मंडला, 21 मई 2025
मध्यप्रदेश के मण्डला जिले में ’मिशन नेत्र ज्योति अभियान’ पायलट प्रोजेक्ट ने 6 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत प्रत्येक विकासखंड स्तर पर टीमों का गठन कर बच्चों की आँखों की जाँच की गई जिसमें 17 मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों की पहचान की गई। प्रथम चरण में इन बच्चों में से 11 बच्चों की मण्डला जिला चिकित्सालय में सफल सर्जरी की गई, जिससे उनके जीवन में नई रोशनी आई है। नेत्र व्याधि उनके कैरियर में बाधा नहीं बन सकेगी।

सफल सर्जरी से बच्चों को मिली मोतियाबिंद से मुक्ति
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मण्डला जिला चिकित्सालय में जन्मजात मोतियाबिंद से जूझ रहे बच्चों के लिए एक विशेष सर्जरी शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में बिछिया, मवई, निवास, मोहगांव, घुघरी और नैनपुर ब्लॉक के 17 बच्चों को चिन्हित किया गया। पहले चरण में 11 बच्चों को सफल सर्जरी के लिए जिला चिकित्सालय के वार्ड नंबर 52 में भर्ती किया गया। सर्जरी से पहले सभी आवश्यक जाँचें की गईं और मंगलवार को नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण अहरवाल द्वारा सभी बच्चों का सफल ऑपरेशन किया गया।

इस सर्जरी के बाद, महिमा बघेल (7 वर्ष), तरूण मेश्राम (6 वर्ष), ज्योति मार्को (6 वर्ष), नीरज परते (14 वर्ष), अंकित (11 वर्ष), धर्मेन्द्र परस्ते (8 वर्ष), अक्ष यादव (8 वर्ष), शेख आर्यन (13 वर्ष), नकुल वरकड़े (15 वर्ष), साहिल मरकाम (10 वर्ष) और अंकित परस्ते (7 वर्ष) जैसे बच्चे अब मोतियाबिंद से मुक्त हो गए हैं। ये बच्चे अब अपनी आँखों को स्वस्थ होता देख रहे हैं। 26 मई को द्वितीय चरण में 6 बच्चांे के मोतियाबिंद का होगा आॅपरेशन।

विशेषज्ञ टीम का योगदान
19 मई को आयोजित इस शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण अहरवाल के साथ एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण उइके और डॉ. अनूप कुशराम भी शामिल थे। चिकित्सकीय टीम में हीरानंद चंद्रवंशी, संजय भोयर, नर्सिंग ऑफिसर वैशाली सहलाम, सूर्या पटेल और पूजा बर्मन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इन सभी ने मिलकर सफलतापूर्वक इन बच्चों की सर्जरी की। इस दौरान सीएमएचओ डॉ. केसी सरोते, सीएस डॉ. विजय सिंह धुर्वे, आरबीएसके प्रबंधक अर्जुन सिंह, आरबीएसके डॉक्टर और एएनएम भी उपस्थित रहे।

मोतियाबिंद: एक गंभीर नेत्र रोग, सर्जरी ही उसका समाधान
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण अहरवाल ने बताया कि मोतियाबिंद एक गंभीर नेत्र रोग है जो जन्मजात, चोट लगने या बढ़ती उम्र के कारण हो सकता है। यह लेंस में सफेदी या धुंधलेपन के कारण होता है, जिससे धुंधली दृष्टि, रंगों का फीका दिखना और रात में देखने में कठिनाई जैसी समस्याएँ होती हैं। डॉ. अहरवाल ने बताया कि सर्जरी ही मोतियाबिंद का एकमात्र प्रभावी समाधान है। इस सर्जरी के दौरान धुंधले प्राकृतिक लेंस को हटाकर उसकी जगह एक इंट्राओकुलर लेंस लगाया जाता है।

सीएमएचओ डॉ. केसी सरोते और सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे ने आम जनता से अपील की है कि मोतियाबिंद का समय पर इलाज न होने पर यह अंधापन का कारण बन सकता है। मिशन नेत्र ज्योति जैसी पहलें निश्चित रूप से ऐसे बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं।
मिशन नेत्र ज्योति से बच्चों के जीवन में आई नई रोशनी – कलेक्टर
मण्डला जिले में मिशन नेत्र ज्योति के सफल संचालन पर कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि मिशन नेत्र ज्योति पायलट प्रोजेक्ट मण्डला के बच्चों के लिए वरदान के रूप में उभरा है। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि हमारे आदिवासी बहुल क्षेत्र के किसी भी बच्चे को मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारी के कारण अपनी दृष्टि से वंचित न होना पड़े। मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता है कि इनमें से 11 बच्चों की जिला चिकित्सालय मण्डला में सफल सर्जरी की गई है, शेष 6 बच्चांे की सर्जरी 26 मई 2025 को जिला चिकित्सालय में की जायेगी। इन बच्चों के जीवन में अब नई रोशनी आई है, और वे एक स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। अब यह सभी सामान्य बच्चों की तरह अपनी पढ़ाई कर सकेंगे। उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, स्वास्थ्यकर्मियों और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े सभी सदस्यों की सराहना की।

