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स्कूल में दरारें, घरों में कंपन, कब जागेगा प्रशासन ? डोलामाइड खदानों में बेतहाशा ब्लास्टिंग से कर रहे अवैध खनन जांच के नाम पर खानापूर्ति  

मण्डला। नगर मुख्यालय से महज 20 किमी दूर बम्हनी क्षेत्र में डोलामाइड की दर्जनों खदान संचालित हैं। इन खदानो में बेताशा अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। बड़ी-बड़ी मशीनों से जमीन का सीना छलनी कर डोलामाइड निकाला जाता है। जो महानगरों की ओर भेजा रहा है ओवरलोड वाहनों ने सरकारी सडक़ो का दम निकाल दिया है तो दूसरी तरफ अवैध ब्लास्टिंग से पूरा काम चलता है। खदान की चट्टानों में बड़े-बड़े होलकर बड़ी ब्लास्टिंग की जाती है।  जिससे आसपास के गांव कंपन की चपेट में आ जाते हैं। बाहुबलि और पैसे की दम पर संचालित इन खदानों पर न तो कभी जांच टीम जाती है और न ही कभी इन खदानों का भौतिक सत्यापन होता है कागजों में सब सही चल रहा है लेकिन मौंका स्थल कुछ और बयान करता है। ऐसा ही एक मामला ककैया क्षेत्र की डोलामाइड खदान का सामने आया है। यहां पर होने वाली अवैध ब्लास्टिंग से पूरा क्षेत्र प्रभावित हो गया है और हालात इतने बिगड़ गए हैं कि इसी क्षेत्र के बीजेगांव स्थित माध्यमिक प्राथमिक शाला में अवैध ब्लास्टिंग का नजारा स्कूल में स्पष्ट दिखाई देता है। स्कूल में बड़ी-बड़ी दरारे आ गई हैं बच्चें  स्कूल में बैठने से डरते हैं। तो वहीं मास्टर भी घबरा रहे हैं लेकिन सुनवाई नही हो रही है। वीडियो फोटो और पीडि़तो के बयान इस ओर इशारा करते हैं कि अगर आपके पास अताह पैसा है तो आप इस जिले में कुछ भी कर सकते हैं।।

 

बीजेगांव में डोलोमाइड खदान की लगातार हो रही ब्लास्टिंग ने गांव की नींद, चैन और बच्चों का भविष्य तीनों छीन लिया हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि प्राथमिक और माध्यमिक शाला बीजेगांव की इमारतें अब खंडहर में तब्दील होती नजर आ रही हैं। दीवारों में चौड़ी दरारें, झड़ता प्लास्टर और हर धमाके के साथ कांपता भवन किसी फिल्मी दृश्य का हिस्सा नहीं बल्कि हकीकत है जहां दर्जनों मासूम बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। गांव के समीप संचालित डोलोमाइड खदान में रात्रि के समय भारी ब्लास्टिंग की जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक जैसे ही रात गहराती है अचानक तेज धमाके पूरे इलाके को दहला देते हैं। घरों की खिड़कियां हिलती हैं बर्तन लहराते हैं और दीवारों से मिट्टी झरने लगती है। कई बार तो लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आते हैं। छोटे बच्चे रोने लगते हैं और बुजुर्ग रात भर जागकर गुजारने को मजबूर हो जाते हैं। बीजेगांव का स्कूल अब बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षा केंद्र नहीं रहा, बल्कि संभावित हादसे का इंतजार करता ढांचा बन चुका है। कक्षाओं की दीवारों में इतनी गहरी दरारें हैं कि भीतर की ईंटें तक दिखाई देती हैं। छत का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ चुका है। ब्लास्टिंग के बाद कंपन इतना तेज महसूस होता है कि शिक्षक तक घबरा जाते हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूल के रसोईघर की है जहां मध्यान्ह भोजन तैयार किया जाता है। यह रसोई केंद्र पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारें झुकी हुई हैं छत में दरारें हैं और हर धमाके के साथ मलबा गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे में भोजन बनाना भी जोखिम भरा काम बन गया है।

 

