जिले में अब तक 798.9 मिमी. औसत वर्षा दर्ज
मण्डला 12 सितम्बर 2021
जिले में इस वर्ष एक जून से 12 सितम्बर के दौरान 798.9 मिमी. औसत वर्षा दर्ज की गई है जबकि इसी अवधि तक गत वर्ष 1273.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई थी। इस प्रकार गत् वर्ष की तुलना में इस वर्ष 474.5 मिलीमीटर कम वर्षा दर्ज की गई है। अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार 12 सितम्बर को मंडला में 1.4, नैनपुर में 4.2, बिछिया में 5.5 एवं घुघरी में 21.1 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई। इस प्रकार जिले में 12 सितम्बर को 5.3 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई।
आर्थिक सहायता स्वीकृत
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक निशा मरकाम निवासी ग्राम पटपरा की सर्पदंश से मृत्यु होने के कारण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मंडला द्वारा मृतक के निकटतम वारसान को कुल 4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। मृतक के निकटतम वारसान आवेदक लक्ष्मी बाई को कुल 4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह राशि संबंधित के बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
13 से 23 सितंबर 2021 तक चलेगा राष्ट्रीय कृमी मुक्ति अभियान
1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को खिलाई जाएगी कृमिनाशक दवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीनाथ सिंह ने जन समुदाय को जानकारी देते हुए अपील की है कि जिले में 13 से 23 सितंबर 2021 तक राष्ट्रीय कृमी मुक्ति अभियान स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग एवं महिला बाल विकास, विभाग के माध्यम से संचालित होना है, जिसमें 1 से 19 वर्ष के बच्चे एवं किशोर किशोरियों को कीड़े मारने की दवाई एल्बेंडाजोल खिलाई जायेगी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु उपरोक्त विभागों के साथ समन्वय किया गया एवं वर्चुवल मीटिंग करके इस अभियान में होने वाली गतिविधि की जानकारी दी गई है एवं विभागों का इस अभियान में कौन-कौन से उत्तरदायित्व है, विस्तार से जानकारी दी जा चुकी है जिला स्तर एवं विकासखंड स्तर तथा ग्राम स्तर तक के अधिकारी कर्मचारियों को अभियान के दौरान होने वाली गतिविधि की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी जा चुकी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जन समुदाय से अपील की है कि अपने 1 वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों एवं किशोर किशोरियों को कृमिनाशक की दवाई एल्बेंडाजोल जरूर खिलाएं।
डॉ. वाई.के. झारिया जिला टीकाकरण अधिकारी ने कृमि मुक्ति के लिए क्रियान्वयन रणनीति बताया एवं एल्बेंडाजोल गोली 1 वर्ष में दो बार बच्चों एवं किशोरियों को खिलाई जाती है दवाइयों का सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं बच्चों एवं किशोर मैं मानसिक विकास शारीरिक विकास एवं बौद्धिक विकास होता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का आयोजन समुदाय आधारित रणनीति के अंतर्गत 13 से 23 सितंबर तक किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास के समस्त मैदानी कार्यकर्ता के द्वारा समुदाय में घर-घर जाकर 1 से 19 वर्ष के समस्त हितग्राहियों को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जायेगी। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है शिक्षकों के सहयोग से उपलब्ध समस्त हितग्राहियों को एल्बेंडाजोल की गोली का सेवन कराया जाएगा। 13 से 23 सितंबर 2021 तक जिन गांव या वार्डों में पूर्व निर्धारित व्हीएचएनडी दिवसों के आधार पर मैदानी कार्यकर्ता कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कृमि की दवाई अपनी निगरानी में खिलाई जायेगी।
’’किसे कितनी दवाइयों की खुराक’’
