मध्यप्रदेश के शांत, हरे-भरे मंडला जिले के जनजातीय गॉंव घुटास में हर सुबह एक परिचित कदमों की आहट सुनाई देती है। ये कदम हैं शाखा डाकपाल रागिनी राजपूत के जिनके आने भर से गाँव के लोगों के चेहरे पर विश्वास की मुस्कान खिल उठती है।

रागिनी सिर्फ डाक लेकर नहीं चलती बल्कि वो अपने कंधे पर पूरा गाँव, उसकी उम्मीदें, उसके अधिकार और उसके भविष्य का भार लेकर निकलती हैं। उनकी थैली में पत्रों के साथ-साथ योजनाओं की रोशनी, बेटियों का सुरक्षित भविष्य, बुजुर्गों की पेंशन और लोगों के अधिकारों की गारंटी भी होती है।
रागिनी जानती हैं कि घुटास जैसे दूरस्थ जनजातीय गाँव में डाकपाल सिर्फ एक पद नहीं यहाँ यह आशा का एकमात्र द्वार है, सरकारी योजनाओं की पहली सीढ़ी है और विश्वास की सबसे मजबूत कड़ी है।
हर दिन सुबह वह पगडंडियों पर चलती हुई जब घर-घर दस्तक देती हैं, तो लगता है जैसे पूरा गाँव उनसे जुड़ता चला जा रहा है। कभी वह सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए किसी छोटी बच्ची के भविष्य में उजाला भर देती हैं। कभी किसी बुजुर्ग का हाल-चाल पूछती हुई उन्हें यह एहसास दिलाती हैं कि वे अकेले नहीं हैं।

घुटास गाँव उनके लिए कार्यस्थल नहीं, बल्कि एक परिवार है — और यह परिवार उन पर पूरा भरोसा करता है। वह पेंशन राशि घर तक पहुँचाकर यह सुनिश्चित करती हैं कि उम्र की ढलान में किसी को भी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। घुटास का हर परिवार रागिनी को जानता है। वे लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में बताते हुए न केवल जानकारी देती हैं, बल्कि उन्हें यह भी समझाती हैं कि कैसे ये योजनाएँ उनके जीवन को बदल सकती हैं। चाहे डाक सेवा, बीमा योजनाएँ, बचत योजनाएँ हों या फिर न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ, रागिनी हर घर तक सही जानकारी पहुँचाकर लोगों के अधिकारों को मजबूत करती हैं। उनकी वजह से घुटास के जनजातीय परिवार अब समझते हैं कि सरकार की योजनाएँ उनके लिए ही बनी हैं और उन्हें पाने का रास्ता यहीं है।

