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3000 से अधिक नर्मदा भक्तों ने की एक साथ उत्तरवाहिनी परिक्रमा

छोटे बच्चे एवं बुजुर्ग भी रहे बड़ी संख्या में शामिल
मध्यप्रदेश के अलावा दूसरे प्रांतों से भी आये नर्मदा भक्त
मण्डला। मण्डला नगर की महिष्मती नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा अब देश और विदेश में मण्डला की पहचान बनती जा रही है। नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा करने के लिये आने वाले नर्मदा भक्तों की संख्या में प्रतिवर्ष इजाफा हो रहा है चैत्र माह में प्रत्येक वर्ष उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा का आयोजन होता है मण्डला में माँ नर्मदा लगभग 21 किलोमीटर उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित हुई हैं यही वह क्षेत्र है जिसकी परिक्रमा चैत्र मास में की जाती है इस परिक्रमा को करने न केवल जिले के एवं अन्य जिलों के श्रद्धालु भी मण्डला आते हैं अब तो अन्य प्रदेशों के एवं विदेशों से भी नर्मदा भक्तों के आने का क्रम प्रारंभ हो गया है।

28 एवं 29 को हुआ सामूहिक परिक्रमा का आयोजन
चैत्र माह में यूं तो पूरे माह भर श्रद्धालु माँ नर्मदा की परिक्रमा करते हैं लेकिन इस बीच एक आयोजन ऐसा भी होता है जिसमें बड़ी संख्या में नर्मदा भक्त एक साथ उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा में चलते हैं यह आयोजन माँ महिष्मती नर्मदा उत्तरवाहिनी परिक्रमा आयोजन समिति द्वारा आयोजित किया जाता है। पहले के वर्षो में 02 सामूहिक परिक्रमा का आयोजन किया जाता रहा है लेकिन इस वर्ष सामूहिक परिक्रमा का आयोजन एक ही हुआ है इसके पीछे कारण यह था कि चैत्र माह में रोजाना कभी 100, कभी  50, कभी 30, कभी 150 की संख्या में श्रद्धालुओं परिक्रमा करते रहे हैं ऐसे में आयोजन समिति द्वारा 02 बड़े सामूहिक परिक्रमा का आयोजन कर पाना संभव नहीं था लिहाजा सामूहिक परिक्रमा का एक ही आयोजन हुआ और यह परिक्रमा 28 मार्च को सुबह 06 बजे प्रारंभ हुई जो कि कल 29 मार्च को शाम के समय संपन्न हुई।

हजाराें भक्त हुये शामिल
28 मार्च दिन शनिवार को जब व्यास नारायण मंदिर में संकल्प पूजा के साथ परिक्रमा प्रारंभ हुई तो परिक्रमावासियों का हुजुम देखते ही बन रहा था परिक्रमा के पूर्व परिक्रमावासियों द्वारा आयोजन समिति के समक्ष पंजीयन कराया गया था यह पंजीयन 1836 नर्मदा भक्तों ने उत्तरवाहिनी परिक्रमा के लिये कराया था लेकिन जब व्यास नारायण मंदिर में संकल्प पूजा के लिये नर्मदा भक्तों का आना प्रारंभ हुआ तो देखते ही देखते ही यह संख्या 3000 से ऊपर जा पहुंची बहुत से नर्मदा भक्त बिना पंजीयन के ही इस यात्रा में शामिल हुये इसके अलावा बहुत से नर्मदा भक्त ऐसे भी थे जिन्होंने सुबह 08 बजे के बाद अपनी परिक्रमा प्रारंभ की इन लोगों का पहले परिक्रमा करने का कोई भी मन या निर्णय नहीं था लेकिन अन्य भक्तों को देखते हुये और सोशल मीडिया में जिस तरह की तस्वीरें एवं वीडियों वायरल हुये उन्हें देखकर लोग भी अपने घरों से परिक्रमा के लिये निकल पड़े। व्यास नारायण मंदिर में संकल्प पूजा के बाद परिक्रमा नर्मदा तट पहुंची और माँ नर्मदा की पूजा अर्चना के बाद परिक्रमा तट पार कर महाराजपुर संगम की ओर रवाना हुई।

