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रेवा इंडिया न्यूज मुख्य समाचार मंडला 1 नवंबर 2024

आओ हम सब मिलकर मध्यप्रदेश निर्माण के संकल्पों को पूरा करें – मंत्री श्रीमती संपतिया उइके

मध्यप्रदेश की विकास और प्रगति के लिए सभी नागरिकों का योगदान जरूरी है – सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस का जिला स्तरीय कार्यक्रम रानी दुर्गावती महाविद्यालय में संपन्न हुआ

 

मंडला 1 नवंबर 2024

आजादी के बाद मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना 1 नवम्बर 1956 को हुई। मध्यप्रदेश की स्थापना को लेकर रानी दुर्गावती महाविद्यालय मंडला के ऑडीटोरियम में म.प्र. स्थापना दिवस का जिला स्तरीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके और सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिले के लोक कलाकारों ने लोकगीत व लोकनृत्य प्रस्तुत किए। उनके द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमुदाय का मनमोह लिया, तालियों की गड़गड़ाहट ने पूरा कार्यक्रम स्थल गूंज उठा। मंत्री श्रीमती संपतिया उइके और सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने स्थानीय कलाकारों के साथ मिलकर लोकनृत्य किए व लोकगीत गाए। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय कुशराम, नगरपालिका मंडला अध्यक्ष श्री विनोद कछवाहा, नगर पंचायत मंडला अध्यक्ष श्री सोनू भलावी, नगरपालिका मंडला उपाध्यक्ष श्री अखिलेश कछवाहा, जिला पंचायत सदस्य व सभापति (संचार एवं संकर्म) श्री शैलेष मिश्रा, सांसद प्रतिनिधि श्री जयदत्त झा, कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री श्रेयांश कूमट, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अमित वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्री जेपी यादव, मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री गजानंद नाफड़े सहित जिला एवं जनपद स्तरीय अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक, शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, समाजसेवी एवं पत्रकारगण मौजूद थे। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने मंत्री श्रीमती संपतिया उइके और सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते को पौधा देकर उनका स्वागत किया।

मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि देश की आजादी 1947 के बाद राज्यों का गठन हुआ। जिसके तहत एक नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश राज्य भारत के अस्तित्व में आया। मध्यप्रदेश राज्य निर्माण में तत्कालीन सीपी एण्ड बरार, मध्य भारत विंध्य प्रदेश और भोपाल जैसे राज्यों को मिलाकर प्रदेश का निर्माण किया गया। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य की सीमाएं उत्तर में उत्तरप्रदेश, दक्षिण में महाराष्ट्र, पूर्व में छत्तीसगढ़ एवं पश्चिम में गुजरात और राजस्थान को छूती है। मध्यप्रदेश भारत के हृदय स्थल में है, इसलिए इसे मध्यप्रदेश के नाम से जाना जाता है। मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि मध्यप्रदेश के विकास के लिए सभी जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, समाजसेवियों, गणमान्य नागरिकों एवं पत्रकारगणों की सहभागिता जरूरी है। प्रदेश में सभी वर्गों में भाईचारा कायम रहे और प्रदेश के विकास में सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो। मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता को विभागीय योजनाओं से लाभान्वित कर उनका सर्वांगीण विकास कर रहे हैं। जिससे प्रदेश के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, सड़क, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं सुलभता से उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से अपील की, कि देश/प्रदेश के विकास में अपनी सहभागिता कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी के संकल्पों को पूरा करें।

सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना एक नवंबर 1956 को प्रदेश की भौगोलिक, सांस्कृतिक, कला, परंपरा और इतिहास को लेकर की गई। मध्यप्रदेश स्थापना में चम्बल, विंध्य, निमाड़, छत्तीसगढ़, मालवा, नर्मदा सोनघाटी, बघेलखण्ड जैसे भौगोलिक क्षेत्र शामिल हुए। इन्ही भौगोलिक क्षेत्रों को लेकर मध्यप्रदेश राज्य का नवनिर्माण हुआ। मध्यप्रदेश निर्माण के बाद कृषि, शिक्षा, रोजगार, बिजली, सड़क, पानी, सिचाई को लेकर लगातार विकास कर रहा है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश निर्माण के बाद से किसानों के लिए सिचाई का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में विकास एवं निर्माण कार्यों को लेकर लगातार कार्य हो रहे हैं। इतिहास, संस्कृति, परंपरा और लोक कलाओं को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जननायकों के बारे में भी विस्तार से बताया। सांसद श्री कुलस्ते ने बताया कि हमारी सरकार ने आदिवासियों की शहीद स्थल मानगढ़ को भी संरक्षित करने का कार्य किया है।

सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का आदिवासी बाहुल्य जिला है। नर्मदा नदी के तट से लेकर पूर्वी मध्यप्रदेश तक जनजातीय समूहों की कला, संस्कृति विभिन्न माध्यमों से फैली हुई है। मध्यप्रदेश के निर्माण से आदिवासी कला एवं संस्कृति को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। उन्होंने बताया कि डिंडौरी जिले में पाटनगढ़, गोंड़ी पेंटिंग का केन्द्र है। पाटनगढ़ को गोंड़ी पेंटिंग के नाम से पूरे देश में पहचान मिली है। सांसद श्री कुलस्ते ने मध्यप्रदेश स्थापना दिवस कार्यक्रम में आदिवासी जननायकों, राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथशाह, रानी कमलापति, रानी दुर्गावती, टंट्याभील, भीमानायक, बिरसामुंडा सहित अन्य जननायकों के बारे में बताया। देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जानकारी दी। सांसद श्री कुलस्ते ने बताया कि मध्यप्रदेश निर्माण के बाद प्रदेश में विभिन्न योजनाएं संचालित कर नागरिकों को इन योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। म.प्र. के विकास और प्रगति के लिए लगातार निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम में सभी से आव्हान किया कि म.प्र. की विकास और प्रगति के लिए सभी नागरिक अपना योगदान जरूर दें। आयोजित कार्यक्रम का संचालन श्री अखिलेश उपाध्याय और कार्यक्रम का आभार मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री गजानंद नाफड़े ने किया।

 

 

 

 

 

 

मंत्री श्रीमती संपतिया उइके 2 नवंबर को गौवर्धन पूजन करेंगी

 

मंडला 1 नवंबर 2024

प्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिक मंत्री श्रीमति संपतिया उइके की अध्यक्षता में 2 नवंबर 2024 को दोपहर 12 बजे से दयोदय पशु सेवा सदन आमानाला में जिला स्तरीय गौवर्धन पूजन का आयोजन किया गया है। आयोजित कार्यक्रम में जिले के जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, समाजसेवी, पशुप्रेमी, गणमान्य नागरिक सहित पत्रकारगणों को अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का आग्रह किया गया है।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएँ एवं बधाई दी

 

मंडला 1 नवंबर 2024

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को गोवर्धन पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। श्री पटेल ने कहा है कि गोवर्धन पूजा का पर्व धार्मिक महत्ता के साथ ही हमारी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक भी है। गोवर्धन पूजा का आयोजन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के सम्मान में किया जाता है, जो हमें सिखाता है कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और श्रद्धा होनी चाहिए। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने नागरिकों का आहवान किया है कि गोवर्धन पूजा के पावन प्रसंग पर हम सब मिलकर पर्यावरण-संरक्षण का संकल्प लें। प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करते हुए, अपने आसपास की हरियाली को बढ़ाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा का यह प्रयास हमारी संस्कृति को सहेजने में मदद करेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित वातावरण भी तैयार करेगा।

राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा कार्यक्रम शनिवार को रवीन्द्र भवन में

गौ-शिल्प और पंचगव्य उत्पादों पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगेगी

 

मंडला 1 नवंबर 2024

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में राज्य स्तरीय गोवर्धन-पूजा कार्यक्रम 2 नवम्बर को रवीन्द्र भवन भोपाल में प्रात: 9:30 बजे होगा। गोवर्धन पर्व के सांस्कृतिक एवं आर्थिक महत्व पर केन्द्रित इस आयोजन में गौ-संस्कृति, परिवेश के प्रदर्शन और स्वास्थ्य आधारित लाभों पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। प्रदर्शनी मुख्य रूप से पंचगव्य उत्पाद, गौ-शिल्प उत्पाद, कृषि आधारित उत्पाद और दैनिक उपयोग के उत्पाद के आर्थिक महत्व को प्रदर्शित किया जायेगा। राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ सभी जिलों में एक कार्यक्रम जिले की प्रमुख गौ-शाला में भी होगा। यहाँ भी गोवर्धन पूजा, गौमय और पंचगव्य उत्पादों पर संगोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रंगोली एवं निबंध प्रतियोगिता और बच्चों के कार्यक्रम होंगे।

