मण्डला 21 फरवरी 2021
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीनाथ सिंह ने जानकारी दी कि ध्वनि प्रदुषण पर्यावरण मानव एवं अन्य जीवों के लिये हानिकारक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 85 डेसीबल से अधिक स्तर की ध्वनि का आठ घंटे से अधिक समय तक एक्सपोजर खतरनाक हो सकता है। व्यस्त सड़क तथा रोड ट्रैफिक के पास लगातार आठ घंटे काम करने पर 85 डेसीबल का एक्सपोजर हो सकता है। ध्वनि प्रदुषण से कई प्रकार के शारीरिक तथा मानसिक दुष्परिणाम परलक्षित होते है। ध्वनि प्रदुषण सर्वव्यापी है, परन्तु इसे वायु प्रदुषण या जल प्रदुषण जितनी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ध्वनि प्रदुषण के लगातार बढ़े हुये स्तर की ध्वनि के एक्सपोजर से उच्च रक्तचाप और बहरापन हो सकता है। निरंतर ट्रेफिक कोलाहल सड़क/हवाई/रेल यातायात के कारण नींद में खलल हो सकता है। जिसके दूरगामी दुष्परिणाम हो सकते है। ध्वनि प्रदुषण से प्रभावित व्यक्ति के कार्य कुशलता में कमी दृष्टि गोचर हो सकती है। नींद की कमी से अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती है।
ध्वनि प्रदुषण के लिये अधिक संवेदी बच्चे हो सकते हैं। बच्चों में ध्वनि प्रदुषण के कारण कई बीमारियां एवं विकार पाये जाते हैं। जैसे सुनने में कमी होना, मनोविज्ञानी प्रभाव, शारीरिक प्रभाव इत्यादि। अतः आमजन से निवेदन है कि ध्वनि प्रदुषण को गंभीरता से लें, एवं अनावश्यक शोर ध्वनि से बचने का प्रयास करें।
