अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव -2020 में समावेशी विकास(Inclusive Development)के अंर्तगत आयोजित किए गए कार्यक्रम नेशनल सोशल ऑर्गेनाइजेशन एंड इंस्टिट्यूशन मीट(National Social Organisation & Institution Meet)में मंड़ला जिले से डॉ.गजेंद्र गुप्ता, सौरभ चटर्जी और डॉ.एच.डी.गांधी ने सहभागिता की।डॉ.गजेंद्र गुप्ता ने अपने संस्था परम्परागत, जड़ी-बूटी एवं वैकल्पिक चिकित्सा विकास परिषद एवं अनुसंधान केंद्र के विकास के ग्रासरूट मॉडल को प्रस्तुत किया। सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए परम्परागत, जड़ी-बूटी एवं वैकल्पिक चिकित्सा विकास परिषद एवं अनुसंधान केंद्र चयनित कर पुरुस्कृत किया गया।
नेशनल सोशल ऑर्गेनाइजेशन एंड इंस्टिट्यूशन मीट (NSOIM) 2020 की मुख्य विशेषताएं रही –
*चर्चा के मुख्य विषय A. सामाजिक विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप B. कृषि- उभरते रुझान
- सामाजिक क्षेत्र में नए प्रतिमान
*डिजिटल पहल कृषिट्रेड की लांचिंग – कृषि उत्पादों और अन्य डिजिटल सेवाओं के लिए कृषि और बाजार को जोड़ने के लिए बीडिंग पोर्टल
*नालेज पोर्टल – विभाणी की डिजिटल पहल: सभी सामाजिक जुड़ाव के लिए एक एकल खिड़की
*विकास के लिए कार्यरत संगठनों द्वारा ग्रासरूट मॉडल की प्रस्तुतियाँ
*सामाजिक विकास में उत्कृष्ट योगदान और कोविड-19 के रोकथाम में सक्रिय रूप से जुटी प्रतिभागी संस्थाओं के लिए पुरस्कार
*IISF-EXPO: 100 जमीनी स्तर के विकास मॉडल का प्रर्दशन।
*विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से जमीनी स्तर के मॉडल बनाने के लिए आगे की राह।
कोरोना संक्रमण से बचाव में सामाजिक दूरी एक अहम अस्त्र है। यही कारण है कि इन दिनों भीड़-भाड़ वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रम आभासी (वर्चुअल) स्वरूप में ही आयोजित किए जा रहे हैं। भारत के प्रतिष्ठित वार्षिक आयोजन इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) का छठवां संस्करण (2020)- 6th India international science festival 2020 भी आभासी स्वरूप में आयोजित किया गया। इस विज्ञान महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करना और समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना रहा।
भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2020 का विषय इस वर्ष महोत्सव की विषयवस्तु रहा – “आत्मनिर्भर भारत एवं विश्व कल्याण के लिए विज्ञान”। स्पष्ट है कि इस बार का अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विज्ञान की भूमिका पर केंद्रित रहा। आयोजन में वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकीविदों से लेकर उद्योगपतियों, शिक्षकों, शिल्पकारों, किसानों, छात्रों और नवाचारियों की भागीदारी रही। इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को विज्ञान की ओर आकर्षित करने और विज्ञान को लोकप्रिय बनाने की दिशा में काम करने वाले हितधारकों की परस्पर नेटवर्किंग का प्रयास भी किया गया।
International science festival 2020 विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) तथा विज्ञान भारती द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किए जाने वाला यह वार्षिक विज्ञान उत्सव चार दिन तक चला। इस आयोजन में 60 देशों के एक लाख से जादा प्रतिभागियों ने ऑनलाइन रूप में सहभागिता कर गिनीज रिकॉर्ड बनाया। इस मेगा विज्ञान उत्सव का समन्वय सीएसआईआर ने किया और आयोजन के लिए नोडल संस्था नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी ऐंड डेवलपमेंट स्टडीज (निस्टैड्स)रही।” आईआईएसएफ एक बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम है, जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाता है। पिछले वर्ष के विज्ञान उत्सव में कुल 28 कार्यक्रमों का आयोजन किया था। जबकि, इस वर्ष कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाकर 41 हो गई। आईआईएसएफ-2020 में भारतीय विज्ञान का इतिहास, दर्शन एवं विज्ञान, कृषि प्रौद्योगिकी, स्वच्छ वायु, ऊर्जा, कचरा एवं साफ-सफाई, जैव विविधता और साइंस डिप्लोमेसी समेत कई नए आयाम जोड़े गए हैं। इस बार आईआईएसएफ में, वर्चुअल साइंस फेस्टिवल, लाइट शैडो ऐंड टाइम डिवाइस मेकिंग, हैंड हाइजीन गतिविधि पर आधारित ऑनलाइन पाठ, सुरक्षात्मक मास्क का उपयोग और पोषण एवं स्वास्थ्य पर केंद्रित पाँच अलग-अलग विषयों पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। पिछले वर्ष यह उत्सव कोलकाता में आयोजित किया गया था। इससे पहले, वर्ष 2015 में पहली बार आईआईएसएफ का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में हुआ था और दूसरे साल भी इस महोत्सव को दिल्ली में ही स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) में आयोजित किया गया था। तीसरे साल आईआईटी, चेन्नई और चौथे वर्ष लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आईआईएसएफ का आयोजन किया गया था।
