मंडला-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियो की अनिश्चितकालीन हडताल गुरूवार को चैथेे दिन भी जारी रही। संविदा स्वास्थ्य कर्मी अलग-अलग स्तर पर जनप्रतिनिधियो से मिलकर अपनी लंबित मांगो से अवगत कराते हुए समर्थन मांग रहे है। जनप्रतिनिधियो ने भी मांगो को जायज ठहराते हुए कहा है कि दोनो मांग पूरी की जानी चाहिये। संविदा स्वास्थ्य कर्मियो ने राज्यसभा सांसद संपतिया उइके से मुलाकात की। राज्यसभा सांसद को बताया कि 2018 की नीति को अधिकांश विभागो में लागू करते हुए नियमित वेतनमान का 90 फीसदी वेतन दिया जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षा की जा रही है। तीन साल में हडताल कर चुके है। ज्ञापन सौप चुके है लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा 90 फीसदी वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ निष्कासितो की वापसी भी नहीं की जा रही है। राज्यसभा सांसद को ज्ञापन भी सौपा गया। उन्होने कहा कि दोनो मांग को लेकर मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री व वित्त मंत्री से चर्चा कर निराकरण कराने का प्रयास करेंगी। कर्मियो की मांग को उनके समक्ष रखेंगी।
कोरोना में लगाई जान फिर भी उपेक्षा
संविदा स्वास्थ्य कर्मी संघ के जिलाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियो ने बताया कि कर्मचारियो ने कोरोना की पहली लहर में पूरे सेवा भाव से काम किया। दूसरी लहर में भी पीछे नहीं हटे। बेहद कम मानदेय में कर्मचारी अपनी जान की परवाह करते हुए बिना नियमित सेवाएं दे रहे है बावजूद इसके सरकार द्वारा उपेक्षा की जा रही है। हडताल के पहले ज्ञापन सौपे गये मांग की गई लेकिन ध्यान नहीं दिया गया जिससे मजबूरीवश प्रदेश व जिले के कर्मचारियो ने हडताल शुरू की है। कर्मचारियो का कहना है कि इस बार 90 प्रतिशत के आदेश जारी होने तक हडताल जारी रखी जायेगी। सरकार द्वारा हर बार आश्वासन दिया गया लेकिन पूरा नहीं किया गया।
कामकाज प्रभावित, भटक रहे लोग
संविदा स्वास्थ्य कर्मियो के हडताल पर चले जाने से तमाम कामकाज प्रभावित हो गये है। विभाग भले ही स्थिति सामान्य होने के दावा कर रहा है लेकिन संविदा स्वास्थ्य कर्मियो की हडताल का व्यापक असर कामकाज प्रभावित हो गया है। लोग जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनवा पा रहे है। आपरेटर नहीं होने से ब्लाक से लेकर जिले की रिपोर्टिंग राज्य स्तर पर नहीं हो पा रही है। सीएचसी लेबल पर लैब टेक्नीशियन के हडताल पर जाने से सेम्पलिंग का कार्य प्रभावित हो गया है। टारगेट पूरा नहीं हो पा रहा है। संविदा एएनएम हडताल में होने से किल कोरोना ठप्प पड गया है। टीकाकरण कार्य ठप्प पड गया है। स्टाफ नर्स भी हडताल पर है जिससे जिला अस्पताल से लेकर ब्लाक तक सेवाओ के लिए कर्मचारी कम पड गये है। बीसीएम, बीपीएम, एकाउंटेंट के हडताल पर होने से जननी सुरक्षा योजना, प्रसूति सहायता योजना, आशा भुगतान सभी लंबित हो गये है। जिले में करीब 350 कर्मचारी हडताल पर है। जिसका स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर व्यापक असर है।
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