तट पार करने का जो सिलसिला सुबह 06 बजे से प्रारंभ हुआ वह लगभग 10 बजे तक जारी रहा। संगम घाट में लगभग 09 की संख्या में नाव उपलब्ध थी जिनमें 10 से 12 यात्री ही तट पार कर पा रहे थे लिहाजा समय काफी लगा बहुत से परिक्रमावासी पैदल ही झूला पुल पार कर बंजर पुरवा पुल के रास्ते संगम पहुंचे जहां से परिक्रमा चौधरी वाड़ा होते हुये ज्वालाजी मंदिर पहुंची ज्वालाजी मंदिर परिसर में कायस्थ समाज के द्वारा परिक्रमावासियों के लिये बाल भोग व्यवस्था की गई थी यहां नर्मदा भक्तों ने थोड़ा विश्राम किया और गरमा गरम पोहा जलेबी एवं चाय का आनंद लिया यहां से परिक्रमावासी मंगलेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करते हुये धनीराम दादाजी के आश्रम पहुंचे और दादा धनीराम के दर्शन पश्चात बहुत से नर्मदा भक्तों ने राधाराज आश्रम में भी बाल भोग आनंद उठाया यहां से कुछ नर्मदा भक्त कारीकोन तिराहा होते हुये आगे मानादेई के लिये रवाना हुये तो कुछ नर्मदा भक्त राधाराज आश्रम से ही पीछे की ओर चलते हुये कच्चे रास्ते माँ नर्मदा के किनारे-किनारे मानादेई पहुंचे इस दौरान लगातार रास्ते में श्ाीतल पेयजल एवं शीतल पेय नर्मदा भक्तों द्वारा परिक्रमावासियों काे उपलब्ध कराया जाता रहा मानादेई के बाद घुंघुरू वाले आश्रम में शानदार पुदीने का शरबत परिक्रमावासियों को भेंट किया गया जिससे धूप में चलकर आते हुये परिक्रमावासियों को शीतलता प्राप्त हुई यहां वृक्षों के नीचे बड़ी संख्या में नर्मदा भक्तों ने विश्राम किया और फिर इस स्थान से परिक्रमा के आगे के लिये प्रस्थान हुई।
ग्राम सिलपुरा में हुआ दोहपर का भोजन
इस सामूहिक परिक्रमा में शामिल नर्मदा भक्तों के लिये दोहपर के भोजन का आयोजन सिलपुरा में इस बार 02 स्थानों में किया गया था एक आयोजन कोठीघाट आश्रम में भक्तों के िलये भोजन की व्यवस्था थी तो दूसरा हायर सेकेण्डरी परिसर सिलपुरा में भोजन नर्मदा भक्तों लिये आयोजित था दोनों स्थानों में बंटकर परिक्रमावासियों ने भोजन किया और यहां पर थोड़ा विश्राम किया। इसके बाद परिक्रमावासी ग्राम घाघा के लिये रवाना हुये लगभग 8 किलोमीटर की यह यात्रा सभी परिक्रमावासियों के लिये काफी चुनौतिपूर्ण होती है लेकिन उनकी इस चुनौति को माँ नर्मदा की कृपा आसान यूं कर देती है कि नर्मदा भक्त इस दौरान परिक्रमावासियों के लिये विभिन्न तरह की सेवा रास्ते-रास्ते करते रहते हैं जैसे कोई शीतल जल ही पिला रहा होता है तो कोई ठण्डी लस्सी, तो कोई छांछ और कोई फल एवं ककड़ी लेकर खड़ा रहता है उनके सहारे नर्मदा परिक्रमावासी चलते-चलते घाघा पहुंंचे जहां पर शाम की नर्मदा की महाआरती का शानदार संगीतमय आयोजन हुआ और रात्रि विश्राम घाघा में हुआ।

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