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वाई.के. झारिया ने बताया कि 1 से 2 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल 400 मिलीग्राम गोली पीसकर पीने के साफ पानी के साथ दी जाएगी। 2 से 3 वर्ष एल्बेंडाजोल 400 मिलीग्राम की पूरी गोली पीसकर पीने के साफ पानी के साथ। इसी तरह 3 से 19 वर्ष एल्बेंडाजोल 400 मिलीग्राम की पूरी गोली चबाकर पीने के साफ पानी के साथ दी जाएगी। समाचार
मलेरिया, डेंगू एवं चिकुनगुनिया से बचाव के लिए रखें सावधानियाँ
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि वर्षाकाल में मच्छरों की उत्पत्ति बढ़ जाती है एवं मच्छरजन्य परिस्थितियाँ निर्मित होती हैं। मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया के प्रसार की भी संभावना होती है। इसलिए मलेरिया, डेंगू एवं चिकुनगुनिया से बचाव हेतु आवश्यक सावधानियाँ रखी जानी अत्यंत आवश्यक है। मलेरिया के लक्षण में कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। कपकपी के साथ तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी होना, बेचैनी, कमजोरी, सुस्ती, रुक-रुक्कर बुखार आना पसीना आकर बुखार उतरना, ठंड गर्मी या तपन का महसूस होना आदि मलेरिया के लक्षण हैं। बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में खून की जांच कराऐं एवं मलेरिया की पुष्टि होने पर पूर्ण उपचार लें। खाली पेट दवा का सेवन कदापि नहीं करना चाहिये। मलेरिया की जांच व उपचार सभी शासकीय अस्पतालों पर निःशुल्क उपलब्ध है।
डेंगू मलेरिया फैलाने वाले मच्छर जहां पैदा होते हैं जैसे- छत पर खुली टंकियां, खाली बर्तन, मटके, गमले, टायर, कूलर, फ्रिज के पीछे भरा पानी, गार्डन, फूलदान, पात्रों में एक सप्ताह से अधिक भरे साफ पानी में मच्छर अंडे देते हैं जिससे लार्वा एवं पूर्ण वयस्क मच्छर बनता है। डेंगू के लक्षण 2-7 दिन तक बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द जोड़ों में दर्द, आंख के पीछे दर्द, खसरा जैसे लाल चकत्ते छाती एवं हाथों पर डेंगू के लक्षण हैं। डेंगू के उपचार के लिए डेंगू की पुष्टि होने पर चिकित्सक के परामर्श अनुसार पूर्ण उपचार लेना चाहिए। रोगी को पर्याप्त मात्रा में पेय पदार्थ जैसे- फलों का रस, पानी, ओ.आर.एस लेना चाहिए एवं आराम करना चाहिए। किसी भी दर्द निवारक गोली का सेवन नहीं करना चाहिए। मच्छरों की उत्पत्ति को रोकने हेतु भरे हुए पानी को हर 3-4 दिन में बदलना चाहिए।
पानी संग्रहण करने वाली टंकी, बाल्टी एवं अन्य, पानी से भरे हुए बर्तन को ढक्कर रखना चाहिए। वॉशबेसिन, बाथरुम में पानी निकासी के स्थान में मच्छररोधी जाली लगवाना चाहिए एवं मच्छर की उत्पत्ति स्थल पर मिट्टी का तेल या जला हुआ ऑइल डालना चाहिए। यह आवश्यक है कि घरों के आस-पास सफाई रखें, अनावश्यक पानी जमा न होने दें। सोने के लिए हम मच्छरदानी का उपयोग करें, घरों में मच्छर निरोधक जालियों, मच्छर निरोधी क्रीम, कॉइल का उपयोग करें। अपने घरों में मच्छर निरोधक पौधे जैसे- लेमन ग्रास, लहसुन, लेवेंडर, गेंदा, तुलसी, सिट्रोनेला इत्यादि लगायें।
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आकाशीय बिजली से बचाव के लिए एडवाईजरी
बरसात के दिनों में आकाशीय बिजली अक्सर जानलेवा साबित होती है। खेतों में काम करने वाले, पेड़ों के नीचे पनाह लेने वाले, तालाब में नहाते समय बिजली चमकने पर इसकी आगोश में आने की संभावना अधिक रहती है। आकाशीय बिजली से बचाव के कुछ उपाय ऐसे हैं जिससे बचा जा सकता है। राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा लोगों को सतर्क रहने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया गया है।
आकाशीय बिजली कड़कने पर यदि घर के भीतर हों तो बिजली से संचालित उपकरणों से दूर रहें, तार वाले टेलीफोन का उपयोग नहीं करना चाहिए। खिड़कियां व दरवाजे बंद कर दें, बरामदे और छत से दूर रहें। इसके अलावा ऐसी वस्तुएं जो बिजली के सुचालक हैं उनसे भी दूर रहना चाहिए। धातु से बने पाइप, नल, फव्वारा, वाश बेसिन आदि के संपर्क से दूर रहना चाहिए।
