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बैगा जनजाति के विस्तार के लिए वनाधिकार हेबीटेड राइट्स के तहत् चरणबद्ध की गई ग्रामसभाएँ

मण्डला 21 नवम्बर 2021

अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत (वन निवासी) वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 नियम 2008 में प्रावधान एवं संशोधित अधिनियम 2012 के सामुदायिक अधिकारों की मान्यता की प्रक्रिया (1) में दिये प्रावधान के लिए भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के दिये निर्देशों के अनुरूप मण्डला जिले में पीव्हीटीजीएस समुदाय (बैगा) के हेबीटेट् राईट्स के दावों का चिन्हाकन कर चरणबद्ध कार्यवाही की गई है। प्रथम चरण के तहत् वन अधिकार अधिनियम प्रावधानानुसार धारा 3(1)(ड) के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों (बैगा जनजातीय) को उनके प्राकृतिक व पर्यवास (हेबीटेट् राईट्स) के अधिकार दिया जाने के लिए जिला स्तर पर 29 अक्टूबर 2020 को कार्यशाला आयोजित कर सर्वप्रथम बैगा समुदाय के प्राकृतिक वासों का चिन्हांकन किया गया। सर्वप्रथम दूरस्थ क्षेत्र मवई के बैगा बाहुल्य ग्राम पंचायत का चयन कर अधिनियम के प्रावधान अनुसार ग्राम स्तर से प्रारंभ की गई।

द्वितीय चरण में ग्राम पंचायत अमवार के रेहटा खेरो ग्राम में ग्रामसभा का आयोजन किया गया जिसमें बैगा समुदाय के लोगों को साथ हेबीटेट राईट के बारे में एवं उनकी स्थानीय भाषा में विस्तार से चर्चा की गई। बैगा समुदाय के प्रतिनिधियों समाज के मुकददम, दीवार, सरपंच, पंच एवं उपखण्ड एवं जिले के प्रतिनिधी की उपस्थिति में बैठक कर वनभूमि पर बैगा समुदाय के द्वारा किये जा रहे निस्तार एवं उपयोग को लेखबद्ध करने की कार्यवाही की गई। तृतीय चरण के अंतर्गत कलेक्टर हर्षिका सिंह के निर्देशानुसार एवं एस०डी०एम० बिछिया के नेतृत्व में उपखण्ड स्तरीय दल एवं ग्राम वनाधिकार समिति के द्वारा ग्राम पंचायत एवं पोषक ग्रामों में 4-5 बैठकें बैगा समुदाय के साथ कर बारीकी से उनके द्वारा पूर्वाेजों के समय से निस्तार किये जा रहे एक-एक स्थान जैसे- देव स्थल, लघु वनउपज संकलन के स्थान, जंगल के रास्ते, नदी-नाले, औषधीय तक पहुँच के स्थान, धार्मिक मान्यताओं के स्थान, प्राचीन वृक्ष, चारागाह, शमशान, धार्मिक रीति-रिवाजों के स्थान जहाँ वे साल में एक बार जाते हैं, जहाँ वे 5 साल में एक बार जाते हैं, एसी सभी स्थलों का चिन्हांकन कर एक नजरी नक्शा तैयार किया गया, और उसमें सभी स्थलों को प्रदर्शित कर उनकी जानकारी अंकित की गई। किसी प्रकार का भ्रम ना हो इस कारण सभी स्थानों के जीपीएस लोकेशन भी अंकित कराई गई।

चतुर्थ चरण में प्रकिया पूर्ण होने पर हेबीटेट् राईट्स के अधिकार दिये जाने की संविधानिक प्रकिया के अनुसार आयोजित विशेष ग्रामसभा में बैगा समुदाय के लिए ऐतिहासिक निर्णय ग्रामसभा अमवार के बैगा समुदाय के मुकद्दम सुखराम पिता धरमु (बैगा) की अध्यक्षता में ग्रामसभा में उपस्थित लोगों के समक्ष बैगा समुदाय को हेबीटेट राईट्स के दावे एवं दावे के सर्मथन तैयार किये गये। नजरी नक्शा पूर्व के निस्तार के विरूद्ध वन विभाग के जुर्माना आदेश न्यायालय के निर्णय तथा मण्डला जिले के गजटियर इत्यादि साक्ष्यों के साथ उक्त दावे पर ग्रामसभा पर चर्चा एवं दावे के सत्यापन की कार्यवाही की गई। उक्त ग्रामसभा में वन विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी एवं वनरक्षक के द्वारा भी वन विभाग अभिलेखा एवं मानचित्रों से मिलान कर दावे के सत्यापन में सहमति प्रदान की गई, जिसके उपरांत ग्राम पंचायत अमवार एवं पोषक गांव के हेबीटेट राईटस प्राकृतिक एवं पर्यावास अधिकार के दावे को मान्य कर सर्व सम्मति से अनुशंसा की गई। तत्पश्चात् प्रस्ताव उपखंड स्तरीय समिति को प्रेषित किया गया। पांचवा चरण में अधिनियम में दिये प्रावधान अनुसार जिला प्रशासन के पहल से शीघ्र ही उपखंड स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर हेबीटेट् राईट्स का अधिकार वनों ओर वन्य जीव को सुरक्षित रखने की शर्तों के साथ उपखण्ड स्तरीय वनाधिकार समिति के द्वारा प्राप्त दावा प्रस्ताव मान्य की जाकर अनुशंसा सहित जिला स्तरीय वन समिति को अंतिम विंश्चय के लिए प्रेषित किया गया।

छटवां चरण में जिला प्रशासन ने तत्पश्चात् जिला स्तरीय वन अधिकार की बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आहूत की गई। बैठक में हेबीटेट राईट्स प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई जिसमें एस०डी०एम० बिछिया के द्वारा विस्तार से ग्राम पंचायत अमवर के हेबीटेट् राईट्स की सम्पूर्ण प्रक्रिया की जानकारी डी०एल०सी० के समक्ष प्रस्तुत की गई। साथ ही हेबीटेट् राईट्स का नक्शा भी प्रदर्शित किया गया। साथ ही दावे के समर्थन में प्रस्तुत साक्ष्य जैसे बुजुर्गाें के कथन, मण्डला जिला का गजेटियर, वन विभाग के जुर्माना आदेश न्यायालय के निर्णय, बैगा समुदाय के परम्पराओं के लेख, निस्तार के स्थलों के छायाचित्र, इत्यादि का बारीकी से समिति के द्वारा परीक्षण किया गया और अधिनियम के प्रावधान अनुसार हेबीटेट् के हर पहलू आर्थिक, परिस्थितिकीय, सामाजिक, जननांकीय एवं आर्थिक निर्धारकों का नजरी नक्शे में निर्धारण किया गया। तत्पश्चात् हर पहलू पर उपस्थित सभी सदस्यों ने अपनी बात रखी। ग्राम पंचायत सदस्यों ने डी०एल०सी० के समक्ष अपने प्राकृतिक वास के बारे में बताया। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप बैगा समुदाय के ऐतिहासिक अधिकार को दिये जाने की सर्व सम्मति से ग्राम पंचायत अमवार के हेबीटेट राईट्स के दावे को संलग्न प्रारूप, नजरी नक्शा, उल्लिखित उद्देश्य प्रायोजनों, सीमा का विस्तार कक्ष क्र. एवं खसरा क्र. अनुसार तथा निर्धारित शर्तों के साथ मान्य किया गया।

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