मण्डला 26 अक्टूबर 2021
उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में धान एवं अन्य फसलों की कटाई उपरान्त खेतों में फसल अवशेषों को जलाये जाने से प्रदूषण के कारण पर्यावरण में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही है। भूमि में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु एवं पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है, भूमि की जल धारण क्षमता प्रभावित होती है, मृदा तापमान बढ़ता है, पर्यावरण प्रदूषित होता है। जन स्वारथ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। अतः किसानों से अपील की है कि जिले में बेहतर पर्यावरण, जन स्वास्थ्य एवं जीव जंतुओं की जीवन सुरक्षा हेतु नरवाई न जलायें। नरवाई के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर प्रदूषण एक्ट 1981 की धारा 19 (1) के तहत् फसल अवशेषों को जलाये जाने पर व्यक्ति, निकाय को पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार 2 एकड़ से कम भूमि स्वामी, निकाय 2500, 2 एकड़ से अधिक, 5 एकड़ से कम भूमि स्वामी, निकाय 5000 रूपए तथा 5 एकड से अधिक भूमि स्वामी, निकाय 15000 रूपये देय होंगे।
