायक आयोजित किया जा रहा है। गतिविधि अंतर्गत 14 से 16 नवंबर 2025 तक विनोद मंच, बस स्टैंड बिछिया जिला मंडला, निसरद राज भवन, इनडोर स्टेडियम के पास मंडला एवं सीएम राईज स्कूल मैदान, सुकतरा (कुरई) सिवनी में संयोजित किया जा रहा है। गतिविधि में स्वतंत्र्य समर की अप्रतिम गोंड नायिका वीरांगना रानी दुर्गावती, राजा पेमलशाह एवं राजा हीराखान सिंह नृत्य नाट्य की प्रस्तुति दी जा रही है। विभाग की ओर से प्रस्तुतियों का निर्देशन एवं पुनर्संयोजन श्री रामचंद्र सिंह, श्री नवीन सिंह श्याम, श्री आशीष पटेल द्वारा कराया गया है।

 

वीरांगना रानी दुर्गावती नृत्य नाट्य

 

वीरांगना रानी दुर्गावती नृत्य नाट्य में बताया कि कालिंजर के राजा महाराज कीर्ति सिंह चंदेल की पुत्री दुर्गावती का विवाह गढ़ा के गोंड राजवंश के महाराज संग्राम सिंह के पुत्र दलपत शाह से हुआ। दलपत शाह और दुर्गावती दोनों ही अस्त्र-शस्त्र शिक्षा में पारंगत थे, साथ ही दोनों धार्मिक और जनहित के कार्यों में भी रुचि लेते थे। रानी को एक पुत्र पैदा हुआ जिसका नाम वीर नारायण रखा गया। पुत्र अभी छोटा ही था कि दलपत शाह का निधन हो गया। गद्दी पर वीर नारायण को बिठाया गया, लेकिन राजकाज रानी देखती रहीं। मुगल सम्राट अकबर दुर्गावती के सौंदर्य और बहादुरी के चर्चे सुन चुका था और गढ़ा राज्य को अपने अधीन करना चाहता था। इस हेतु उसने रानी को एक सोने का पिंजरा भिजवाया। रानी पिंजरा भेजने का आशय समझ गईं और उन्होंने जवाब में उतने ही वजन का सोने का पिंजरा भिजवाया, जिसे जुलाहे लोग काम में लाते हैं। अकबर पिंजरा देखकर आगबबूला हो गया और उसने अपने सूबेदार आसिफ खां को हमला करने के लिए हुक्म जारी कर दिया। पहले हमले में आसिफ खां ने शिकस्त खाई, लेकिन लगातार दूसरे हमले में रानी बहादुरी के साथ लड़ती हुई वीरगति को प्राप्त हो गईं। चौरागढ़ के किले में उनके किशोर वय के वीर पुत्र वीर नारायण भी लड़ते हुए शहीद हुए। किले के अंदर की सैकड़ों महिलाओं ने जौहर कर लिया। मातृभूमि की रक्षा करने के लिए महारानी दुर्गावती का बलिदान हमारे सामने एक ऐसा आदर्श उदाहरण है, जो हजारों वर्ष तक समस्त भारतवासियों को देश के लिए मर-मिटने की प्रेरणा देता रहेगा।

 

राजा हीराखान सिंह

 