गाय और गंगा, भारत की संस्कृति एवं सभ्यता की आत्मा है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गोवर्धन पूजा प्रकृति के सम्मान का उत्सव है। धरा पर गाय और गंगा ही हैं, जो ईश्वर को अत्यंत प्रिय हैं। इनके बिना भारतवर्ष की कल्पना भी नहीं की जा सकती। गाय और गंगा, भारत की संस्कृति एवं सभ्यता की आत्मा है… ये पालनहार हैं और तारणहार भी। वेद, पुराण, उपनिषद, स्मृति-ग्रंथों, रामायण, महाभारत और वांग्मय में गौ-महिमा का वर्णन है। गाय को सुरभि, कामधेनु, अर्च्या, यज्ञपदी, कल्याणी, इज्या, बहुला, कामदुघा, विश्व की आयु, रुद्रों की माता और वसुओं की पुत्री के रूप में सुशोभित किया गया है।

सर्वदेवमयी गाय को वेदों में अघ्न्या (अवध्या) बतलाया है… त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने वनगमन के पूर्व गोदान किया था। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था में गायों संग व्यतीत कर भारतवर्ष को गाय की महत्ता का संदेश दिया है। स्कन्दपुराण में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के द्वारा कामधेनु की स्तुति की गई है

त्वं माता सर्वदेवानां त्वं च यज्ञस्य कारणम्।

त्वं तीर्थ सर्वतीर्थानां नमस्तेऽस्तु सदानघे ।।

अर्थात् हे अनघे तुम समस्त देवों की जननी तथा यज्ञ की कारणरूपा हो और समस्त तीर्थों की महातीर्थ हो, तुमको सदैव नमस्कार है। निश्चित रूप से ईश्वर द्वारा वंदनीय गौमाता का संरक्षण एवं संवर्धन केवल कर्तव्य ही नहीं धर्म भी है। मध्यप्रदेश सरकार भी गौ-सेवा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने प्रत्येक गाँव में गौ-शाला प्रारंभ करने का अभियान शुरू किया है। सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए गौशाला में गाय के आहार के लिए निर्धारित अनुदान को भी बढ़ाकर दोगुना कर दिया है।

धार्मिक आयोजन और पर्यावरण-संरक्षण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का पर्व है गोवर्धन पूजा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 

मंडला 1 नवंबर 2024

मुख्यमंत्री मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गोवर्धन पूजा, धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि पर्यावरण-संरक्षण, कृषि और पशुधन के प्रति समाज की जिम्मेदारी का भी पर्व हैं। गोवर्धन पूजा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के प्रति श्रद्धा और कृषि से जुड़ी परंपराओं को बनाए रखने का संदेश भी जाता है। इससे स्थानीय समुदाय को एकजुट होकर अपनी परंपराओं को जीवित रखने की प्रेरणा मिलती है। इसे दृष्टिगत रखते हुए हमने इस वर्ष गौवर्धन पूजा को वृहद पैमाने पर पूरे प्रदेश में सरकार की सहभागिता के साथ मनाने का निर्णय लिया है।

गौ-संवर्धन के प्रमुख पहलू

·                     2500 गौ-शालाओं में 4 लाख से अधिक गौ-वंश का पालन।

·                     गौ-वंश के बेहतर आहार के लिये प्रति गौ-वंश मिलने वाली 20 रूपये की राशि बढ़ाकर 40 रूपये करने का निर्णय।

·                     घायल गायों के लिये हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहन की व्यवस्था।

·                     दुग्ध उत्पादन को बढ़ाना देने म.प्र. सरकार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच एमओयू।

·                     ग्वालियर स्थित आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले सीएनजी प्लांट की स्थापना।

·                     दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने प्रदेश के हर ब्लॉक में एक गाँव बनेगा वृंदावन गांव।

·                     देश में सर्वाधिक 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती करने वाले मध्यप्रदेश में गौ-वंश को प्रोत्साहन देन की पहल से जैविक उत्पादन बढ़ाने का प्रयास।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गोवर्धन पूजा, पर्यावरण और पशुधन-संरक्षण का भी संदेश देता है, जो कृषि और आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से हम प्रकृति और पशुधन के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा का उद्देश्य न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक और पारिस्थितिकीय महत्व से भी जन-जन को अवगत करना है, जो एक सतत और समर्थ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाय को भारतीय संस्कृति में “गौ-माता” का दर्जा दिया गया है। विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और त्यौहारों में गाय का पूजन होता है। यह भारतीय समाज में गहरी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। लम्बे समय से हर घर में गाय पालने की परंपरा रही है, जिससे ग्रामीण समाज में एकता, सामंजस्य और सहयोग की भावना प्रबल होती थी। मध्यप्रदेश में किसानों एवं पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिये सरकार निजी और शासकीय दोनो तरह की गौशालाओं को प्रोत्साहित कर सहयोग कर रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शास्त्रों में भी बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी माना गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ-माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। गौवंश सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है। यह पर्व भारतीय जनमानस को उनकी जड़ों से जोड़े रखता है और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को प्रदर्शित करता है। यह हमारी संस्कृति और परंपरा के संवर्धन का प्रतीक भी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौवंश संरक्षण समाज में सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसारक है और इसकी सेवा से समाज में करुणा, संवेदनशीलता और एकजुटता की भावना बढ़ती है। गौ-माता हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना की स्रोत भी हैं। गौ-माता की सेवा, सम्मान एवं संवर्धन के लिए मध्यप्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। पशुपालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ते रहे हैं। दूध और उससे बने उत्पादों को बेचकर ग्रामीणों को हमेशा आय का स्त्रोत मिलता रहा है। भारत दुग्ध उत्पादन के मामले में विश्व में शीर्ष स्थान पर है और इस सफलता में गोवंश का महत्वपूर्ण योगदान है। देश में दुग्ध उत्पादन, अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है और लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का साधन भी है।

दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9 से 10 प्रतिशत उत्पादन करते हुए देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश के अनेक ग्रामों में किसान भाइयों को पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के लिए सुविधाएं प्रदान कर प्रदेश को देश में अग्रणी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में प्रतिदिन साढ़े पांच करोड़ लीटर दुग्ध उत्पादन हो रहा है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। जहां देश में प्रति व्यक्ति 459 ग्राम प्रतिदिन दूध की उपलब्धता है वहीं मध्यप्रदेश में यह 644 ग्राम है। अगले पांच वर्ष में प्रदेश का दुग्ध उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य है। इस दिशा में लगभग 40 हजार ग्रामों में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के कार्य शुरू हो चुका है। अब दुग्ध उत्पादन लाखों ग्रामीणों के लिए रोजगार का स्त्रोत बन गया है। इस कार्या में विशेष रूप से महिलाओं की भी अग्रणी भूमिका है। गौ-संवर्धन से न केवल रोजगार सृजन होता है, बल्कि यह समाज की सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूती प्रदान करता है और एक स्वस्थ एवं स्थिर समाज का निर्माण करने में योगदान देता है।

जन-कल्याण के साथ प्रगति पथ पर अग्रसर मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दीं मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की शुभकामनाएं

मंडला 1 नवंबर 2024

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश की स्वर्णिम यात्रा में सरकार, हर वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित है। गरीब के चेहरे पर मुस्कान, किसान की खुशहाली, नारी का सम्मान और युवाओं का उज्ज्वल भविष्य, यही हमारे प्रयासों का मूल उद्देश्य है। जन-कल्याण की दिशा में हमारे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। मध्यप्रदेश जन-कल्याण के साथ प्रगति पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों के स्थापना दिवस की मंगलकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीपोत्सव के साथ ही राज्योत्सव भी मनाया जा रहा है, यह अत्यंत आनंद और गौरवशाली पल है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश जिस प्रकार से प्रगति कर रहा है उसी प्रकार मध्यप्रदेश ने भी अपनी विशेष पहचान बनायी है। युवाओं के लिए आईटी से लेकर इंडस्ट्री तक, लघु उद्योग से लेकर बड़े उद्योगों तक, खेती किसानी से लेकर हर्टीकल्चर तक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। सरकार सभी को प्रोत्साहन दे रही है।

गौ-प्रेम के प्रकटीकरण का पर्व है गौवर्धन पूजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जन-प्रतिनिधि भी शामिल हों गौवर्धन पूजा में

मंडला 1 नवंबर 2024

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने तीज त्यौहारों को धूमधाम और आनंद के साथ मनाने का निर्णय लिया है। भारतीय संस्कृति में दीपावली के बाद गौवर्धन पूजा की परंपरा रही है, जो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मथुरा में गौवर्धन पर्वत धारण करने की घटना से जुड़ी है। यह पर्व हमारी संस्कृति में विद्धमान पशु प्रेम के महत्व को भी दर्शाता है। संपूर्ण प्रदेश में गौवर्धन पूजा का पर्व धूम धाम से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं भी पूजा में शामिल होंगे। मंत्री, विधायक, सांसद, सरपंच और पंच अपने-अपने क्षेत्र में गौवर्धन पूजा में भी शामिल हों। इन उत्सवों से आनंद के साथ गौ-प्रेम का भी प्रकटीकरण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को नंबर वन बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौवर्धन पूजा के अवसर पर उज्जैन से जारी संदेश में यह बात कही।

 

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