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अब बैसाखी नहीं, मोटराइज्ड साइकिल बनी वंदना का सहारा

मंडला, 16 मार्च 2026

दिव्यांगता कभी भी इंसान के हौसलों को नहीं रोक सकती, यदि उसे सही समय पर शासन की योजनाओं का साथ मिल जाए। जिले के ग्राम घुघरी की निवासी श्रीमती वंदना धुर्वे की कहानी कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक है।

37 वर्षीय वंदना धुर्वे ने बताया कि मैं 80 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांग हैं। दिव्यांगता के कारण उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण था। मुझे घर से बाहर कहीं भी आने-जाने के लिए पूरी तरह से बैसाखी पर निर्भर रहना पड़ता था। वंदना बताती हैं कि बैसाखी के सहारे चलना न केवल थका देने वाला था, बल्कि किसी भी काम के लिए उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों का सहारा लेना पड़ता था। इस स्थिति ने उनके आर्थिक और सामाजिक जीवन को सीमित कर दिया था।

वंदना के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई जब उन्हें सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की श्एलिपको की एडिप योजनाश् के बारे में पता चला। जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र, मण्डला के माध्यम से उन्हें 3 दिसंबर 2025  के अवसर पर मोटराइज्ड साइकिल प्रदान की गई।

पहले बैसाखी की वजह से चलना बहुत मुश्किल था। अब मोटराइज्ड साइकिल मिलने से मुझे किसी का सहारा नहीं लेना पड़ता। अब मैं कहीं भी आ-जा सकती हूँ और अपने परिवार के लिए जीविका अर्जित करने में सक्षम हूँ।

वंदना धुर्वे कहती है कि आज अपने कार्यों के लिए स्वयं सक्षम हैं। शासन की इस योजना ने न केवल उनकी शारीरिक बाधा को दूर किया है, बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास भी जगाया है। अब वे गर्व के साथ अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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