इसी तरह जब आप घर के बाहर हैं तब वृक्ष जो बिजली को आकर्षित करते हैं। बिजली चमकते समय वृक्ष के नीचे न खड़े रहें, ऊंची इमारतों वाले क्षेत्र में आश्रय न लें, समूह में खड़े होने के बजाय अलग-अलग हो जाएं। किसी मकान में आश्रय लेना बेहतर है। सफर के दौरान अपने वाहन में ही रहें। मजबूत छत वाले वाहन में रहें, खुली छत वाले वाहन की सवारी न करें, बाहर रहने पर धातु से बने वस्तुओं का उपयोग न करें। बाइक, बिजली या टेलीफोन का खंभा तार की बाड़ और मशीन आदि से दूर रहें। तालाब और जलाशयों से दूर रहें यदि आप पानी के भीतर हैं, अथवा किसी नाव में हैं तो तुरंत बाहर आ जाएं। सिर के बाल खड़े हो जाएं तो समझिए बिजली गिरेगी। यदि आकाशीय बिजली चमक रही है और आपके सिर के बाल खड़े हो जाएं व त्वचा में झुनझुनी होने लगे तो फौरन नीचे झुककर कान बंद कर लें। क्योंकि यह इस बात का सूचक है कि आपके आस-पास बिजली गिरने वाली है।
आकाशीय बिजली गिरने पर क्या करें-
बिजली का झटका लगने पर जरूरत के अनुसार व्यक्ति को सीपीआर, कार्डियो पल्मोनरी रेसिटेंशन यानि कृत्रिम सांस देनी चाहिए। तत्काल प्राथमिक चिकित्सा देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
बरसात में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचने एडवाईजरी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीनाथ सिंह ने एडवाईजरी में कहा है कि बरसात में अक्सर दस्त, उल्टी, बुखार, आव, पेट दर्द, पेचिस, पीलिया, टाइफाइड, डायरिया जैसी बीमारियाँ होती हैं। बीमारियों से सावधान रहें, बीमार न हों इसके उपाय करें एवं स्वस्थ रहें। उन्होंने बताया कि उल्टी, दस्त, पेचिस, आव, संक्रामक बीमारी से बचने के लिए ताजा भोजन का सेवन करें। शुद्ध पानी पिंए (उबला पानी, आरो का पानी, फिल्टर, हैण्डपम्प का पानी छानकर पिएं) कुएं, नदी, नाला का पानी न पिएं, पानी क्लोरीनेशन करके ही पानी पिएं, सड़ी-गली सब्जी, फल, बासी खाना न खाएं, मांस का बरसात के दिनों में सेवन न करंे। व्यक्तिगत स्वच्छता रखें, खाने के चीजों को छूने से पहले साबुन से अच्छी तरह हाथ धोंएं, संक्रमित चीजों को छूने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोऐं, भोजन खाने के पहले या शौच के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोंऐं, स्वच्छ शौचालय का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि उपचार के लिए डॉक्टर के परामर्श से उल्टी, दस्त के लिए टेबलेट फ्युराजोलाडिन, मेट्रोजिन डायक्लोमिन, मेट्रोक्लोरापामाइड, जिंक, ओ.आर.एस. का घोल, खीरा, दही, सिकंजी, चावल का पानी (माड) तथा तरल पदार्थ अधिक मात्रा में सेवन करें। इसी प्रकार दस्त से संबंधित संक्रामक बीमारी होने पर नजदीकी अस्पताल जायें, ग्राम स्तर में आशा कार्यकर्ता डीपो होल्डर के माध्यम से जीवन रक्षक दवाइयां प्राप्त करें।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीनाथ सिंह ने जनसमुदाय को एडवाइजरी में कहा है कि बरसात के दिनों में वेक्टर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फायलेरिया (हाथी पांव) जैसे गंभीर बीमारी होती हैं। गंदा पानी, नाली, गड्ढों में पानी एकत्रित होने से मच्छर के लार्वा से अण्डें पनपते हैं। मादा एनाफिलिस मच्छर के काटने से मलेरिया होता है। डेंगू का लार्वा साफ पानी में पैदा होता है जैसे कूलर, टूटे हुए टायर, टंकी में एडीज मच्छर के लार्वा पनपते हैं। एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है। चिकुनगुनिया का वायरस सीधे हड्डी पर अटैक करता है जिससे असहनीय दर्द होता है। मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया, फायलेरिया से बचने के लिए घर के आस-पास सफाई रखें, पानी इक्ट्ठा न होने दें, गड्ढों को भरें, टायर, कबाड़ सामान ढंक्कर रखें, इनमें पानी इकट्ठा नहीं होने दें, कूलर व टंकी के पानी को एक सप्ताह में खाली करें, नीम का धुआं करें, शाम के समय खिड़की