सवाल यह है कि यदि किसी दिन रसोईघर की दीवार या छत गिर जाए तो जिम्मेदारी कौन लेगा, ब्लास्टिंग का असर सिर्फ स्कूल भवन तक सीमित नहीं है। बीजेगांव के कई पक्के और कच्चे मकानों में दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नए बने मकान भी सुरक्षित नहीं हैं। रात के समय कंपन इतना अधिक होता है कि लोगों को लगता है जैसे भूकंप आ गया हो। गांव के एक निवासी ने बताया कि पहले उनका घर बिल्कुल ठीक था लेकिन पिछले कुछ महीनों में दीवारों में कई जगह दरारें उभर आई हैं। उन्होंने कई बार खदान प्रबंधन और प्रशासन से शिकायत की लेकिन न तो कोई निरीक्षण हुआ और न ही मुआवजे की कोई चर्चा। ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को मौखिक और लिखित शिकायतें दी हैं। स्कूल भवन की स्थिति से अवगत कराया गया है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हर बार आश्वासन दिया जाता है कि जांच होगी लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। गांव के लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या बच्चों की जान की कीमत इतनी कम है कि दरारों से भरे भवन में पढ़ाई जारी रहे और अधिकारी फाइलों में व्यस्त रहें? इस मामले में जब खनिज विभाग से संपर्क किया गया तो संबंधित अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि नियमों के विरुद्ध ब्लास्टिंग पाई जाती है या गांव को नुकसान हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।

 

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह बयान पहले भी कई बार सुन चुके हैं। जांच की बात होती है लेकिन परिणाम कभी सामने नहीं आता। इस बीच दरारें बढ़ती जा रही हैं और डर गहराता जा रहा है। जब पत्रकार खदान क्षेत्र में स्थिति का जायजा लेने पहुंचे तो उन्हें कर्मचारियों द्वारा रोका गया। यहां पदस्थ कर्मचारी योगेश पटैल सहित अन्य लोगों ने अभ्रदता की। आरोप है कि पत्रकार को डराया-धमकाया गया  मारपीट की कोशिश की गई और मोबाइल तोडऩे का प्रयास किया गया। यहां तक कि गाली गलौज कर बंधक बनाने की कोशिश की गई। जिसकी सूचना पुलिस अधीक्षक को दी गई पुलिस अधीक्षक हस्ताक्षेप के बाद पत्रकार को खदान से जाने दिया गया इस पूरे मामले के प्रमाण बम्हनी थाना प्रभारी और मंडला थाना प्रभारी के पास भी हैं। क्योंकि खदान के कर्मचारियों से उक्त दोनो थाना प्रभारी ने बात की थी मामला काफी गंभीर है और इस बात को प्रमाणित करते हैं कि खदान में कुछ न कुछ गड़बड़ चल रहा है वहीं सवाल है कि इस अवैध ब्लास्टिंग की अनुमति किसने दी और यहां पर उपयोग होने वाले सहित अन्य उपकरण क्या वैध हैं और इस ब्लास्टिंग संबंधित अधिकारी विभाग कब-कब सत्यापन करता हैं वहीं सूत्रों का कहना है कि पूरा खेल पैसा का चल रहा है। और जिले की सत्ता और विकास पैसे वालों के हाथ में आकर सिमट गए हैं शायद यही कारण है कि जिले के सांसद विधायक और मंत्री सभी खमोश हो जाते हैं।

 

वही 18 फरवरी 2026 को एक पत्रकार खदान क्षेत्र में वस्तुस्थिति जानने की कोशिश को जायजा करने  पहुंचे तो उन्हें कर्मचारियों द्वारा रोका गया। एक पत्रकार को डराया-धमकाया गया, मारपीट की कोशिश की गई और मोबाइल तोडऩे का प्रयास किया गया। यहां तक कि गाली-गलौज कर बंधक बना लिया गया । एक पत्रकारो को खबर कवरेज से रोकना और डराना न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि कहीं न कहीं कुछ छिपाने की कोशिश हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान संचालक को खनिज अधिकारी का संरक्षण मिल रहा है, तभी उनके हौसले इतने बुलंद हैं।

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