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पत्रकार की शिकायत पर ककैया डोलोमाइट खदान के मैनेजर सहित कर्मचारियों पर हुई एफआईआर दर्ज .पत्रकार को खदान में बनाया था बंधक, मोबाईल भी तोडऩे का किया प्रयास,  लेकिन खनिज विभाग नही कर पाया सटीक जांच

                                        मण्डला। जिले भर में दर्जनों डोलोमाइट खदानों का संचालन हो रहा है। अधिकांश खदाने बम्हनी क्षेत्र में बताई जाती हैं इन खदानों से बड़ी मात्रा में डोलोमाइट निकाला जा रहा है। जहां पर भारी ब्लास्टिंग की जाती है। इस ब्लास्टिंग से आसपास के रहवासी परेशान हो गए हैं यहीं नही ओवरलोड वाहनों से सडक़ों के परखच्चें उड़ गए हैं। तो दूसरी तरफ इन खदानों की नियमित जांच भी नही की जा रही हैं। जबकि सूत्रों के अनुसार खदानों से स्वीकृत क्षमता से अधिक डोलामाईट निकाला जा चुका है। जिम्मेदारों की मिलीभगत और राजनैतिक संरक्षण के चलते खदान संचालक मनमर्जी से खनन कर रहे हैं। ऐसी ही एक खदान की शिकायत पत्रकार के हाथ लगी और जब पत्रकार जांच पड़ताल करने पहुंचा तो उसे फंसाने के प्रयास किए गए और गुंडागर्दी का आतंक दिखाते हुए पत्रकार को बंधक बनाने से भी नही चुके यह पूरा खेल खदान संचालक की सह पर कर्मचारियों के द्वारा किया गया।


अभद्रता ही नही, बल्कि मोबाईल तोडने का भी किया प्रयास
ककैया डोलोमाईट माईन्स में पत्रकार के साथ किए गए अभद्र व्यवहार और बंधक बनाने पर खदान के योगेशराज पटेल सहित अन्य कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। बम्हनी थाना के अंतर्गत ककैया डोलेमाईट माईन्स में बीते माह पत्रकार रामकुमार बघेल (रोहित) के साथ समाचार कवरेज के दौरान खदान के कर्मचारियों ने अभद्रता ही नही कि बल्कि मोबाईल कैमरा तोडने का प्रयास करते हुए बंधक बनाने कोशिश की थी जिसकी सूचना पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा को दी गई जहां से हस्ताक्षेप के बाद बम्हनी थाना प्रभारी और मंडला थाना प्रभारी सक्रिय हुए तब कहीं जाकर पत्रकार को खदान से बाहर आने मिला। इस घटना से पत्रकार जगत में रोष था और पत्रकारों का एक दल पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करने पहुंचा जहां पर पुलिस अधीक्षक को अनेक प्रमाण प्रस्तुत किए गए। पुलिस अधीक्षक के दिशा-निर्देश और जांच पड़ताल के बाद बम्हनी थाना में संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
खदान के कर्मचारियों ने घेर लिया था पत्रकार को
पत्रकार रामकुमार बघेल(रोहित)ने बताया कि जब वे खदान क्षेत्र में पहुंचे तो वहां ट्रकों में पत्थर लोड किए जा रहे थे। उन्होंने खदान में हो रही गतिविधियों का वीडियो और फोटो बनाना शुरू किया ताकि खबर के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सके। लेकिन जैसे ही खदान में मौजूद कर्मचारियों को इसका पता चला, वे भडक़ उठे। आरोप है कि खदान के मैनेजर योगेशराज पटेल और अन्य कर्मचारियों ने पत्रकार को घेर लिया और उसके साथ अभद्रता शुरू कर दी। कैमरा और मोबाइल छीना, वीडियो डिलीट पत्रकार के कथन के अनुसार, कर्मचारियों ने पहले उनका मोबाइल और कैमरा छीन लिया और जबरन उसमें मौजूद फोटो व वीडियो डिलीट कर दिए। एक कर्मचारी ने मोबाइल फोन को तोडऩे की भी कोशिश की। इतना ही नहीं, पत्रकार की पहचान के लिए रखी गई प्रेस आईडी भी तोड़ दी गई। इस दौरान पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की और झूमाझटकी भी की गई।
जांच के बाद दर्ज हुआ मामला
घटना के बाद पत्रकार ने पूरे मामले की लिखित शिकायत बम्हनी थाना में दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और पीडि़त पत्रकार के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने खदान के मैनेजर योगेशराज पटेल और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 130, 127(2), 324(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खनिज विभाग ने नही की सटीक जांच
जानकारी के अनुसार मंडला निवासी रामकुमार उर्फ रोहित बघेल जो विस्तार न्यूज चैनल में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं, 18 फरवरी 2026 को ग्राम पंचायत बीजेगांव स्थित प्राथमिक शाला क्षेत्र में खबर कवरेज के लिए पहुंचे थे। गांव के आसपास संचालित डोलोमाइट खदान में हो रही ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से भय और असंतोष की स्थिति बनी हुई है। अवैध खनन और अवैध ब्लास्टिंग की सूचना खनिज विभाग को दी गई थी जहां से जांच टीम खदान को पहुंची लेकिन सटीक जांच नही कर पाई कारण क्या था क्यों नही किया यह भी चर्चा का विषय बना है। जानकारों का कहना है कि खनिज विभाग में अपनो को बचाने का प्रयास अकसर दिखाई देता है गरीब कमजोर और बेरोजगारों के ट्रेक्टर आदि पकडक़र उन पर भारी भरकम जुर्माना कर दिया जाता है लेकिन धन्ना सेठ और जी हजूरी करने वाले ठेकेदारों पर कभी कार्यवाही नही होती है। शायद पैसे की ताकत या राजनैतिक पहुंच मसला जो भी हो लेकिन खदानों की जांच होनी ही चाहिए।


