(संयुक्त संचालक घनश्याम सोनी ने बिछिया में शिक्षकों की बैठक लेकर दिए आवश्यक निर्देश)
संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, जबलपुर संभाग, श्री घनश्याम सोनी द्वारा मंडला जिले के शासकीय सांदीपनि विद्यालय, बिछिया में विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों की बैठक आयोजित कर विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। बैठक में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विद्यालय परिसर की स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, जल संरक्षण तथा विद्यालय के समग्र विकास से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
संयुक्त संचालक श्री सोनी ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विद्यालयों को उत्कृष्ट एवं आदर्श शैक्षणिक संस्थाओं के रूप में विकसित करने के लिए प्राचार्य एवं शिक्षक पूर्ण समर्पण, अनुशासन एवं टीम भावना के साथ कार्य करें।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता
श्री सोनी ने निर्देशित किया कि विद्यालय में नियमित एवं प्रभावी अध्यापन सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति का सतत मूल्यांकन करते हुए जिन विद्यार्थियों को किसी विषय में कठिनाई हो रही है, उनके लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त अभ्यास एवं विशेष शिक्षण की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्य केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करने तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों में विषय की समझ, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, डिजिटल माध्यमों एवं अन्य शिक्षण सामग्री का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति एवं अनुशासन पर जोर
संयुक्त संचालक ने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को शैक्षणिक गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के कारणों की जानकारी प्राप्त कर आवश्यक प्रयास किए जाएं। विद्यालय में अनुशासित एवं सकारात्मक वातावरण निर्मित किया जाए तथा विद्यार्थियों में समयबद्धता, स्वच्छता, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जाए।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं एवं क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए, ताकि कोई भी विद्यार्थी सीखने की प्रक्रिया में पीछे न रहे।
स्वच्छ एवं सुरक्षित विद्यालय परिसर आवश्यक
श्री सोनी ने विद्यालय परिसर की स्वच्छता पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि कक्षाओं, कार्यालय, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल स्थल एवं परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। विद्यालय का वातावरण स्वच्छ, सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं विद्यार्थियों के अनुकूल होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ विद्यालय विद्यार्थियों में स्वस्थ आदतों एवं सकारात्मक सोच के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें।
वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देने के निर्देश
संयुक्त संचालक ने विद्यालय में वर्षा जल संचयन (वाटर हार्वेस्टिंग) की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय परिसर की परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्था विकसित की जाए।
व्यावसायिक प्रयोगशाला का अवलोकन किया तथा इसके नियमित उपयोग हेतु निर्देश दिए |
उन्होंने विद्यार्थियों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराने तथा विद्यालय में जल के विवेकपूर्ण उपयोग की आदत विकसित करने के निर्देश दिए। विद्यालय परिसर में अनावश्यक जल अपव्यय रोकने, जल स्रोतों के रखरखाव तथा वर्षा जल के संरक्षण के लिए जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो
श्री सोनी ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों में उपलब्ध अधोसंरचना एवं शैक्षणिक संसाधनों का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। विद्यालय में उपलब्ध प्रत्येक सुविधा का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अनुभव प्रदान करना है। प्राचार्य एवं शिक्षक आपसी समन्वय के साथ विद्यालय की व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार के लिए प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यक्तित्व, संस्कार, अनुशासन एवं सर्वांगीण विकास का केंद्र है। अतः सभी शिक्षक अपनी भूमिका को जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ निभाते हुए विद्यालय को उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्था के रूप में विकसित करने में सक्रिय योगदान दें।
बैठक के दौरान विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपस्थिति, स्वच्छता, पेयजल, जल संरक्षण, अधोसंरचना एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
इस दौरान संभागीय व्यावसायिक समन्वयक मनोज काशिव ,संस्था प्राचार्य सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी
