मंडला, 23 सितम्बर 2026
कभी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहीं श्रीमती शीला धुर्वे के लिए आजीविका मिशन आत्मनिर्भरता की नई राह लेकर आया। मिशन से जुड़कर उन्हें स्वरोजगार के अवसरों, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की जानकारी मिली। उन्होंने इस अवसर को अपनाते हुए रेडीमेड कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया और अपनी मेहनत से इसे आगे बढ़ाया।
आज शीला धुर्वे अपने व्यवसाय से प्रतिमाह 30 से 40 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही वे सीआरपी (सेवा) के कार्य से 10 से 15 हजार रुपये की अतिरिक्त मासिक आय भी प्राप्त कर रही हैं। इस तरह उनकी कुल मासिक आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शीला धुर्वे बताती हैं कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला। वे अपनी सफलता और आत्मनिर्भरता का श्रेय माननीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा आजीविका मिशन से मिले सहयोग और मार्गदर्शन को देती हैं। शीला धुर्वे की यह यात्रा बताती है कि अवसर, मार्गदर्शन और मेहनत मिल जाए तो महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला भी रख सकती हैं।