कथा राजा हीराखान सिंह की है, जिन्होंने अपने बल और पराक्रम से सभी बड़े योद्धाओं को परास्त किया है। इनका वंश वृक्ष कुछ इस तरह का है- इजई के पुत्र हैं विजयी, उनके पुत्र हैं। ठाकुर देव, इनके पुत्र हैं श्रीदेव, श्रीदेव के पुत्र हैं पालोगढ़ लिंगों, इनके पुत्र हैं कारीकामा तथा इन्हीं कारीकामा के पुत्र हैं महान प्रतापी राजा हीराखान सिंह कारीकामा। एक दिन इनके पिता राजा कारीकामा, नेताम राजा तपेसिरिया के यहाँ सिंघोलागढ़ गये थे। कहते हैं कि वहीं उनका राजा तपेसिरिया से किसी बात पर विवाद हो गया। एक दिन कारीकामा अपनी तलवार सभी तथा रखकर वस्त्र उतार कर मैदान में नित्यकर्म के लिए गये ही थे कि राजा तपेसिरिया के सैनिक ने राजा का सिर काट दिया। कटे हुए सिर को राजा तपेसिरिया ने अपने महल के दरवाजे पर टांग दिया। राजा कारीकामा का घोड़ा जिसका नाम गिद्ध बाय बहेड़ा राई रोझिन था, युड़साल में बँधा था। राजा की हत्या उसके आँखों के सामने ही हुई थी। योड़ा सोचता है कि मैं अब खाली पीठ वापस कैसे जाऊँगा? किसी तरह अपना बन्धन तोड़ वह बाहर आ गया। देखता क्या है कि सामने ही राजा तपेसिरिया की पुत्री कम्मालहीरो सोने के पालने में झूल रही थीं। योड़ा राजकुमारी को अपने ओंठो से उठाकर अपने राज्य की तरफ भाग निकला। इधर पूरे नगर में हाहाकार मच गया, पर जब तक लोग सोचते, तब तक योड़ा उनकी पहुँच से दूर चला गया था। योड़ा आठ दिन नौ रात तक चलते-चलते कारीकामा के नगर पहुँच गया। उसी समय हीराखान सिंह का जन्म हो रहा है। योड़ा अपने साथ लायी राजकुमारी को हीराखान सिंह की माँ के सामने रख देता है। फिर घोड़ा रानी धम्माल पैलो से सब घटना विस्तार से सुना देता है। रानी राजा की मृत्यु से अत्यंत आहत हैं, पर घोड़ा कहता है कि रानी मेरा सवार तो शहीद हो गया, पर अब इस कन्या का पालन-पोषण आप करना। इसका विवाह अपने पुत्र हीराखान सिंह से करके ही राजा की हत्या का बदला पूरा होगा। रानी अपना दुःख भूलकर इन दोनों के विवाह की तैयारी करती हैं। दूर-दूर से सभी राजाओं, जींदारों को आमंत्रित किया जाता है। पूरे राज्य के लोग इस विवाह में सम्मिलित होते हैं, फिर बड़ी धूम-धाम से हीराखान सिंह तथा कन्या कम्मालहीरो की शादी हो जाती है। पर बचपन की शादी भी कैसी? एक ही माँ से दोनों दूध पीते थे। एक ही माँ से प्यार पाते थे। विवाह का अर्थ नहीं जानते हैं। धीरे-धीरे दोनों जवान होते हैं। वे यह भूल ही चुके हैं कि उनकी बचपन में शादी हुई थी। दोनों एक दूसरे से भाई-बहन सरीखा व्यवहार करते हैं। जब उनके संगी-साथियों की सगाई होती है या विवाह होता है तो वे सोचते हैं कि जवान तो वे भी हो गये हैं, पर उनकी शादी की बात क्यों नहीं हो रही है? रानी कम्मालहीरो सोचती हैं कि उसकी सभी सहेलियों की शादी हो रही है, सब अपना घर छोड़ ससुराल जा रही हैं, तरह-तरह से सज-सँवर रही हैं। कुछ के तो बच्चे भी हो गये हैं। मेरी शादी न जाने कब होगी? क्या मैं जीवन भर झूला ही झूलती रहूँगी? कुछ इसी तरह की सोच में रानी पड़ी थी कि बोड़राहिन उसके पास आई और पूछा कि रानी तुम किस बात की चिंता कर रही हो? तुमको कौन सी तकलीफ है? अपने मन की बात हमें बतलाओ। तब रानी ने कहा- बोड्रराहिन, हमारी सभी सरवी-सहेलियों की शादी हो गयी है, वे अपनी-अपनी ससुराल चली गयी हैं। सास-ससुर के घर में रहने लगी हैं। उनके एक-एक, दो-दो बच्चे भी हो गये हैं और एक हम हैं कि अभी तक झूला झूल रहे हैं। तब बोड्रराहिल कहती है कि रानी आप भी नादान हैं। लड़कियों की शादी जीवन में एक ही बार होती है, बार-बार नहीं। तब रानी ने पूछा कि बोड़राहिन हमारी शादी कब और किसके साथ हुयी है? हमको तो पता ही नहीं है; ऐसा सुनकर बोड्रराहिन जोर-जोर से हँसने लगी।

 

राजा पेमल शाह

 

राजा पेमलशाह गोंड राजाओं में प्रतापी राजा थे, क्योंकि ष्ब्रह्मा ने स्वयं उनका अवतरण किया था। ब्रह्मा ने संसार की रचना की और उन्होंने संसार को चलाने और उसका भरण पोषण करने के लिए ब्राह्मणों को बुलाया। ब्रह्मा ने ब्राह्मणों से कहा कि मैंने सृष्टि रचना कर दी है लेकिन उनका भरण पोषण करने का दायित्व आप को देना चाहता हूं, तो ब्राह्मणों ने मना कर दिया। उन्होंने पूजा पाठ करने की बात कही। फिर उन्होंने क्षत्रियों को बुलाया लेकिन क्षत्रियों ने भी मना कर दिया। फिर अंत में गोंड को बुलाकर कहा कि इस संसार के भरण पोषण का दायित्व तुम लोगों को संभालना है तो गोण्डों ने उसे स्वीकार कर लिया। कालांतर में गोण्ड समुदाय में अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने की होड़ मच जाती है और आपस में लड़ने-कटने लगते हैं। अब ब्रह्मा सोच में पड़ गए, फिर उन्होंने गोंड में से किसी एक को राजा बनाने के लिए सोचते हैं।  इसके लिए वे शरीर की मथानी बनाते हैं और देवताओं द्वारा मथने की प्रक्रिया करते हैं। अंत में सात कोरी देवताओं के मथने से गोण्ड निकल के आते हैं। ब्रम्हा कहते हैं कि जाओ बेटा तुमको राजा बनाता हूं। इसी घराने से राजा पेमलशाह होते हैं उनक् साथ चार भाई शंकर शाह, दलपत शाह, बुढ़न शाह, दूधन शाह होते हैं। राजा पेमलशाह के राज्य में प्रकृति के प्रकोप से उनके राज्य की बर्बादी हो जाती है, जहां भुखमरी आ जाती है। लेकिन पेमल शाह हार नहीं मानते हैं और खेती करते हैं और राज्य में खुशहाली आ जाती है। दिल्ली में बैठा रूम बादशाह को पेमल शाह की कर्मठता का पता चलता है और लह पेमल शाह के पास आता है। तब पेमलशाह को गढ़ मंडला और चौरा दादर को बचाने के लिए भेज देता है। पेमलशाह बूढ़ा एवं पैतृक देवता का आवाहन करते हैं और चौरा दादर एवं गढ़ मंडला को आबाद कर देते हैं।

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