ग्रामीणों में पहले से था आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खदान में हो रही ब्लास्टिंग से गांव का माहौल लंबे समय से प्रभावित हो रहा है। कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग इतनी तेज होती है कि घरों की दीवारें तक हिल जाती हैं। कई मकानों में दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में लोग हमेशा भय के माहौल में जी रहे हैं। कई मकानों की दीवारें कमजोर हो चुकी हैं और लोग हर धमाके के साथ डर के साए में जी रहे हैं। वहीं स्कूल में पढऩे वाले छोटे-छोटे बच्चे भी ब्लास्टिंग की आवाज से घबराकर सहम जाते हैं। इन्हीं शिकायतों और ग्रामीणों की परेशानी की सच्चाई सामने लाने के उद्देश्य से पत्रकार रोहित बघेल खदान क्षेत्र में पहुंचे थे।
पत्रकारों में भी दिखी नाराजगी
इस घटना के सामने आने के बाद जिले के पत्रकारों में भी नाराजगी देखी गई। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि पत्रकारों को ही खबर कवरेज के दौरान धमकाया जाएगा या उनके साथ अभद्रता की जाएगी तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पत्रकारों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला हैं बल्कि आम जनता की आवाज दबाने का प्रयास भी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पत्रकारों के साथ इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। मीडिया समाज का वह आईना है जो जनता की समस्याओं को सामने लाता है। यदि पत्रकारों को ही दबाने की कोशिश होगी तो लोकतंत्र की नींव कमजोर पड़ सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संस्था पत्रकारों के साथ अभद्रता करने की हिम्मत न कर सके।
एसपी की कार्रवाई से बढ़ा भरोसा
मंडला एसपी रजत सकलेचा जैसे निष्पक्ष और संवेदनशील पुलिस अधिकारी को जितना धन्यवाद दिया जाए उतना कम है। मंडला जिले में वे हमेशा से निष्पक्ष जांच, सख्त कार्रवाई और पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए पहचाने जाते रहे हैं। पत्रकार के साथ हुई अभद्रता के मामले में जिस तत्परता और सख्ती के साथ उन्होंने कार्रवाई करवाई, उससे जिले के पत्रकारों का पुलिस प्रशासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है। यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि मंडला जिले में कानून से ऊपर कोई नहीं है। चाहे कोई भी हो, यदि वह किसी पत्रकार, पीडि़त या आम नागरिक के साथ अन्याय करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस अधीक्षक की इस निष्पक्ष और साहसिक कार्रवाई ने न सिर्फ एक पत्रकार को न्याय दिलाया है बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय और आम जनता के मन में विश्वास जगाया है।

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