दरवाजा बंद रखें, रात्रि में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। पूरी आस्तीन के कपडे़ पहनें। मच्छर भगाने वाले साधन जैसे- क्रीम, क्वाइल, रिपेलेन्ट इत्यादि का उपयोग करें। टायर, कबाड़ सामान ढंक्कर रखें इनमें पानी इकट्ठा नहीं होने दें। बुखार आने पर तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र में जांच करायें। बुखार आने पर नजदीकि अस्पताल जाकर खून की जांच कारायें एवं ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता के पास जाकर खून की जांच करायें और दवायें प्राप्त करें।
सर्पदंश पर झाड़फूंक के चक्कर में न रहें, तुरंत अस्पताल ले जाएं
बरसात के दिनों में सर्पदंश के केस अत्यधिक सामने आते हैं। सांप के काटने में व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तथा सांप के काटने को अनदेखा ना करें, सर्प के काटने पर किसी नजदीकि अस्पताल तुरन्त लेकर जायें, झाड़-फूंक में ना रहें, सांप के दांत के नीचे विष की थैली होती है, जो सीधे खून के माध्यम से शरीर में फैल जाता है। सामान्तयः जहरीले सांपों के काटने पर दांतों के दो निशान अलग ही दिखाई देते हैं। गैर विषैले सांप के काटने पर दो से ज्यादा निशान हो सकते हैं, परन्तु ये निशान नहीं दिखते हैं, ये सोचना गलत होगा कि सांप ने नहीं काटा है, ज्यादातर सांप गैर विषैले भी होते हैं। सांप के काटने पर करीब-करीब 95 प्रतिशत मामलों में पहला लक्षण नींद का आना है। इसके साथ ही निगलने या सांस लेने में तकलीफ होती है, आमतौर पर सांप के काटने पर आधे घंटे बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
सर्प के काटने पर यह ना करें
रस्सी से ना बांधें, ब्लेड से ना काटें, पारम्परिक तारीकों का इस्तेमाल ना करें, मुंह से खून ना चूसें। ओछा, गुनिया के पास ना जायें। सांप काटे व्यक्ति को नदी में प्रवाहित नहीं करें। अन्धविश्वास में ना पड़ें।
यथा संभव कार्य करें –
सांप के काटे व्यक्ति को दिलासा दिलायें। घटना के तथ्यों का पता लगायें। गीले कपडे़ से डंक की जगह की चमड़ी को साफ करें, जिससे वहां पर लगा विष निकल जाये। सांप काटे व्यक्ति को करवट सुलायें, क्योंकि कई बार उल्टी भी होने लगती है, इसलिये करवट सुलाने से उल्टी श्वसनतंत्र में ना जाये। जहां पर सांप ने काटा है उस स्थान पर हल्के कपडे़ से बांध दें, ताकि हिलना-डुलना बंद हो जाये।
उपचार
सांप काटे व्यक्ति को तत्काल नजदीकि अस्पताल ले जाने की व्यवस्था बनायें। सांप के जहर को मारने के लिये अस्पताल में निःशुल्क एंटी स्नेक इंजेक्शन लगाया जाता है एवं डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह के अनुसार उचित उपचार करायें।
बचाव
अंधेरे में ना जायें। बिलों में हाथ ना डालें। झाड़ियों में ना जायें। पानी भरे गड्ढे में ना जायें। पैरों में चप्पल और जूते पहनकर चलें।
आईटीआई में प्लेसमेन्ट ड्राइव 16 को
शास0 आई0टी0आई0 मंडला में ऑफलाइन प्लेसमेन्ट ड्राइव 16 सितम्बर 2021 आयोजित किया गया है। जिसमें भारत की प्रतिष्ठित कम्पनी सुजुकी मोटर्स गुजरात के द्वारा आई0टी0आई0 के विभिन्न व्यवसाय (टर्नर, फिटर, मशीनिष्ट, इलैक्ट्रिीशियन, मोटर मैकेनिक, डीजल मैकेनिक, वेल्डर, पेन्टर जनरल, सीओई-आटोमोबाइल, टैक्टर मैकेनिक) के केवल पुरूष प्रशिक्षणार्थी जिनकी आयु 18 से 23 वर्ष के मध्य हो एवं दसवी की परीक्षा 50 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण हो एवं आई0टी0आई0 60 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण किये हो। इस प्लेसमेंट ड्राइव में सम्मलित हो सकते हैं। प्रशिक्षणार्थियों का चयन कम्पनी द्वारा लिखित एवं मौखिक परीक्षा आयोजित कर मैरिट के अनुसार किया जायेगा। प्रशिक्षणार्थी अपने समस्त मूल दस्तावेजों सहित 16 सितम्बर 2021 को प्रातः 9:30 बजे संस्था में उपस्थित हों। उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों के द्वारा कोविड-19 के गाइड लाइन का पालन करना अनिवार्य होगा।
